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- N. Raghuraman Column: Science Understanding Leads To Healthy Long Life
8 घंटे पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु
मुंबई की खूबसूरती यही है कि वहां गगनचुम्बी हाई-राइज इमारतों के साथ झोपड़ियां और एक मंजिला ‘चॉल’ भी दिखाई देंगी। इसकी वजह यह है कि हाई-राइज में रहने वाले अमीरों की सेवा करने वाली आबादी अपने काम-काज की जगह के करीब ही रहना चाहती है, चाहे वह जगह कितनी ही तंग क्यों न हो।
हाल ही में मुंबई में पवई लेक के आसपास आई बाढ़ के दौरान मैं कार में बैठा था तो मेरे पास अगल-बगल बसे इन दो विरोधाभासों को देखने के अलावा कोई काम नहीं था। मैंने एक अंतर देखा। लोअर मिडल क्लास और सपोर्टिंग स्टाफ के इन ज्यादातर घरों की खिड़कियों में एयर कंडीशनर लगे थे या बाहरी दीवार पर जाल में बंद स्प्लिट एसी यूनिट लगी थीं।
ऐसे ही एक घर से निकला बाइक सवार मेरी कार विन्डो के बिल्कुल पास आकर खड़ा हो गया, ताकि कार एक इंच भी सरके तो वह ट्रैफिक में घुस सके। मैंने मौका देखकर उसकी तारीफ की कि इतनी छोटी जगह में भी उसने सभी सुविधाएं जुटा रखी हैं। उसने कहा ‘आजकल सबकुछ ईएमआई पर उपलब्ध है।’
उसके जवाब से मुझे 2010 में भास्कर समूह के लिए किए गए हमारे सर्वे की याद आ गई। उस समय सबसे ज्यादा बिकने वाली तीन चीजें स्मार्टफोन, दुपहिया वाहन और एयर कंडीशनर थीं। और जब मैंने 2026 के सेंट्रल बैंक डेटा देखे तो ये तीनों अब भी उसी स्थान पर थीं। चूंकि गाड़ी कई मिनट तक नहीं चली तो मैंने उससे पूछा कि जीवन कैसा चल रहा है।
उसने कहा कि हालांकि उसने घरवालों को सारी सुविधाएं दे रखी हैं, लेकिन बुजुर्ग हो रहे पैरेन्ट्स की बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं उसे चिंतित करती हैं। तभी मुझे याद आया कि मैंने पढ़ा था कि कुछ आदतें, जिन्हें हम महसूस तक नहीं करते, हमारी बायोलॉजिकल एज को बढ़ाती हैं और स्किन को बेहतर रखती हैं।
एक रिसर्च के बाद यूके की पत्रिका ‘साइंस एडवांसेस’ और ‘जर्नल ऑफ एजिंग’ में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट में कहा गया कि सुबह के वक्त पर्याप्त धूप लेना स्किन डैमेज, पसीने बहाने के तरीके और लंबी उम्र पर असरकारक है। इसी तरह लोग यह नहीं समझते कि सिर्फ 100 ग्राम योगर्ट भी गट-हेल्थ के लिए अच्छा होता है, जो स्वस्थ और लंबी उम्र में योगदान देता है। योगर्ट एजिंग स्पीड को 2.2% तक कम करता है। मुझे यह आंकड़ा इसलिए याद रहा क्योंकि मैं दक्षिण भारतीय हूं और हमारा भोजन कर्ड-राइस के बिना पूरा नहीं होता। उस रिपोर्ट ने मुझे खुश कर दिया, क्योंकि कर्ड-राइस हमेशा से मेरी फेवरेट डिश रही है।
लेकिन जिस एक चीज ने मेरा ध्यान खींचा, वह दोस्तों की क्वालिटी को लेकर एक स्पेशल रिपोर्ट थी। उसमें कहा गया कि आम तौर पर दोस्ती बायोलॉजिकल एजिंग पर सकारात्मक असर डालती है। इससे कॉग्निटिव डिक्लाइन का जोखिम कम होने और अवसाद में कमी जैसे कई फायदे मिलते हैं।
अमेरिका के ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग’ ने चेतावनी दी कि सोशल नेटवर्क में ‘झगड़ालू’ लोगों के साथ अधिक समय बिताना तनाव और बायोलाॅजिकल एजिंग से जुड़े बायोमार्कर को बढ़ाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि ‘किसी व्यक्ति के जीवन में ऐसे चुनौतीपूर्ण रिश्ते जितने ज्यादा होंगे, परिणाम उतने ही खराब हो सकते हैं।’
फंडा यह है कि हर लाइफस्टाइल के पीछे एक विज्ञान होता है- बिस्तर से उठने के तरीके से लेकर प्रियजनों के साथ शाम बिताने तक। यदि हम हर गतिविधि के पीछे का विज्ञान समझ लें तो जीवन को स्वस्थ और लंबा बनाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।









