ED के 20 साल, सिर्फ 60 केस में फैसला हुआ:  72% कुर्क संपत्ति वापस करनी पड़ी; 99% मामलों में अंतिम फैसला आना बाकी
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ED के 20 साल, सिर्फ 60 केस में फैसला हुआ: 72% कुर्क संपत्ति वापस करनी पड़ी; 99% मामलों में अंतिम फैसला आना बाकी

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में अपनी सफलता की दर 93% बताती है, पर यह आंकड़ा पिछले 20 सालों के केवल उन 60 मामलों पर आधारित है जिनका ट्रायल पूरा हो चुका है। इन मामलों में से 56 में 124 लोगों पर दोष साबित हुआ और 4 में आरोपी बरी हुए। इसके विपरीत अगर कुल दर्ज मामलों से तुलना की जाए तो सफलता की यह वास्तविक दर केवल 0.68% रह जाती है, क्योंकि 99% मामलों में अभी अंतिम फैसला आना बाकी है। वहीं, संपत्ति कुर्क करने के मामले में भी ऐसा ही पैटर्न दिखता है। इस दौरान एजेंसी ने 2,36,016 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कीं, जिनमें से कानूनी प्रक्रिया के बाद केवल 65,872.72 करोड़ रुपए की संपत्तियां ही स्थायी रूप से कुर्क हो पाईं। साफ है कि जांच और कुर्की की कार्रवाई तो बड़े पैमाने पर हुई है, लेकिन कानूनी रूप से अंतिम नतीजे तक पहुंचने वाले मामलों की संख्या 28% ही रही। केस, कुर्की, गिरफ्तारी और ट्रायल के 20 साल के आंकड़े… मनी लॉन्ड्रिंग: 2014 के बाद केस 2 से 5 गुना बढ़े, पहले 200 केस औसत 2014 के बाद मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2005-2014 के दौरान ईडी औसतन 209 केस प्रति वर्ष दर्ज कर रही थी, जो 2014-2024 में बढ़कर 511 हो गए। इसके बाद 2024-25 में 775 और 2025-26 में 1080 केस एक ही वर्ष में दर्ज किए गए। कार्रवाई: साल दर साल कुर्की का औसत 20 गुना तक ऐसे बढ़ गया गिरफ्तारी: हाल के सालों में कमी आई, इसके बावजूद संख्या बढ़ती गई सजा: 2005-2014 में कोई दोषसिद्धि नहीं, फिर दस साल में 38 में फैसला निपटारा: 2019 के बाद रफ्तार बढ़ी, 2025-26 में 685 मामले बंद किए गए 2019 के बाद ईडी में मामलों के निपटारे और बंद करने की रफ्तार भी बढ़ी है। 2019-20 में 35 और 2020-21 में 36 मामले बंद हुए थे, जबकि 2021-22 में यह संख्या बढ़कर 148 पहुंच गई। इसके बाद 2022-23 में 66 और 2023-24 में 85 मामले बंद हुए, जबकि 2024-25 में 198 और 2025-26 में 685 मामलों को बंद किया गया। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… ED की 2025-26 में सबसे ज्यादा 2,892 रेड, गिरफ्तारी में 27% की कमी आई प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साल 2025-26 में इतिहास में सबसे ज्यादा छापेमारी की। एजेंसी ने कुल 2,892 छापे मारे, जो पिछले साल 1,491 के मुकाबले लगभग दोगुने हैं। ED की सालाना रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तारियों में कमी आई। वहीं संपत्ति अटैचमेंट और पीड़ितों को पैसे लौटाने के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। पूरी खबर पढ़ें…



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