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अमेरिका के ओरेगन की पहाड़ियों में यह अनोखा घर चर्चा में हैं। बाहर से भले अलग दिखे, पर भीतर जापानी शौजी पर्दे, तातामी चटाइयां और सदियों पुरानी नक्काशीदार लकड़ी दिखती है। ‘कोमिंका’ कहलाने वाला यह पारंपरिक घर जापान से लाकर यहां दोबारा बनाया गया है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं। 61 वर्षीय कियोमी कोईके और उनके 80 वर्षीय पति बिल ओलिवर ने एक ऐतिहासिक घर को बचाने की कोशिश की। कियोमी को जब पता चला कि उनके गृह-नगर का पारंपरिक घर ध्वस्त किया जा रहा है, तो उन्होंने बचाने का फैसला किया। उन्होंने जापानी वास्तुकारों और संरक्षण समूहों की मदद से पूरे घर को सावधानीपूर्वक एक-एक हिस्से में खुलवाया। घर के हर लकड़ी के बीम पर पहचान के लिए कोड लिखे गए, फिर उन्हें पैक कर जहाज से अमेरिका भेजा गया। समुद्री यात्रा में लकड़ी को सुरक्षित रखना और स्थानीय नियमों के अनुसार मंजूरियां हासिल करना आसान नहीं था। लगभग दो साल की मेहनत के बाद इस घर को ओरेगन में पारंपरिक जापानी शैली में दोबारा बनाया गया। आज यह घर लोगों को मानसिक शांति, जापानी संस्कृति और टी-पार्टी का अनुभव कराने का केंद्र बन चुका है। कियोमी कहती हैं कि यहां लोग सुकून महसूस करते हैं। जापान में घटती आबादी के कारण 90 लाख से ज्यादा ऐसे घर खाली पड़े हैं। जापानी आर्किटेक्चर और आधुनिक दुनिया के बीच जुड़ाव जापानी आर्किटेक्ट योशिहिरो ताकिशिता कहते हैं, इन पारंपरिक घरों में सीमाओं के पार जाने की ताकत है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह घर जापान में है या विदेश में। यह सिर्फ लकड़ी का ढांचा नहीं, बल्कि आत्मा का कोना है। जब सैकड़ों साल पुरानी यह काली पड़ी बीम सांस लेती है, तो सीमाओं से परे इंसान को इतिहास, सुकून व अपने अस्तित्व की जड़ों से जोड़ देती है। जापान में खाली पड़े इन विरासती घरों को नष्ट होने से बचाकर सात समंदर पार नया जीवन देना वास्तुकला का लेन-देन नहीं, बल्कि जापानी कारीगरी व आधुनिक दुनिया के बीच अटूट भावनात्मक जुड़ाव है।
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