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- Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Make Yoga A Habit, It Becomes Nature
3 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
अच्छी आदतों के परिणाम वर्तमान में मिलते हैं और बुरी आदतों के नतीजे भविष्य में छुपे रहते हैं। मनुष्य के जीवन में कुछ तो नियम होते हैं और कुछ आदतें होती हैं। अगर आदतें अच्छी हों तो नियम पालना आसान होता है। बुरी आदत वाले को नियम तोड़ने में ही मजा आता है।
भ्रष्ट आचरण न किया जाए, यह एक राजकीय नियम है। लेकिन कितने ही अच्छे लोग सत्ता में बैठ जाएं, लगता है देश से भ्रष्टाचार जा नहीं रहा। एक अधिकारी ने भ्रष्टाचार की व्याख्या करते हुए मुझे बताया था कि चार पशुओं का उदाहरण लेकर नौकरशाहों के भ्रष्टाचार को देखा जा सकता है।
पहला, पैसा अपने आप आता है- जैसे मछली पानी में रहकर पानी पी लेती है, पता नहीं लगता। दूसरी श्रेणी के लोग गाय जैसे होते हैं, मांगकर लेते हैं। तीसरे छीनकर लेते हैं, यानी बंदर की श्रेणी। और चौथे शेर जैसे लूट ही लेते हैं। लेकिन योग को आदत बना लें तो धीरे-धीरे वह अपने आप स्वभाव में बदल जाएगा। नतीजे में अच्छी आदत अपने आप उतरेगी।








