नई दिल्ली2 घंटे पहले
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रिसर्च बताती है कि सही खानपान कोशिकाओं की मरम्मत और दिमाग की सुरक्षा तक करता है।- प्रतीकात्मक फोटो
अब बुढ़ापे में सेहत का राज सिर्फ कम खाना या प्रोटीन नहीं रहा। दुनिया के बड़े शोध संस्थानों की रिसर्च बताती है कि सही खानपान कोशिकाओं की मरम्मत और दिमाग की सुरक्षा तक करता है। जानिए ऐसे 2 प्रभावी आहार पैटर्न।
1. माइंड डाइट – भूलने की बीमारी के खतरे को कम करने में मददगार
यह डाइट फॉर्मूला खास तौर पर दिमाग की सेहत के लिए मददगार है। अल्जाइमर जैसी भूलने की बीमारी को घटाने में लाभदायक हो सकती है।
क्यों भरोसेमंद है- शिकागो की रश यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पाया कि जो लोग इस डाइट को अपनाते हैं, उनमें अल्जाइमर का खतरा आधा घट जाता है। हालांकि डाइट के साथ नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से बचाव व बीपी, शुगर कोलेस्ट्रॉल पर कंट्रोल भी जरूर है।
क्या खाएं – अपने भोजन में हफ्ते में कम से कम दो बार बेरीज- जैसे स्ट्रॉबेरी, जामुन, शहतूत और रोजाना हरी पत्तेदार सब्जियां व साबुत अनाज को शामिल करें।
आसान टिप – काले जामुन या स्ट्रॉबेरी ताजा या सुखाकर खाएं। यह दिमाग की कोशिकाओं को बूढ़ा होने से बचाने में मदद कर सकता है।
2. प्लांट रिच डाइट – पेट से आपकी इम्युनिटी का स्तर बढ़ाने में सहायक
यह डाइट सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि पेट के अच्छे बैक्टीरिया की विविधता बढ़ाने के लिए है, जो उम्र के साथ कम होने लगते हैं।
क्यों भरोसेमंद है – अमेरिका की माइक्रोबायोम रिसर्च में पाया, जो लोग हफ्ते में 30 या उससे ज्यादा अलग-अलग पौधों से बने खाद्य पदार्थ खाते हैं, उनके पेट के बैक्टीरिया स्वस्थ रहते हैं। चूंकि शरीर की 70% इम्यून कोशिकाएं पेट में ही होती हैं, इसलिए इन्हें स्वस्थ रखना जरूरी है।
क्या खाएं – 30 पौधों का मतलब केवल सब्जियां नहीं, दालें, साबुत अनाज, मसाले (हल्दी, जीरा, दालचीनी) बीज नट्स और फल जैसी चीजें अलग-अलग लाभकारी हैं।
आसान टिप – एक जैसी दाल-रोटी के बजाय ज्वार बाजरा-रागी मिले आटे को अपनाएं। थाली में अलग-अलग रंगों की सब्जियां शामिल करें।
ये 3 आदतें भी आपके लिए उपयोगी
रंगों का नियम – थाली में रोज कम से कम 3 अलग रंग जरूर हों – हरी सब्जी, पीली दाल, लाल फल।
धूप के साथ भोजन – भोजन का बड़ा हिस्सा दिन में धूप रहते ही खा लें।
रिफाइंड से दूर रहें – रिफाइंड तेल को सेहत का दुश्मन मानकर छोड़ दें।
(डिस्क्लेमर: यदि कोई बीमारी हो या दवा चल रही है तो डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या डायटिशियन से सलाह जरूर लें।)
(एक्सपर्ट पैनल – डॉ. प्रसून चटर्जी, जेरियाट्रिक्स मेडिसिन, अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली ∙ डॉ. परमीत कौर, पूर्व चीफ डाइटिशियन, डायटेटिक्स डिपार्टमेंट एम्स, नई दिल्ली)









