11 घंटे पहले
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- पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली इन दिनों अपने एक्टिंग डेब्यू के कारण चर्चा में हैं, उनकी सफलता से जुड़ी खास बातें, उन्हीं की जुबानी…
मैंने नीली जर्सी में बहुत सारी यादें संजोई हैं। जब मैं उन शानदार पलों को याद करता हूं, तो आज भी वही उत्साह महसूस होता है। जब आपको अपने देश के लिए खेलने का अवसर मिलता है, तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। उस जर्सी को पहनने की याद अब भी वैसी ही है। सम्मान व गर्व कभी नहीं बदलते। किसी जिम्मेदारी को संभालते वक्त दबाव का सामना करने का तरीका खोजना ही दरअसल सबकुछ है। हर काम में दबाव होता है, आपको उसे हैंडल करना आना चाहिए। दुनिया में कोई काम ऐसा नहीं, जिसमें उतार-चढ़ाव न हों। इसलिए प्रेशर तो बना रहेगा, आपको इसे हल करना होगा। क्योंकि अगर आप नहीं करेंगे, तो कोई और करेगा। चीजों को सरल रखें और प्रदर्शन पर ध्यान दें, क्योंकि वही आखिरकार प्रेशर को संभालने में मदद करता है। अच्छे प्रदर्शन से आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ती है। आप प्रेशर को संभालना सीखते हैं। जब आप कप्तान होते हैं, तो आप कई चीजों में शामिल होते हैं। खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाने की कोशिश करते हैं और अनजाने में बिना महसूस किए यह आप पर असर डालता है। दिन के अंत में जब आप अपने कमरे में लौटते हैं, तो थक चुके होते हैं। आप सभी पर काम कर रहे होते हैं- टीम पर, खुद पर। धीरे-धीरे, यह आपको प्रभावित करता है। लेकिन इसकी अच्छाई कभी कम नहीं होती। आप खुश रहते हैं कि टीम को कुछ दे रहे हैं। लीडरशिप का अर्थ यही है कि आप हमेशा टीम के हित को प्राथमिकता दें। नेतृत्व के मायने यह हैं कि टीम सबसे आगे होनी चाहिए। आपको एक लीडर के रूप में यही कोशिश करना चाहिए कि आपकी टीम किसी भी तरह पीछे ना रहे। अनुशासन और नैतिकता किसी भी व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन चरित्र और ईमानदारी के बिना नेतृत्व करना मुश्किल हो जाता है। मैं हमेशा मानता हूं कि ‘माई वे ऑर हाई वे’ वाली सोच किसी लीडर में नहीं होना चाहिए। देखिए, आपकी टीम में हमेशा टैलेंटेड लोग होंगे। कई दफा बतौर लीडर भी आपको उनकी बातें सुननी होंगी, समझनी होंगी और उनकी राह पर चलना होगा। यह ध्यान होना चाहिए कि वो कई दफा आपसे बेहतर हो सकते हैं। लीडर केवल अपनी ही मर्जी नहीं चला सकता, उसे हर तरह से एडजस्ट करने वाला होना चाहिए। महान लीडर वो ही हो सकता है, जो खुद में बदलाव लाने की क्षमता रखता हो। पहला कदम वो ही उठाएगा, पहला फर्क वो ही लाएगा… तभी तो टीम उसके साथ अपनी जान झोंकने को तैयार होगी। सफलता को हैंडल करना सीखना चाहिए – आप खुद को जिस तरह देखते हैं, लीडर आपको उससे अलग तरीके से देखता है। – विफलता को जितना संभालना सीखते हैं, उतना सफलता को संभालना भी सीखना चाहिए। – वर्तमान में रहना शुरू करें और ज्यादा आगे की कभी नहीं सोचें। – कहते हैं कि उम्र के साथ-साथ आपकी सजगता भी धीमी होती चली जाती है। सच कहूं, तो मैंने इसे कभी महसूस नहीं किया है। (तमाम इंटरव्यूज में पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली)








