3 घंटे पहले
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- कुछ ऑर्गेनाइजेशंस को इस तरह का एक सीईओ मिल जाता है, जो उसकी सभी अपेक्षाओं पर खरा उतरता है। लेकिन कई कंपनियों के लिए बेहतर विकल्प होता है, दो ऐसे लीडर्स जिनके स्किल एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होते हैं। हालांकि, केवल किसी दूसरे सीईओ की नियुक्ति से सफलता की पूरी गारंटी तो नहीं मिल सकती है। साझा नेतृत्व संरचना को सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक होता है। सफल सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी (को-सीईओ) के लिए ये नियम काम के हो सकते हैं…
1) एक सही साझेदार को चुनना जरूरी है को-सीईओ (सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी) आपस में एक तरह से पेशेवर रूप से ‘विवाहित’ होते हैं। जैसे किसी मजबूत व्यक्तिगत रिश्ते में विश्वास, संवाद, साझा दृष्टिकोण बेहद जरूरी होता है, वैसे ही इस प्रोफेशनल साझेदारी में भी यही तत्व आवश्यक होते हैं। जब मतभेद हों (जो निश्चित रूप से कभी-कभी होंगे ही), तो एक-दूसरे की क्षमताओं का सम्मान और आपसी भरोसा ही इस रिश्ते को बनाए रखते हैं। दोनों को यह हमेशा याद रखना चाहिए कि वे एक साझा जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
2) सबसे पहले अपनी अपेक्षाएं तय करें साझा जवाबदेही का मतलब होता है कि दोनों को-सीईओ के लिए ऐसे परफॉर्मेंस स्टैंडर्ड तय किए जाएं, जो उन्हें एक-दूसरे के समकक्ष बने रहने के लिए प्रेरित कर सकें। यह इसलिए आवश्यक है कि ऐसा करने से उन दोनों के बीच एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा भी जन्म ले सकती है, जो आखिरकार कंपनी के लिए भी कई तरह से लाभकारी साबित हो सकती है। इसलिए जरूरी यह भी है कि व्यक्ति चुनने से पहले आपकी अपेक्षाओं को देख-समझ लें। अपेक्षाएं तय करने के बाद ही चुनाव करें।
3) भूमिकाएं और जिम्मेदारियां भी स्पष्ट करें कंपनी को यह स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि किस हिस्से की जिम्मेदारी किस को-सीईओ को दे दी गई है। इसके अलावा निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है, यह भी पहले से पता होना चाहिए। यह इसलिए कि स्पष्ट रूप से परिभाषित भूमिकाओं से संबंधित व्यक्ति तेज गति के साथ अपने निर्णय ले सकता है और उस क्षेत्र में गहराई से विशेषज्ञता भी लेकर आ सकता है। बहुत जरूरी है कि अपनी भूमिकाएं और जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएं। ऐसा करने से सभी को फायदा होगा।
4) अपने अधिकार बांटें, जिम्मेदारियां नहीं हालांकि दोनों सह-कार्यकारी अधिकारी (को-सीईओ) की अपनी-अपनी ड्यूटी भी होती हैं, फिर भी उन्हें एक संयुक्त नेतृत्व इकाई के रूप में काम करना पड़ सकता है। फिर चाहे सफलता हो या असफलता, दोनों को उसका श्रेय या परिणाम साझा करना हो सकता है। जहां तक संभव है एक को-सीईओ को जितनी जल्दी हो सके, यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि उन्हें एक टीम के रूप में कभी भी पुरस्कृत या दंडित किया जा सकता है। अपने अधिकार बांटना चाहें तो बांट लें, लेकिन जिम्मेदारी न बांटें।








