कविताओं से भर दिए गहरे जख्म:  अमेरिकी लेखिका बता रही हैं- दर्द से उबरने और बेहतर इंसान बनने में कला कैसे बनी मददगार
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कविताओं से भर दिए गहरे जख्म: अमेरिकी लेखिका बता रही हैं- दर्द से उबरने और बेहतर इंसान बनने में कला कैसे बनी मददगार

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‘कलाकार अपनी संवेदनशीलता के कारण ज्यादा दर्द महसूस करते हैं और कला को हीलिंग टूल की तरह इस्तेमाल करते हैं…’ चर्चित कवयित्री और लेखिका सैमी कैरामेला कहती हैं- कविता ने उन्हें अपनी कमजोरियों और आघात को स्वीकार करने की ताकत दी। लेखन उनके लिए सिर्फ आत्म-अभिव्यक्ति का जरिया नहीं, बल्कि दर्द से उबरने की दवा बन गया। उनके लिए कलम एक हथियार और औषधि दोनों है, कैसे- बता रही हैं सैमी … ‘कविता में जख्मों को भरने की जादुई ताकत होती है, यह अहसास मुझे बचपन में ही हो गया था। जब मैं बड़ी हो रही थी, तब अक्सर रातों को खुद को कमरे में बंद कर लिया करती थी। क्रिसमस लाइट्स की मद्धिम रोशनी में डायरी खोलती और घंटों गीत व कविताएं लिखती। उन पंक्तियों में मेरी निजी जिंदगी का अक्स होता… ओसीडी से मेरा संघर्ष, समाज में फिट न हो पाने की छटपटाहट, अंतर्मुखी स्वभाव और मुझे घेरने वाला सन्नाटा…। लोग कहते हैं कि बेहतरीन कलाकार वही होते हैं जो भीतर से टूटे होते हैं। मुझे लगता है कि कलाकार होना दुख की शर्त नहीं है, बल्कि कई कलाकार जीवन में इतने दर्द से गुजरते हैं कि वे जख्मों को भरने के लिए कला का सहारा ले लेते हैं। हम जैसे लोग आम लोगों की तुलना में थोड़े ज्यादा संवेदनशील होते हैं और भावनाओं को गहराई से महसूस करते हैं। ऐसे में हमारे भीतर के गुबार को बाहर निकालने का जरिया ‘लिखे हुए शब्द’ बन जाते हैं। मेरे लिए कविता पहला प्यार और सबसे बड़ा मरहम है। लिखना आत्म-अभिव्यक्ति का मेरा तरीका है, और इसे साझा करना लोगों से जुड़ने का जरिया। मैं पाठकों से चुपके से गुजारिश करती हूं कि वे मुझे समझें, मुझसे जुड़ें और मुझे वैसी ही देखें जैसी मैं हूं: कमियों से भरी, बेहद संवेदनशील इंसान, जो बस जीने की कोशिश कर रही है। भावनाओं को दुनिया के सामने खुलकर रख देने के लिए हिम्मत चाहिए, पर यही बेबाक आत्म-मंथन जख्मों को भरने की चाबी है। बरसों तक दुख में रहने के बाद, मैंने पहला कविता संग्रह ‘मॉर्निंग मून’ प्रकाशित किया। बचपन व युवावस्था में कई ऐसे दौर आए जब ट्रॉमा शरीर के भीतर पत्थर या गले पर दवाब की तरह रहता था। तब ‘लेखन’ ही हिम्मत देता था। मैं घंटों रूपकों के पीछे असहनीय दर्द छुपाती, उसे प्रोसेस करती। कविता से दुनिया तक पहुंची आवाज कविता ने मुझे बिना शोर मचाए अपनी आवाज को दुनिया तक पहुंचाने की ताकत दी है। आघात की वजह से जो कलाकार खुद को असहाय और गहरे आत्म-अपराध से घिरा पाते हैं, वे कलम के पीछे छिप सकते हैं। एक बार जब शब्द कागज पर उतर जाते हैं, तो पुराना दर्द अपना हक खो देता है। अगर कविता न होती, तो बरसों के धोखे व ट्रॉमा की वजह से मैं शायद एक गुस्से और बदले की भावना से भरी इंसान बन चुकी होती। पर मेरी कलम ही मेरा हथियार है और मेरी दवा भी। कविता आत्मा की वैश्विक भाषा है, बशर्ते हम इसके लिए अपने दिलों को खोल सकें।’ कमियों को स्वीकारना ही भीतर से मजबूत बनाता है ‘कविता में वह नाजुकता होती है, जिससे लोग अक्सर बचते हैं। अपने मानस के अंधेरों में उतरना हिम्मत मांगता है, और उस दर्द को दुनिया के सामने रखना उससे भी बड़ा साहस है। यही ईमानदारी और आत्म-मंथन आपके घावों को भरने की कुंजी है। जब आप अपनी कमियों को स्वीकार कर लेते हैं और भावनाओं को तमगे की तरह पहनते हैं, तो आत्मविश्वास और आत्म-करुणा के साथ उनसे उबरना संभव हो जाता है। यही प्रक्रिया आपको भीतर से मजबूत बनाती है।’



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