उत्तर प्रदेश और पंजाब दो अहम राज्य हैं, जहां चुनाव होने वाले हैं। तमाम राजनीतिक पार्टियां इन चुनावों के लिए ही अपनी कमर कस रही हैं। नए-नए प्रभार गढ़े जा रहे हैं और नए-नए प्रभारी बनाए जा रहे हैं। हर तरह से, हर तरफ जोर-शोर से तैयारी की जा रही है। अगर कोई बेफिक्र बैठा […]
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भारत का लोकतंत्र दूसरे देशों से अलग: Gen-Z के प्रदर्शन पर थरूर बोले – देश का राजनीतिक सिस्टम दबाव में आया, लेकिन टूटा नहीं
नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने देश में हाल ही में हुए Gen-Z विरोध प्रदर्शनों को लेकर देश की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत का राजनीतिक सिस्टम दबाव में आया, लेकिन टूटा नहीं। यही भारत के लोकतांत्रिक व्यवस्था की खासियत है। थरूर ने यह बात NDTV एक कार्यक्रम में […]
आरती जेरथ का कॉलम: देश को विपक्ष से सकारात्मक बातों की भी अपेक्षा होती है
पिछले सप्ताह राजधानी दिल्ली में ‘रचनात्मक कांग्रेस’ के एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान दुनिया के नेताओं को गले लगाने की आदत का मजाक उड़ाया। अपेक्षाकृत युवा दर्शक इस मजाक पर हंसे जरूर, लेकिन बात तब अरुचिकर हो गई, जब कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने इसमें इटली […]
पवन के. वर्मा का कॉलम: हमारी राजनीति में हमेशा ही विसंगतियां क्यों बनी रहती हैं?
हमें स्वीकारना होगा कि हमारे लोकतंत्र के केंद्र में एक विरोधाभास है। हम इसमें व्याप्त विसंगतियों का विरोध तो करते हैं, लेकिन शायद ही कभी पूछते हैं कि वे क्यों बनी रहती हैं। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, परीक्षा में अनियमितताओं, महंगाई, आरक्षण, हिंसा और अन्याय जैसे मुद्दों को लेकर समय-समय पर आंदोलन खड़े तो होते हैं, लेकिन […]
प्रियदर्शन का कॉलम: चुनाव लड़ना ज्यादा जरूरी है या देश में कोई बदलाव लाना?
Hindi News Opinion Priyadarshan Column | CJP Political Party Debate & India Election Analysis 9 घंटे पहले कॉपी लिंक प्रियदर्शन लेखक और पत्रकार क्या सीजेपी को अब एक राजनीतिक दल बन जाना चाहिए? इसके पक्ष में कई तर्क दिए जा रहे हैं। उसके साथ युवाओं का व्यापक समर्थन और लगाव दिख रहा है। वह प्रतिरोध […]
मिन्हाज मर्चेंट का कॉलम: स्वस्थ राजनीति वही है जिसमें सकारात्मकता पर फोकस हो
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के पास भारत के लिए एक दृष्टि जरूर हो सकती है, लेकिन वो क्या है ये स्पष्ट रूप से पता नहीं चलती। विपक्ष के नेता बनने के बाद दिए गए वक्तव्यों में उन्होंने भारत के बारे में अपनी सोच को स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखा है। उन्होंने […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: सत्ता अपना विरोध सुने और विरोधी अपनी मर्यादा न खोए
Hindi News Opinion Pt Vijayshankar Mehta Column | Power Opposition Ethics & Democracy Debate 1 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता इन दिनों देश में आंदोलनों का उत्सव चल रहा है। कभी छात्र, कभी किसान तो कभी विपक्ष अनुष्ठान की तरह आंदोलन कर रहा है। सब अपने-अपने स्तर पर यह समझाने की कोशिश कर […]
राजदीप सरदेसाई का कॉलम: सीजेपी ‘प्रेशर-ग्रुप’ ही बनी रहेगी या फिर राजनीति में भी उतरेगी?
