मेघना पंत का कॉलम:  रास्ते अलग हो जाने का ये मतलब नहीं कि दिलों में दूरियां भी हों
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मेघना पंत का कॉलम: रास्ते अलग हो जाने का ये मतलब नहीं कि दिलों में दूरियां भी हों

जब आमिर खान को उनकी पहली पूर्व पत्नी, दूसरी पूर्व पत्नी और होने वाली पत्नी के साथ एक ही कार में यात्रा करते देखा गया, तो स्वाभाविक रूप से हलचल मच गई। कुछ ने इसे आधुनिक कहा। कुछ ने इसे अजीब बताया। बहुत से लोग इसे समझ ही नहीं पाए। लेकिन शायद हम एक बड़ी […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  एआई की दुनिया में असलियत में लोगों से मिलना अब भी फायदेमंद है
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एन. रघुरामन का कॉलम: एआई की दुनिया में असलियत में लोगों से मिलना अब भी फायदेमंद है

‘गूगल… एयरपोर्ट पर रो रहे बच्चे को कैसे संभालें?’ यह सवाल उन क्रिकेटप्रेमियों को जाना-पहचाना लगेगा, जिन्होंने हाल ही में आईपीएल मैच देखे थे। इससे शायद आपको ओपनएआई के चैटजीपीटी वाले उस विज्ञापन की याद आए, जिसमें फ्लाइट लेट होने की वजह से दो लोग एयरपोर्ट पर फंसे हैं। समय बिताने को वे वॉइस कमांड […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे

बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमात्मा चाहता है कि बाहर मिला हुआ मान अभिमान में न बदल जाए, इसलिए घर-परिवार […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे

बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमात्मा चाहता है कि बाहर मिला हुआ मान अभिमान में न बदल जाए, इसलिए घर-परिवार […]

कंवल रेखी का कॉलम:  युवाओं को डॉक्टर-इंजीनियर बनने से आगे का सोचना होगा
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कंवल रेखी का कॉलम: युवाओं को डॉक्टर-इंजीनियर बनने से आगे का सोचना होगा

मेरे पिता आर्मी में थे। द्वितीय विश्व युद्ध में उन्होंने शिरकत की थी। आज के पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित गांव सुखो से बंटवारे के बाद ‘दारजी’ यानी मेरे पिता अलग-अलग पोस्टिंग्स से होते हुए कानपुर पहुंचे, जहां मेरा बचपन बीता। आर्मी से होने के कारण ‘दारजी’ की नजर में सफलता के पैमाने मिलिट्री के ही […]