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- Column By Pt. Vijay Shankar Mehta – One Meaning Of ‘Bhajan’ Is Also To Donate And Respect Food.
2 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
यह तो तय है कि भगवान का भजन करो तो क्लेश मिट जाते हैं। अपने भी, दूसरों के भी। वैसे क्लेश का सीधा अर्थ होता है कष्ट और कलह। लेकिन योगशास्त्र के अनुसार इसके पांच मायने हैं- अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, अभिनिवेश। अभिनिवेश यानी मृत्यु का भय।
रामचरितमानस में काकभुशंडि जी गरुड़ जी से कहते हैं- ऐसेहिं हरि बिनु भजन खगेसा, मिटइ न जीवन्ह केर कलेसा। हे पक्षीराज, इसी प्रकार श्रीहरि के भजन बिना जीवों का क्लेश नहीं मिटता। यदि हम अपने क्लेश मिटाना चाहते हैं तो भजन के अर्थ को भी ठीक से समझना होगा।
ईश्वर के सुमिरन में भी परहितकारी वृत्ति होना चाहिए। हमारे देश में इस समय एक क्लेश है कि 142 करोड़ लोगों में से आज भी 20 करोड़ लोग भूखे सोते हैं। बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। हर 10 में से 9 शिशु न्यूनतम पोषण नहीं ले पाते। तो हमारे लिए भजन का एक अर्थ होना चाहिए कि अन्न दान करें। अन्न का व्यर्थ दुरुपयोग न करें। अन्नदान और अन्न-सम्मान भी एक भजन है।








