पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  सोशल मीडिया युग में भक्ति व योग का महत्व और बढ़ा है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: सोशल मीडिया युग में भक्ति व योग का महत्व और बढ़ा है

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4 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

ख्यालों में रहने वाले लोग ख्यालों में ही मिलते हैं- ये पंक्ति सुनने में तो अच्छी लगती है, लेकिन जब ख्यालों वाले लोग वास्तविक रूप में सामने आते हैं तो या तो सपने पूरे हो जाते हैं या सपने टूट जाते हैं। इन दिनों नई पीढ़ी तो बहुत ख्यालों में रहने लगी है।

एक ऐसे कल्पना-लोक में सोशल मीडिया ने ले जाकर हमको छोड़ा है कि बहुत सारे लोग तो इससे बाहर ही नहीं निकल पाते। इस दुनिया में कुछ लोग ऐसे हैं, जिनको इन्फ्लुएंसर्स कहते हैं। ये ऐसा प्रभाव बनाते हैं कि इनके चक्कर में जो पड़ जाए, उसको अपने प्रति भी गलतफहमी हो जाती है।

हो सकता है वो बात सही बोल रहे हों, लेकिन सुनने वाले उस सही बात को अपने से जोड़ लेते हैं। भीतर मन अपनी दुनिया बना रहा है, जो पूरी तरह से काल्पनिक है। बाहर सोशल मीडिया यथार्थ से दूर ले जा रहा है।

ऐसे चुनौती के समय भक्ति और योग का महत्व और बढ़ जाता है। जो लोग सही ढंग से भक्ति और योग से जुड़े रहेंगे, वे कल्पना-लोक में विचरने के बाद भी नुकसान नहीं उठाएंगे।

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