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मेडिकल साइंस कहता है कि 65 साल के बाद बुजुर्गों को सिर्फ दवाइयों की नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारा, सामाजिक जुड़ाव और तकनीकी सुरक्षा की उतनी ही जरूरत होती है, जितनी हमें होती है। आज 1 जून को ‘वैश्विक अभिभावक दिवस’ है। इस बार की थीम है-टुगेदर फॉर पैरेंट्स। यानी माता-पिता की देखभाल सिर्फ एक बेटे या बेटी की नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। इस अवसर पर आप एक संकल्प लीजिए कि बुजुर्ग माता-पिता को सिर्फ तोहफे नहीं; समय व सम्मान देंगे। आप नौकरी या बिजनेस के कारण बहुत व्यस्त रहते हैं, फिर भी यदि साथ रहते हैं तो 24 घंटे में कम से कम 24 मिनट उनके साथ बैठिए। मेडिकल रिसर्च के आधार पर आप 5 ऐसे ही व्यावहारिक तरीके जानिए, जो बुढ़ापे को सुखमय और परिवार को खुशहाल बनाएंगे। 1. घर को उनका ‘हॉबी हब’ बनाइए रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ी समस्या अकेलापन होती है। ऐसे में कोई शौक बुजुर्गों के लिए मानसिक सहारा बन सकता है। क्या करें?- उन्हें बागवानी, संगीत, लेखन या धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों से जोड़ें घर में छोटा किचन गार्डन बनवाएं। वरिष्ठ नागरिक क्लब या मॉर्निंग ग्रुप से जोड़ें। फायदा- डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दवाएं समय पर न लेना बुजुर्गों में अस्पताल भर्ती होने की बड़ी वजहों में शामिल है। 2. उनकी राय सुनिए, यही सबसे बड़ी दवा है। बुजुर्गों को ज्यादा दुख तब होता है, जब उन्हें लगता है कि अब उनकी जरूरत नहीं रही, इसलिए उन्हें हर हाल में सम्मान दें। क्या करें? – घर के फैसलों में उनकी राय जरूर लें। आर्थिक सुरक्षा प्रदान करें बिना मांगे ही उनकी सभी जरूरतें पूरी करें। फायदा- यूरोपियन साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित शोध कहता है कि निर्णय की आजादी से बुजुर्गों में अवसाद घटता है। 3. नाती-पोते उनकी अच्छी थेरेपी हैं संयुक्त परिवार भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकत रहा। अब विज्ञान भी इसे सही मान रहा है। क्या करें?- दादा-दादी के साथ कहानी सुनना, खेलना, खाना खाना बच्चों की आदत बनाएं। फायदा- खुशी और मानसिक संतुलन बढ़ता है। 4. हेल्थ डायरी बनाएं, दवाओं की समीक्षा करें बुजुर्ग अक्सर दवा का समय भूल जाते हैं। इससे बीमारी गंभीर हो सकती है। बुजुर्ग माता-पिता की हेल्थ डायरी बनाएं। क्या करें? – डायरी में दवा, डॉक्टर, जांच व अपॉइंटमेंट की जानकारी लिखें, मोबाइल में दवा का अलार्म लगाएं हर माह दवाओं की समीक्षा, हर 6 माह में फुल बॉडी चेकअप कराएं।
फायदा- डब्ल्यूएचओ के मुताबिक पसंदीदा गतिविधियां तनाव घटातीं व प्रकृति के बीच समय बिताने से हैप्पी हार्मोन बढ़ते हैं 5. अकेला मत छोड़िए, साथ ऑक्सीजन जैसा है सामाजिक जुड़ाव बुजुर्गों के लिए ऑक्सीजन जैसा है। बुजुर्गों के लिए सिर्फ परिवार नहीं, समाज से जुड़ाव भी बहुत जरूरी है। क्या करें? – पड़ोसियों और रिश्तेदारों से मिलने के लिए प्रेरित करें वरिष्ठ समूहों से जोड़ें दूर रहते हैं तो वीडियो कॉल करें।
फायदा- अमेरिका की हेल्थ एंड रिटायरमेंट स्टडी में पाया कि सामाजिक रूप से सक्रिय बुजुर्गों की याददाश्त अच्छी रहती है।
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