राजदीप सरदेसाई का कॉलम:  क्या कांग्रेस से टूटकर बने दलों को उसमें लौट आना चाहिए?
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राजदीप सरदेसाई का कॉलम: क्या कांग्रेस से टूटकर बने दलों को उसमें लौट आना चाहिए?

भारतीय सिनेमा में सीक्वेल शायद ही सफल होते हैं। आमतौर पर दर्शक मूल फिल्म देख चुके होते हैं, नयापन खत्म हो जाता है और कहानी बासी लगने लगती है। इसीलिए ‘इंडिया-2.0’ का फिर से साथ आना बमुश्किल ही यह भरोसा जगाता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अप्रत्याशित चुनौती देने वाला गठबंधन […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  आज की राजनीति और बिखरती पार्टियां
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नवनीत गुर्जर का कॉलम: आज की राजनीति और बिखरती पार्टियां

तर्क का अंत हो गया है। बुद्धि थक गई है। राजनीति की निर्णय-क्षमता पंगु हो गई है। इसलिए, सिर्फ इसलिए, हठ पर विजय नहीं मिल पा रही। एक वीरप्पन सालों-साल लोगों को मारता रहता है और राजनीति यह होने देती है। नक्सलवादी हमें भीतर तक चीरते रहते हैं, और सरकारें यह देखती रहती हैं। राजनीति […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  हे सरकार! खन्दक से निकली हो या पाताल से?
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नवनीत गुर्जर का कॉलम: हे सरकार! खन्दक से निकली हो या पाताल से?

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column: Oh Government! Have You Emerged From A Trench—or From The Netherworld? 1 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर भले कुछ दिन ही रहा, लेकिन युद्ध विराम देखकर लग रहा था, कोई समाधान निकलने वाला है। तेल और गैस संकट से लगातार जूझ रही दुनिया को कुछ राहत मिल सकेगी। […]

पवन के. वर्मा का कॉलम:  प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र में भी कुछ क्षण पूरे राष्ट्र के लिए होते हैं
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पवन के. वर्मा का कॉलम: प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र में भी कुछ क्षण पूरे राष्ट्र के लिए होते हैं

Hindi News Opinion Pavan K. Varma’s Column: Even In A Competitive Democracy, There Are Moments That Belong To The Entire Nation 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पवन के. वर्मा पूर्व राज्यसभा सांसद व राजनयिक 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने ‘राष्ट्र के नाम सम्बोधन’ दिया था। उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है, क्योंकि वे सरकार […]

संजय कुमार का कॉलम:  महिला आरक्षण पर निर्मित शंकाओं का समाधान जरूरी
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संजय कुमार का कॉलम: महिला आरक्षण पर निर्मित शंकाओं का समाधान जरूरी

यह तो स्पष्ट ही है कि महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर भले कुछ आशंकाएं, शर्तें और चिंताएं हों, लेकिन विपक्ष की ओर से सुनाई देने वाली तीखी आवाजें महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन विधेयक को लेकर हैं। चूंकि संसद के विशेष सत्र में दोनों विधेयकों को एक साथ चर्चा के लिए लाया गया, इसलिए […]

नीरजा चौधरी का कॉलम:  अचानक बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी का क्या कारण है?
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नीरजा चौधरी का कॉलम: अचानक बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी का क्या कारण है?

भाजपा ने हाल में तीन ऐसी पहलकदमी की हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है। पहला कदम है महिला आरक्षण विधेयक, जिसका उद्देश्य मजबूत वोट बैंक के तौर पर उभर रहीं महिलाओं के बीच अपनी पैठ बनाना है। दूसरा कदम है परिसीमन के मुद्दे को शांत करना, जिस पर असंतोष के चलते दक्षिणी राज्य भाजपा […]

मसूद पेजेश्कियान का कॉलम:  इस लड़ाई से अमेरिकियों के कौन-से हित पूरे हो रहे हैं?
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मसूद पेजेश्कियान का कॉलम: इस लड़ाई से अमेरिकियों के कौन-से हित पूरे हो रहे हैं?

Hindi News Opinion Masoud Pezeshkian’s Column: Which American Interests Are Being Served By This Conflict? 8 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान के राष्ट्रपति ईरान मानव इतिहास की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। हमने कभी भी आक्रामकता, विस्तारवाद, उपनिवेशवाद या वर्चस्व का मार्ग नहीं चुना। यहां तक कि वैश्विक शक्तियों के कब्जे, आक्रमण और […]

राजदीप सरदेसाई का कॉलम:  बिहार में नीतीश के बाद वाला परिदृश्य कैसा होगा?
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राजदीप सरदेसाई का कॉलम: बिहार में नीतीश के बाद वाला परिदृश्य कैसा होगा?

राजनीति की दुनिया में नीतीश कुमार ने एक लंबा सफर तय किया है। बख्तियारपुर से आने वाले एक मृदुभाषी इंजीनियर से राजनेता बने नीतीश ने 2005 की सर्दियों में बिहार की बागडोर संभाली थी। अगले दो दशकों में उन्होंने बिहार की राजनीति को नया रूप दिया। साथ ही उन्होंने कई बार मोर्चे भी बदले, ताकि […]

संजय कुमार का कॉलम:  चुनाव मैदान में कैसा प्रदर्शन रहता है नई पार्टियों का?
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संजय कुमार का कॉलम: चुनाव मैदान में कैसा प्रदर्शन रहता है नई पार्टियों का?

अगले कुछ महीनों में दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी तथा पूर्व में असम और बंगाल में चुनाव होंगे। ये सभी चुनाव अहम हैं, लेकिन बंगाल और तमिलनाडु पर सबसे ज्यादा निगाहें टिकी हैं। इसका एक बड़ा कारण है कि दोनों ही राज्यों में नए सियासी दलों ने एंट्री ली है। कुछ लोगों का […]

अभय कुमार दुबे का कॉलम:  क्या बंगाल में भाजपा के उभार से ममता और मजबूत हुई हैं?
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अभय कुमार दुबे का कॉलम: क्या बंगाल में भाजपा के उभार से ममता और मजबूत हुई हैं?

ममता बनर्जी की राजनीति की एक खास बात यह है कि वे हमेशा टेढ़ी चाल चलती हैं। इसलिए उनके विरोधियों के लिए उन्हें परास्त करना मुश्किल हो जाता है। ठीक उसी तरह, जैसे शतरंज के खेल में घोड़ा ढाई घर कूदता है, इसलिए उसकी मार को समझना खिलाड़ियों के लिए दिक्कततलब होता है। जबकि ममता […]

संजय कुमार का कॉलम:  अस्मिता की सियासत पर विकास का रोडमैप हावी
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संजय कुमार का कॉलम: अस्मिता की सियासत पर विकास का रोडमैप हावी

Hindi News Opinion Maharashtra Urban Body Polls: BJP Dominates Mumbai BMC Election Results 3 घंटे पहले कॉपी लिंक संजय कुमार, प्रोफेसर व राजनीतिक टिप्पणीकार बीएमसी के चुनाव नतीजे बताते हैं कि भारतीय राजनीति में भाजपा का वर्चस्व लगातार बढ़ता जा रहा है। भाजपा धीरे-धीरे पीएम मोदी के उस कथन को पूरा करने की ओर बढ़ […]