रीटा कोठारी का कॉलम:  क्या हम कभी केवल अपनी ही कहानी सुना सकते हैं?
टिपण्णी

रीटा कोठारी का कॉलम: क्या हम कभी केवल अपनी ही कहानी सुना सकते हैं?

साहित्य के इतिहास में एक खूब जाना-माना वाक्य है- ‘द पास्ट इज अ डिफ्रेंट कंट्री, दे डु थिंग्स डिफ्रेंटली देयर’ (‘अतीत एक अलग देश है, जिसका अपना भूगोल है, अपने रीति-रिवाज हैं’)। 1953 में हार्टले द्वारा लिखे गए उपन्यास ‘द गो-बिटवीन’ का यह पहला वाक्य है। यहां अतीत को दूसरा देश कहकर शायद हमें बताया […]

रीता कोठारी का कॉलम:  अपने अनुभवों के लिए हमारे पास क्या हमेशा शब्द होते हैं?
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रीता कोठारी का कॉलम: अपने अनुभवों के लिए हमारे पास क्या हमेशा शब्द होते हैं?

कई साल पहले मैं अपनी चाची को एक प्रख्यात होम्योपैथ के पास ले गई थी। जैसा कि होम्योपैथी में अकसर होता है, मेरी चाची से कई सवाल पूछे गए- आप कहां रहती हो, घर में कौन-कौन है, आप को चिंता करने की आदत है, आप गुस्से में आ जाती हो या नहीं? मेरे परिवार के […]