उनकी उपलब्धि शायद “माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी जितनी बड़ी न हो, जिनके बारे में ज्यादातर लोगों ने सुना होगा। लेकिन उनका जज्बा वही था। साल 2024 तक, शकुंतला चतर (35) को ओडिशा के चंदका-डम्पड़ा वन्यजीव अभयारण्य में जंगली जानवरों, खासकर हाथियों से भरे जंगल के बीच कम से कम एक घंटे पैदल चलना पड़ता था। […]
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डॉ. चन्द्रकान्त लहारिया का कॉलम: क्या हमारी रसोई को बिजली से चलाने का समय अब आ गया है?
भारत में रसोई को अकसर घर का दिल कहा जाता है। लेकिन इसके पीछे एक असहज सच भी छिपा है- हमारी रसोई अमूमन घर के सबसे प्रदूषित स्थानों में से एक होती है। आज जब पश्चिम एशिया के संघर्षों और तेल-गैस की अनिश्चित आपूर्ति के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर है, तब भारत को पुनर्विचार […]
एन. रघुरामन का कॉलम: अधिकतर परिवारों के लिए फोन बेबीसिटर बन गए हैं
अगर आप ग्रामीण भारत में किसी पैसेंजर ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो आपको कुछ ऐसा दृश्य दिख सकता है- चलती ट्रेन में भी किचन की जिम्मेदारी संभाल रही एक युवा मां अपने हैंडबैग में हाथ डालती है। उसका साल भर का बेटा राहुल (काल्पनिक नाम) बेचैन है। उसके नन्हे-से हाथ मां की कलाई […]







