![]()
आंखों की जांच सिर्फ नजर का टेस्ट नहीं है, बल्कि यह आपके पूरे शरीर की सेहत का आईना हो सकती है। विस्तृत आंखों की जांच के दौरान डॉक्टर न सिर्फ आंखों में कोई समस्या, बल्कि दिल की बीमारी, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, थायरॉयड और कुछ मामलों में सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज के शुरुआती संकेत भी पहचान सकते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थेल्मोलॉजी के अनुसार आंखें शरीर की नसों और ब्लड वेसल्स की साफ झलक देती हैं, इसलिए कई बड़ी बीमारियों के संकेत यहीं दिख जाते हैं। आंखों की पूरी जांच करने के लिए डॉक्टर एक विशेष आई ड्रॉप्स से पुतलियों को फैलाकर इसके अंदरूनी हिस्से को ध्यान से देखते हैं। इस दौरान कई गंभीर बीमारियों के संकेत पकड़ सकते हैं। इसलिए समय-समय पर आंखों की जांच करवाना जरूरी है, ताकि बीमारियों का पता शुरुआती चरण में ही लगाया जा सके। नजर के साथ-साथ इन बीमारियों का भी पता चल सकता है – हाई ब्लड प्रेशर- आंख के पीछे की नसें असामान्य, सूजन या खून दिखना हाई बीपी का संकेत हो सकता है। ये ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी, मैकुलर डीजनरेशन का भी जोखिम बताता है। – स्ट्रोक- रेटिना की नसों में कभी-कभी ब्लॉकेज या थक्के बन जाते हैं। इससे धुंधले धब्बे या नजर के सामने पर्दा-सा महसूस होता है। यह स्ट्रोक के खतरे का संकेत हो सकता है। – थायरॉयड- आंखों का बाहर की तरफ उभरना या पलकों का पीछे खिंचना थायरॉयड की समस्या खासकर ग्रेव्स डिजीज का संकेत हो सकता है। – डायबिटीज- रेटिना की नसों से खून या पीले रंग का फ्लूड निकलना डायबिटिक रेटिनोपैथी का संकेत है। डायबिटीज के मरीज हैं तो समय पर जांच से आंखों की रोशनी भी बच सकती है। – ब्रेन ट्यूमर- ट्यूमर से दिमाग में दबाव बढ़ता है, जो आंखों तक पहुंच जाता है। ऑप्टिक नर्व में सूजन, साइड विजन कम होना, डबल दिखना और पुतली में बदलाव इसके संकेत हो सकते हैं। – एसटीडी- आपकी आंखें एसटीडी से जुड़ी बीमारियां, जैसे- सिफिलिस, हर्पीज, क्लैमाइडिया और HIV का भी संकेत देती हैं। आपकी आंखों में भी हो सकता है सनबर्न आंखों को भी धूप से सनबर्न हो सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में फोटोकेराटाइटिस कहा जाता है। जेफरसन आइंस्टीन फिलाडेल्फिया हॉस्पिटल, पेंसिल्वेनिया में ऑप्थल्मोलॉजिस्ट डॉ. विंसेंट के मुताबिक तेज धूप या यूवी लाइट में ज्यादा समय रहने से आंखों में लालपन, दर्द और जलन हो सकती है- जैसे कॉर्निया पर खरोंच आ गई हो। यह समस्या अक्सर 1-2 दिन में ठीक हो जाती है, लेकिन आई ड्रॉप्स, ठंडी सिकाई और आराम जरूरी होता है।
Source link







