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अगर आपको लगता है कि एक्सरसाइज करना बोरिंग काम है और कोई खेल बेहतर विकल्प हो सकता है तो आप बिल्कुल गलत तो नहीं हैं। लेकिन सवाल यह है कि कौन-सा खेल? यूके के प्रसिद्ध स्पोर्ट्स मसाज थेरेपिस्ट जेम्स रोश के अनुसार यह ऐसा खेल होना चाहिए, जो फिटनेस चार्ट के सभी पहलुओं पर खरा उतरे। उनका कहना है कि किसी खेल को ऐसा होना चाहिए, जो दिल, फेफड़े, लेग मसल्स, ग्लूट्स और शरीर के ऊपरी हिस्से पर काम कर सके। साथ ही उससे संतुलन व समन्वय, फुर्ती और गति में भी सुधार हो। अगर आपका अनुमान क्रिकेट, फुटबॉल या बास्केटबॉल है, तो यह थोड़ा गलत हो सकता है। जेम्स कहते हैं कि यह टेनिस है। ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट मेडिसिन के रिसचर्स के अनुसार जिन लोगों ने कोई खेल अपनाया, उनमें 60 या उससे अधिक उम्र में भी एरोबिक फिटनेस बेहतर हुई, फिजिकल फंक्शन में सुधार आया और मेंटल हेल्थ मजबूत हुई। निश्चित ही, टेनिस ग्रिप स्ट्रेंग्थ जैसी समग्र ताकत को बढ़ाता है, जो लंबी उम्र का प्रमुख संकेतक है, क्योंकि इसे ओवरऑल मसल हेल्थ का पैमाना माना जाता है। उनका मानना है कि टेनिस जैसा खेल नियमित खेलने से व्यक्ति की जिंदगी में सेहतमंद जीवन का एक दशक जुड़ सकता है। उनका शोध बताता है कि इन सभी शारीरिक लाभों का मतलब है कि टेनिस खिलाड़ी अकसर औसत व्यक्ति की तुलना में अधिक समय तक फिट रहते हैं। हालांकि यह अध्ययन निष्क्रिय लोगों से तुलना करता है, उनसे नहीं, जो कोई दूसरा खेल खेलते हैं। मायो क्लिनिक प्रोसिडिंग्स में प्रकाशित 25 वर्ष चले डेनमार्क के एक अध्ययन के अनुसार टेनिस खिलाड़ी निष्क्रिय लोगों की तुलना में औसतन 9.7 वर्ष अधिक जीवित रहे। इससे लाइफ एक्सपेंटेसी में साइक्लिंग (3.7 वर्ष), जॉगिंग (3.2 वर्ष) और जिमिंग (1.5 वर्ष) की तुलना में अधिक बढ़ोतरी हुई। 80 हजार लोगों पर किए गए एक अलग ब्रिटिश अध्ययन में पाया गया कि रैकेट स्पोर्ट्स खेलने वाले लोगों में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आई। साइकिलिस्ट, रनर्स और फुटबॉलर्स में ऐसा नहीं देखा गया। कुछ अन्य फायदे भी यहां पेश हैं। काॅग्निटिव क्षेत्र में मदद : कोई भी खेल खेलना मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को चुनौती देता है। यह हिस्सा ध्यान और समस्या-समाधान को नियंत्रित करता है। लेकिन टेनिस में अन्य खेलों की तुलना में शॉट्स की फ्रीक्वेंसी अधिक होने से खिलाड़ी को तेज प्रतिक्रिया देनी पड़ती है। यह डिमेंशिया की शुरुआत को धीमा करता है। हड्डियां मजबूत बनती हैं : छलांग, झटकों और इम्पैक्ट से हड्डियां मजबूत होती हैं। टेनिस में ये गतिविधियां भरपूर हैं। हड्डियों की मजबूती के लिए आदर्श एक्सरसाइज वह है, जिसमें दिशा बदलाव, थोड़ा रेसिस्टेंस और जंपिंग शामिल हो। एंग्जायटी घटाता है : रैकेट पर बॉल की आवाज ही मस्तिष्क पर लगभग ध्यान जैसा असर डालती है। चाइना वेस्ट नॉर्मल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों को चार हफ्ते तक टेनिस रैली की लयबद्ध आवाज सुनने के लिए कहा गया, उनके एंग्जायटी स्कोर में उल्लेखनीय कमी आई। घुटनों और लोअर बैक के दबाव में कमी और कलाई मजबूत बनाता है : लोअर बैक को सपोर्ट करने वाली मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए हर हफ्ते खास एक्सरसाइज करना महत्वपूर्ण है। टेनिस भी हाथ-पैरों को ऊपर-नीचे उठाने में प्लैंक जैसी ही मदद करता है। कलाई के साथ ही यह कमर के निचले हिस्से के लिए भी बेहतरीन एक्सरसाइज है। टेनिस में सबसे अच्छा यह है कि इसे खेलने के लिए आपको सिर्फ एक और व्यक्ति चाहिए। दोनों के पास रैकेट और अपनी सोसायटी में थोड़ी-सी जगह होनी चाहिए। लेकिन जेम्स की सलाह है कि टेनिस में कोई भी स्पोर्ट्स शूज इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। वे कहते हैं, ‘टेनिस में ऐसे मूवमेंट होते हैं, जो दौड़ने, चलने या जिम ट्रेनिंग से अलग होते हैं और अच्छे टेनिस शूज खेल में पैदा होने वाले लेटरल (बाएं से दाएं-दाएं से बाएं) दबाव को संभालने के लिए डिजाइन होते हैं।’ फंडा यह है कि अगर आप रेगुलर एक्सरसाइज से बोर हो रहे हैं, तो कोई भी खेल उसका अच्छा विकल्प हो सकता है। और टेनिस जैसा खेल तो जाहिर तौर पर लंबी उम्र देता है। क्यों न शुरुआत के लिए इस खेल को हफ्ते में कम-से-कम एक बार खेलकर देखा जाए?
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