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क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि पार्टनर के साथ कमरे में हैं, लेकिन आप खुद को अकेला महसूस करें? मनोवैज्ञानिक इसे ‘भावनात्मक दूरी’ कहते हैं। हालिया शोध बताते हैं कि अधिकांश रिश्तों के टूटने की मुख्य वजह भावनात्मक जुड़ाव का अभाव है। न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में कपल्स थेरेपिस्ट मेलिसा पॉल कहती हैं, ‘पति-पत्नी या युवा जोड़े साथ हैं, बातें भी होती हैं, लेकिन एक-दूसरे से दिल की बात कहने से पहले झिझक होती है। दुख में सहारा नहीं मिलता और खुशी साझा करने पर सामने से उत्साह नहीं दिखाई देता है। आज के रिश्तों में यह चुप्पी बढ़ती समस्या बन गई है। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. एलेक्जेंड्रा सोलोमन कहती हैं, ‘भावनात्मक दूरी एक पैटर्न है, जो रिश्ते को धीरे-धीरे खोखला कर देता है। जुड़ाव कम हो जाता है। भावनात्मक दूरी को छह बड़े संकेतों से पहचान करें 1.भीड़ में तन्हाई – आप बात करते हैं, पर जवाब नहीं मिलता। 2. डर व झिझक – दुख साझा करने से पहले सोचने लगते हैं कि जवाब पता नहीं क्या होगा। विवाद बढ़ेगा। 3. गंभीर बातों से दूरी – भावना की बातों पर मजाक करने लगना। 4. तर्क से भावना को दबाना – दर्द या दुख बताने पर सहानुभूति नहीं। 5. जिज्ञासा की कमी – हाल जानने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। 6. नजदीकी बढ़ते ही दूरी – रिश्ता गहरा होने पर वे डरकर पीछे हटने लगते हैं। क्यों आती है रिश्तों में ऐसी दूरी, क्या है समाधान मैरिज थेरेपिस्ट तारा गोगोलिस्की के अनुसार, भावनात्मक दूरी अक्सर बचपन के कड़वे अनुभवों या पुराने रिश्तों के धोखे का नतीजा होता है। उनके लिए भावनाएं जाहिर करना ‘खतरनाक’ या ‘असुरक्षित’ महसूस हो सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पार्टनर पर आरोप लगाने के बजाय खुद की बातचीत की शुरुआत करें। जैसे यह कहें- ‘मुझे अच्छा लगता है, जब तुम मेरी बात सुनती या सुनते हो।’ यदि पार्टनर बदलाव के लिए तैयार है, तो कपल्स थेरेपी से इस ‘दिमागी वायरिंग’ को बदला जा सकता है।
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