एन. रघुरामन का कॉलम:  बिजनेस मॉडल बदलने के लिए माइंडसेट बदलना जरूरी है
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एन. रघुरामन का कॉलम: बिजनेस मॉडल बदलने के लिए माइंडसेट बदलना जरूरी है

Hindi News Opinion N Raghuraman Column | Mindset Change For Business Model | Rural India Monsoon Impact 5 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु ग्रामीण भारत की वे कालजयी तस्वीरें याद कीजिए। बच्चे नंगे पैर कीचड़ भरी सड़कों पर नाच रहे हैं। पानी से भरे गड्ढों में छप-छप कर रहे हैं। पहली बारिश […]

UP: प्यासे गांव की दर्दनाक कहानी, पशु भी नहीं पीते यहां का पानी; लोग एक-एक बूंद के लिए करते हैं संघर्ष
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UP: प्यासे गांव की दर्दनाक कहानी, पशु भी नहीं पीते यहां का पानी; लोग एक-एक बूंद के लिए करते हैं संघर्ष

{“_id”:”6a2fa67bfc1873f0ab040925″,”slug”:”villagers-walk-kilometres-for-drinking-water-as-salty-groundwater-worsens-crisis-2026-06-15″,”type”:”feature-story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”UP: प्यासे गांव की दर्दनाक कहानी, पशु भी नहीं पीते यहां का पानी; लोग एक-एक बूंद के लिए करते हैं संघर्ष”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}} संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 15 Jun 2026 12:45 PM IST मथुरा के फरह क्षेत्र के पौरी और शहजादपुर गांवों में भूजल खारा होने के […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  वहां खोदने का फैसला लें, जहां कोई और नहीं खोदता
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एन. रघुरामन का कॉलम: वहां खोदने का फैसला लें, जहां कोई और नहीं खोदता

उनकी उपलब्धि शायद “माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी जितनी बड़ी न हो, जिनके बारे में ज्यादातर लोगों ने सुना होगा। लेकिन उनका जज्बा वही था। साल 2024 तक, शकुंतला चतर (35) को ओडिशा के चंदका-डम्पड़ा वन्यजीव अभयारण्य में जंगली जानवरों, खासकर हाथियों से भरे जंगल के बीच कम से कम एक घंटे पैदल चलना पड़ता था। […]

डॉ. चन्द्रकान्त लहारिया का कॉलम:  क्या हमारी रसोई को बिजली से चलाने का समय अब आ गया है?
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डॉ. चन्द्रकान्त लहारिया का कॉलम: क्या हमारी रसोई को बिजली से चलाने का समय अब आ गया है?

भारत में रसोई को अकसर घर का दिल कहा जाता है। लेकिन इसके पीछे एक असहज सच भी छिपा है- हमारी रसोई अमूमन घर के सबसे प्रदूषित स्थानों में से एक होती है। आज जब पश्चिम एशिया के संघर्षों और तेल-गैस की अनिश्चित आपूर्ति के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर है, तब भारत को पुनर्विचार […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  अधिकतर परिवारों के लिए फोन बेबीसिटर बन गए हैं
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एन. रघुरामन का कॉलम: अधिकतर परिवारों के लिए फोन बेबीसिटर बन गए हैं

अगर आप ग्रामीण भारत में किसी पैसेंजर ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो आपको कुछ ऐसा दृश्य दिख सकता है- चलती ट्रेन में भी किचन की जिम्मेदारी संभाल रही एक युवा मां अपने हैंडबैग में हाथ डालती है। उसका साल भर का बेटा राहुल (काल्पनिक नाम) बेचैन है। उसके नन्हे-से हाथ मां की कलाई […]