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एन. रघुरामन का कॉलम: विदेशों में आजकल फुटपाथ की भी ‘आंखें’ होती हैं

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1 घंटे पहले

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एन. रघुरामन
मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु

शिकागो के एक छोटे-से बोडेगा (किराना दुकान) की हरी रोशनी गीले डामर पर फैल रही थी। मार्कस (काल्पनिक नाम) ने अपनी घड़ी देखी। वह पूरे चालीस मिनट से उस सड़क पर बेचैनी के साथ नजर रखे हुए था, जहां पहली दुकान के पास वह खड़ा था और सातवीं दुकान तक उसे पहुंचना था। वहां न पुलिस की गाड़ियां थीं, न पैदल गश्त करने वाले जवान और न ही अंडरकवर एजेंट्स। वह पूरा ब्लॉक उसका था।

उसने चेहरे का निचला हिस्सा छिपाने के लिए कॉलर ऊपर चढ़ाया और काला चश्मा पहन लिया। फिर बाहर निकलकर उसने जानबूझकर लंगड़ाने का स्वांग किया। यह भ्रम पैदा करने की एक बेजोड़ तरकीब थी। ऊपर लगे कैमरों को उसके कपड़ों के सिवा कुछ नहीं दिख रहा था और चाल-ढाल का विश्लेषण करने वाले एल्गोरिदम उसे किसी अनजान व्यक्ति के रूप में ही दर्ज करते।

मार्कस ने सिर झुकाए रखा और उसकी नजरें सड़क पर पड़ी दरारों पर टिकी रहीं। उसने अपने ईयरपीस का बटन दबाया और फुसफुसाया, ‘मैं अब निकल रहा हूं। मेरे वहां से निकलने तक किसी बाहरी आदमी को अंदर मत आने देना।’वह बेहद तेजी से आगे बढ़ा। सातवीं दुकान तक पहुंचने में उसे ठीक एक मिनट लगा। लेकिन इसके तीन मिनट बाद ही वह स्ट्रीट लाल और नीली बत्तियों से जगमगा उठी। मार्कस अपने औजारों का बैग निकालने के लिए हाथ बढ़ा भी नहीं पाया था कि उसकी कलाइयों पर हथकड़ियां कस दी गईं।

पुलिस लॉकअप में बैठा मार्कस उस एक मिनट की अपनी चहलकदमी को बार-बार याद कर रहा था। वहां सादे कपड़ों में कोई पुलिसकर्मी नहीं था, न कोई गवाह। उसने सिर झुकाकर रखा था और अपने सहयोगी से बात करते हुए डामर पर ही नजरें टिकाए रखी थीं। फिर पुलिस को खबर किसने दी? उसके स्वांग का भेद खोलकर उसे किसने पहचान लिया था? तभी उसे एक अजीब-सी बात याद आई।

रास्ते में वह प्लास्टिक के एक छोटे-से डिब्बे से बचकर निकला था। वह चार पहियों वाला एक फूड डिलीवरी रोबोट था, जो बर्गर का ऑर्डर लेकर फुटपाथ पर धीरे-धीरे डोलता हुआ आगे बढ़ रहा था। जल्दबाजी में उसके पास से निकलते हुए मार्कस ने उसे गाली भी दी थी। अचानक जैसे उसके दिमाग में बिजली कौंधी। तो क्या वह रोबोट ही मुखबिर था! ऊपर लगे कैमरों से बचने के लिए सिर झुकाकर चलने के फेर में उसने सीधे फुटपाथ पर चलने वाले उस रोबोट के लो-एंगल नेविगेशन कैमरों में देख लिया था।

मशीन से कुछ ही फीट ऊपर बड़बड़ाने से उसकी भारी, खुरदरी आवाज भी रोबोट के उच्च-गुणवत्ता वाले माइक्रोफोन में रिकॉर्ड हो गई थी। रोबोट के एआई ने ऑडियो का विश्लेषण किया, स्थानीय पुलिस के वांछित अपराधियों के रिकॉर्ड से उसकी आवाज का मिलान किया और उसके को-ऑर्डिनेट्स निकटतम पुलिस थाने को भेज दिए। एक टैको डिलीवरी ने उसकी पहचान उजागर कर दी थी! मार्कस की कहानी भले ही फिल्मों के लिए भविष्य की कोई फिक्शनल स्टोरी हो, लेकिन यह टेक्नोलॉजी दुनिया के कुछ बड़े शहरों की सड़कों पर पहले ही घूम रही है।

इलिनॉय में चल रही एक तीखी कानूनी लड़ाई हमें यह सवाल पूछने पर मजबूर कर रही है कि ये सुविधाजनक छोटी मशीनें हमारी मददगार हैं या गुप्त मुखबिर? इस सप्ताह शिकागो की कुक काउंटी में दायर मुकदमों में कोको रोबोटिक्स और सर्व रोबोटिक्स निशाने पर हैं। ये दोनों इस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां हैं और इनके स्वचालित रोबोट्स, अर्बन फूड डिलीवरी का आम दृश्य बन चुके हैं। मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि ये रोवर्स बिना किसी की सहमति के अपने कैमरों और लाई-डीएआर सेंसरों की मदद से ग्राहकों के चेहरे, हाथ और बायोमेट्रिक्स को चुपचाप स्कैन करते रहते हैं। दोनों कंपनियों ने इन आरोपों का दृढ़ता से खंडन किया है।

आरोपों में दावा किया गया है कि इस तरह जुटाए गए डेटा का इस्तेमाल कंपनियों के अपने एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करने और उन्हें सर्विस देने वाली थर्ड पार्टियों के साथ साझा करने के लिए किया जाता है। कंपनियों का कहना है कि रोबोट में लगे सेंसरों का इस्तेमाल केवल ऑपरेशनल कार्यों के लिए होता है, जैसे दूरी का आकलन करना, रास्ते में आने वाली बाधाओं से बचना और मनुष्यों या आवारा पशुओं के हस्तक्षेप के बिना शहर के फुटपाथों पर सुरक्षित ढंग से चलते रहना।

उनका दावा है कि उनके सिस्टम्स स्थायी बायोमेट्रिक्स प्रोफाइल नहीं बनाते, न ही किसी की निगरानी या पहचान करते हैं। फिर भी, यह कानूनी टकराव निजता की बहस के एक नए और चिंताजनक आयाम को उजागर करता है। जैसे-जैसे स्वचालित मशीनें हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में सहजता से घुलती-मिलती जा रही हैं, सार्वजनिक सुविधा और व्यापक निगरानी के बीच की रेखा भी धुंधलाती जा रही है।

फंडा यह है कि दीपावली की इन छुट्टियों में अगर आप विदेश जाएं, तो याद रखें कि साइड-वॉक्स की भी आंखें होती हैं। और अगली बार जब आप सड़क पर चार पहियों वाले किसी प्यारे-से रोबोट को डगमगाते हुए खाना पहुंचाते देखें और उसे देखते हुए ऊंची आवाज में कुछ कहें, तो यह भी हो सकता है कि वह आपके बारे में नोट्स ले रहा हो!

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