बचपन वाले शौक फिर अपना रहे जेन-जी:  तनाव से बचने के लिए युवा डायरी लिख रहे, कलरफुल कपड़े भी पसंद कर रहे
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बचपन वाले शौक फिर अपना रहे जेन-जी: तनाव से बचने के लिए युवा डायरी लिख रहे, कलरफुल कपड़े भी पसंद कर रहे

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अमेरिका के लॉस एंजिलिस में रहने वाली पॉडकास्टर लिज प्लैंक पिछले कुछ महीनों से परेशान थीं। करीबी दोस्त से रिश्ता टूट गया था, हर दिन फोन खोलते ही तनाव भरी खबरें दिखती और धीरे-धीरे मूड लगातार खराब रहने लगा। फिर उन्होंने कुछ छोटे बदलाव किए। रात में उन्होंने अपने लिए ‘क्यूट पायजामा’ पहनना शुरू किया। सुबह खास मग में कॉफी पीने लगीं। रंगीन स्प्रिंकल्स डालकर कॉफी सजाने लगीं। उन्हें कभी कहानियां लिखना पसंद था… इसे दोबारा शुरू किया, बिना दिमाग पर जोर डाले वे रोज 20 मिनट कुछ लिखने लगीं… धीरे-धीरे उन्होंने अपने दिन में ऐसी ही छोटी-छोटी ऐसी चीजें जोड़नी शुरू कीं, जो सिर्फ उन्हें खुशी देती थीं। अब यही ‘छोटी खुशियों’ वाला तरीका नया ट्रेंड बन रहा है। इसे ‘व्हिम्सी’ कहा जा रहा है। बिना खुद पर दबाव डाले, ऐसे अपनाएं ‘व्हिम्सी’ ट्रेंड व्हिम्सी शब्द का इस्तेमाल अब खास तरह की जीवनशैली के लिए होने लगा है। इसमें हल्कापन, खेल जैसा मजा, अचानक छोटी खुशियां और खुद के लिए समय निकालना शामिल है। स्क्रीन से थोड़ी दूरी बनाएं- इस ट्रेंड में लोग मोबाइल से हटकर छोटे ऑफलाइन शौक अपना रहे हैं। जैसे, डायरी लिखना, मिट्टी के बर्तन बनानाकढ़ाई करना, फोटोग्राफी करना, इत्यादि। इनको जीवनशैली में जोड़ें। रोजमर्रा की चीजों को खास बनाएं – कभी घर लौटते समय लंबा रास्ता चुन लीजिए, कमरे को छोटी-छोटी चीजों से सजाएं या सुबह के रूटीन में कोई नई हॉबी भी जोड़ सकते हैं, यानी साधारण दिन को थोड़ा खास महसूस कराना। घर की सजावट को कलरफुल बनाएं – इसमें लोग मैचिंग और महंगी सजावट से ज्यादा ऐसी चीजें रख रहे हैं जिनसे यादें जुड़ी हों। जैसे, पुराने टिकट, पोस्टकार्ड, छोटी मूर्तियां, हाथ से बनाई चीजें या ट्रैवल से लाई छोटी यादगार वस्तुएं। कमरा सिर्फ शोपीस नहीं, मूड बेहतर करने वाली जगह बन रहा है। हार्वर्ड के मनोचिकित्सक डॉ. नासिर घैमी के मुताबिक सोशल मीडिया पर दिखने वाली कई चीजें बनावटी होती हैं। ऐसे में लोग सरल अनुभवों की तरफ लौट रहे हैं।



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