Hindi News Opinion Rajdeep Sardesai Column | Will CJP Remain Pressure Group Or Join Politics? 7 घंटे पहले कॉपी लिंक राजदीप सरदेसाई वरिष्ठ पत्रकार कभी-कभार असंभव लगने वाली कहानियां भी रहस्यमयी रूप से सच हो जाती हैं। हर दिन करोड़ों लोग सिस्टम को बदलने का सपना देखते हैं, लेकिन बहुत कम सफल हो पाते हैं। […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: राजनीति में अब नए विचारों की जरूरत है
यह आपके राजनीतिक रुझान पर है कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे आप क्रांति मानें या एक आई-गई आंधी। पर इतना तो निश्चित रूप से हुआ कि पहली बार सरकार के खिलाफ सीधा जनाक्रोश उभरा और उसकी खुली निंदा हुई। 20 जुलाई के बाद सरकार ने अगर तत्परता से कदम उठाए तो इसकी असली […]
संजय कुमार का कॉलम: उपचुनावों के परिणाम भाजपा को सोचने पर मजबूर करेंगे
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने कुछ को चौंकाया है, तो कुछ को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। आमतौर पर उपचुनावों में मतदाता सत्तारूढ़ दल या गठबंधन के पक्ष में मतदान करते रहे हैं। इस तर्क के आधार पर बांकीपुर में भाजपा ही मतदाताओं की पहली पसंद होनी चाहिए थी, लेकिन […]
आशुतोष वार्ष्णेय का कॉलम: नागरिक कौन है, इसी से तय होगा कि अधिकार किसे मिलेंगे
चुनाव आयोग का कहना है कि वही लोग वोट डाल सकेंगे, जो नागरिकता साबित कर सकेंगे। यह व्यवस्था पहले ही बिहार और बंगाल में लागू की जा चुकी है। अब इसे देश में लागू करने की बात हो रही है। यहां 4 सवाल हैं। नागरिकता का मतलब क्या है? क्या नागरिकता तय करने के कई […]
राजदीप सरदेसाई का कॉलम: साजिश के सिद्धांतों को कभी सच्चाई पर हावी ना होने दें
Hindi News Opinion Rajdeep Sardesai Column | Conspiracy Theories Vs Truth In Delhi Politics 6 घंटे पहले कॉपी लिंक राजदीप सरदेसाई वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली के सत्ता गलियारों में साजिश के सिद्धांत (कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज़) हमेशा फलते-फूलते रहे हैं। लेकिन आज के अत्यधिक ध्रुवीकृत भारत में वे केवल गपशप भर नहीं रह गए हैं। अब वे राजनीतिक […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: कांग्रेस के उभार की सम्भावना कितनी है?
Hindi News Opinion Shekhar Gupta Column | Congress Revival Prospect & BJP Political Strategy 4 घंटे पहले कॉपी लिंक शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’ हाल ही में मैंने अपने एक कॉलम में लिखा था कि लोकसभा में अल्पमत में होने के बावजूद भाजपा देश को एकदलीय व्यवस्था की ओर ले जा रही है। लेकिन इसका […]
संजय कुमार का कॉलम: राजनीति में उपचुनावों का ट्रेंड किस ओर इशारा करता है?
भारत में उपचुनाव तभी कराए जाते हैं, जब किसी विधानसभा या लोकसभा सीट के रिक्त हो जाने के बाद अगला चुनाव होने में छह माह से अधिक का समय शेष हो। लेकिन लोगों का ध्यान कुछ उपचुनाव ही खींच पाते हैं। वर्तमान में तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें बिहार की बांकीपुर, मध्य […]
नीरजा चौधरी का कॉलम: क्षेत्रीय दलों में आज दिखाई दे रही अंदरूनी टूट अभूतपूर्व है
तृणमूल कांग्रेस का हैरान करने वाला विघटन बंगाल से ज्यादा दिल्ली में भाजपा को मजबूत करने से जुड़ा है। महाराष्ट्र के विपरीत- जहां 2022 में शिवसेना में विभाजन और बाद में एनसीपी में टूट सरकार बनाने के लिए जरूरी था- बंगाल में ऐसी स्थिति नहीं थी। यहां भाजपा ने वैसे भी अपने दम पर दो-तिहाई […]
राजदीप सरदेसाई का कॉलम: क्या कांग्रेस से टूटकर बने दलों को उसमें लौट आना चाहिए?
भारतीय सिनेमा में सीक्वेल शायद ही सफल होते हैं। आमतौर पर दर्शक मूल फिल्म देख चुके होते हैं, नयापन खत्म हो जाता है और कहानी बासी लगने लगती है। इसीलिए ‘इंडिया-2.0’ का फिर से साथ आना बमुश्किल ही यह भरोसा जगाता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित चुनौती देने वाला गठबंधन […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: आज की राजनीति और बिखरती पार्टियां
तर्क का अंत हो गया है। बुद्धि थक गई है। राजनीति की निर्णय-क्षमता पंगु हो गई है। इसलिए, सिर्फ इसलिए, हठ पर विजय नहीं मिल पा रही। एक वीरप्पन सालों-साल लोगों को मारता रहता है और राजनीति यह होने देती है। नक्सलवादी हमें भीतर तक चीरते रहते हैं, और सरकारें यह देखती रहती हैं। राजनीति […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: हे सरकार! खन्दक से निकली हो या पाताल से?
Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column: Oh Government! Have You Emerged From A Trench—or From The Netherworld? 1 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर भले कुछ दिन ही रहा, लेकिन युद्ध विराम देखकर लग रहा था, कोई समाधान निकलने वाला है। तेल और गैस संकट से लगातार जूझ रही दुनिया को कुछ राहत मिल सकेगी। […]
पवन के. वर्मा का कॉलम: प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र में भी कुछ क्षण पूरे राष्ट्र के लिए होते हैं
Hindi News Opinion Pavan K. Varma’s Column: Even In A Competitive Democracy, There Are Moments That Belong To The Entire Nation 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पवन के. वर्मा पूर्व राज्यसभा सांसद व राजनयिक 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने ‘राष्ट्र के नाम सम्बोधन’ दिया था। उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है, क्योंकि वे सरकार […]
संजय कुमार का कॉलम: महिला आरक्षण पर निर्मित शंकाओं का समाधान जरूरी
यह तो स्पष्ट ही है कि महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर भले कुछ आशंकाएं, शर्तें और चिंताएं हों, लेकिन विपक्ष की ओर से सुनाई देने वाली तीखी आवाजें महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन विधेयक को लेकर हैं। चूंकि संसद के विशेष सत्र में दोनों विधेयकों को एक साथ चर्चा के लिए लाया गया, इसलिए […]
नीरजा चौधरी का कॉलम: अचानक बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी का क्या कारण है?
भाजपा ने हाल में तीन ऐसी पहलकदमी की हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है। पहला कदम है महिला आरक्षण विधेयक, जिसका उद्देश्य मजबूत वोट बैंक के तौर पर उभर रहीं महिलाओं के बीच अपनी पैठ बनाना है। दूसरा कदम है परिसीमन के मुद्दे को शांत करना, जिस पर असंतोष के चलते दक्षिणी राज्य भाजपा […]
मसूद पेजेश्कियान का कॉलम: इस लड़ाई से अमेरिकियों के कौन-से हित पूरे हो रहे हैं?
Hindi News Opinion Masoud Pezeshkian’s Column: Which American Interests Are Being Served By This Conflict? 8 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान के राष्ट्रपति ईरान मानव इतिहास की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। हमने कभी भी आक्रामकता, विस्तारवाद, उपनिवेशवाद या वर्चस्व का मार्ग नहीं चुना। यहां तक कि वैश्विक शक्तियों के कब्जे, आक्रमण और […]
राजदीप सरदेसाई का कॉलम: बिहार में नीतीश के बाद वाला परिदृश्य कैसा होगा?
राजनीति की दुनिया में नीतीश कुमार ने एक लंबा सफर तय किया है। बख्तियारपुर से आने वाले एक मृदुभाषी इंजीनियर से राजनेता बने नीतीश ने 2005 की सर्दियों में बिहार की बागडोर संभाली थी। अगले दो दशकों में उन्होंने बिहार की राजनीति को नया रूप दिया। साथ ही उन्होंने कई बार मोर्चे भी बदले, ताकि […]
संजय कुमार का कॉलम: चुनाव मैदान में कैसा प्रदर्शन रहता है नई पार्टियों का?
अगले कुछ महीनों में दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी तथा पूर्व में असम और बंगाल में चुनाव होंगे। ये सभी चुनाव अहम हैं, लेकिन बंगाल और तमिलनाडु पर सबसे ज्यादा निगाहें टिकी हैं। इसका एक बड़ा कारण है कि दोनों ही राज्यों में नए सियासी दलों ने एंट्री ली है। कुछ लोगों का […]
अभय कुमार दुबे का कॉलम: क्या बंगाल में भाजपा के उभार से ममता और मजबूत हुई हैं?
ममता बनर्जी की राजनीति की एक खास बात यह है कि वे हमेशा टेढ़ी चाल चलती हैं। इसलिए उनके विरोधियों के लिए उन्हें परास्त करना मुश्किल हो जाता है। ठीक उसी तरह, जैसे शतरंज के खेल में घोड़ा ढाई घर कूदता है, इसलिए उसकी मार को समझना खिलाड़ियों के लिए दिक्कततलब होता है। जबकि ममता […]
























