मुकेश माथुर का कॉलम:  विकसित भारत के केंद्र में इकोनॉमी तो है, पर इंसान?
टिपण्णी

मुकेश माथुर का कॉलम: विकसित भारत के केंद्र में इकोनॉमी तो है, पर इंसान?

शून्य से शिखर तक पहुंचने वाला एक व्यक्ति अपना ‘विकास’ किसे मानेगा? पैसे, पद, प्रतिष्ठा को या अच्छी गुणवत्ता वाले जीवन-स्तर, बौद्धिक विकास, मन की शांति और खुशी को? इससे भी आगे, अपने दायरे में आने वाले लोगों की जिंदगियां बेहतर करने को? शायद इस सभी को, लेकिन सिर्फ बड़ा बंगला, बड़ी गाड़ी विकास नहीं […]

Blog: Destruction at the cost of development, by ignoring climate change we are digging our own grave – Blog: विकास की कीमत पर विनाश, जलवायु परिवर्तन की अनदेखी कर हम खोद रहे हैं अपनी ही कब्र
धर्म आस्था

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दुनिया मेरे आगे: जब बुद्धिमत्ता प्रकृति से टकराए, विकास की दौड़ में विनाश की आहट
ब्रेकिंग न्यूज़

दुनिया मेरे आगे: जब बुद्धिमत्ता प्रकृति से टकराए, विकास की दौड़ में विनाश की आहट

मनुष्य की बुद्धिमत्ता उसकी कल्पना से कहीं अधिक समृद्ध और गतिशील है, जितना कि हमें औपचारिक शैक्षणिक शिक्षा द्वारा विश्वास दिलाया गया है।’ प्रसिद्ध शिक्षाविद् सर केन राबिंसन के ये विचार हमें मनुष्य और उसकी बुद्धिमत्ता का बोध कराते हैं। मनुष्य को सभी जीवों में क्यों उच्चतम जीव माना गया है? यहां तक कि उसका […]