पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आत्मा का ज्ञान जीवन में उतार लें तो आत्महत्याएं कम होंगी
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा का ज्ञान जीवन में उतार लें तो आत्महत्याएं कम होंगी

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  • Pt. Vijayshankar Mehta’s Column: If We Internalize The Knowledge Of The Soul, Suicides Will Decline.

5 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

वैसे तो स्त्री और पुरुष में दसों इंद्रियां एक जैसी होती हैं, आकार और प्रकार का भेद होता है बस। पर एक विचार इन दोनों में समान है और वो है- आत्मघात का। विपरीत परिस्थितियों में दोनों ही मरने की सोचते हैं। इसको ‘जेंडर पैराडॉक्स’ कहते हैं।

लेकिन आंकड़े ये बताते हैं कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुष अधिक आत्महत्या करते हैं। एक तथ्य यह भी है कि प्रयास महिलाएं अधिक करती हैं और परिणाम में पुरुष अधिक सफल होते हैं।

लेकिन ये तय है कि आत्महत्या ऐसा विचार और कृत्य है, जो मनुष्य को कभी नहीं अपनाना चाहिए। हमारे देश में जहां अनेक महात्माओं ने आत्मा के प्रति इतने सुंदर विचार दिए हों, वहां हर घंटे 18 लोग आत्महत्या करते हैं और उनमें युवा अधिक हैं। जब परीक्षाओं के परिणाम आएं तो माता-पिता बच्चों पर अत्यधिक ध्यान दें।

अगर लोग आत्मा का ज्ञान ठीक से जीवन में उतार लें तो आत्महत्याएं कम होंगी, क्योंकि मन देह को उकसाता है कि इसे समाप्त करो और आत्मा कहती है इसका सम्मान करो, इसे बचाए रखो।

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