पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  साथ भोजन करने से शांति व प्रेम का माहौल बनता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: साथ भोजन करने से शांति व प्रेम का माहौल बनता है

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जीवन में अशांति आने के अनेक रास्ते हैं, पर शांति के मार्ग सीमित हैं। उनमें से एक है- भोजन। अन्न भी हमें बहुत शांति पहुंचा सकता है। भोजन का संबंध तीन बातों से हैं- बनाना, परोसना, खाना। और यदि ये ठीक हों तो पचाना आसान है। अन्न की ये तीनों प्रक्रियाएं मनुष्य को शांत कर सकती हैं। अब तो मनोवैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि साथ बैठकर जो लोग भोजन करते हैं, उनके परिवारों में शांति और प्रेम का वातावरण बनता ही है। नए प्रयोग इस बात के हो रहे हैं- जिसको वेल बीइंग थ्रू कुकिंग कहते हैं- कि यदि कोई एक-दो सदस्य भोजन बना रहे हों तो दो-चार को और उसमें जुट जाना चाहिए। बनते हुए भोजन को जितने हाथों का साथ मिलेगा, भोजन में उतना ही आनंद आएगा। आज एकल खाने की वृत्ति बढ़ गई है। लेकिन सिंगल डाइनर्स आगे जाकर अपने को अशांत पाएंगे। हमारे यहां सभी धार्मिक अनुष्ठानों में इसीलिए अन्न का बड़ा महत्व बताया है। वैसे आजकल अनुष्ठानों की बनावट बड़ी जटिल है और आयोजनों की सजावट कुटिल है। ऐसे में कम से कम घर में तो अन्न देवता का मान करें।



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