रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:  जब राज कपूर के लिए तोड़ा गया था प्रोटोकॉल
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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: जब राज कपूर के लिए तोड़ा गया था प्रोटोकॉल

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रूमी जाफरी2 घंटे पहले

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राज कपूर अपनी आइकॉनिक फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ के एक दृश्य में। - Dainik Bhaskar

राज कपूर अपनी आइकॉनिक फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ के एक दृश्य में।

मेरे हिस्से के किस्से में आज बात राज कपूर साहब की। 2 जून 1988 को हिंदुस्तान फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े शोमैन राज कपूर हमें छोड़कर चले गए थे। उनका निधन दिल्ली के एम्स में हुआ था।

राज कपूर साहब फिल्मों के लिए मिलने वाले देश के सर्वोच्च सम्मान ‘दादा साहब फाल्के अवार्ड’ लेने दिल्ली गए थे। मगर अचानक वहीं पर उनकी तबीयत बहुत खराब हो गई। जब वो राष्ट्रपति भवन पहुंचे, तभी उन्हें ऐसा जबरदस्त अटैक आया कि वो मंच पर भी जाने की स्थिति में नहीं थे। तो उस समय राष्ट्रपति माननीय वेंकट रमन को मंच से उतरकर नीचे आना पड़ा और राज कपूर को अवार्ड देना पड़ा। हालांकि यह राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल के खिलाफ था, मगर ये माननीय वेंकटरमन का बड़प्पन था और राज कपूर के सम्मान का प्रतीक भी।

अवार्ड के बाद उन्हें फौरन एम्स में शिफ्ट कर दिया गया। मुझे तब रणधीर कपूर जी ने बताया था कि राज साहब को आईसीयू में दाखिल किया गया है। बकौल रणधीर कपूर, थोड़ी देर में हमने देखा कि एम्स में जल्दी-जल्दी सफाई हो रही है। कॉरिडोर में गमले लगाए जा रहे हैं। रेड कारपेट बिछाया जा रहा है। थोड़ी ही देर में प्रधानमंत्री राजीव गांधी वहां आ गए। उन्होंने हमारे परिवार से मुलाकात की, हाल-चाल पूछकर और सबको इंस्ट्रक्शंस देकर वहां से चले गए। फिर हमें एम्स में ही दो बड़े स्यूट दे दिए गए। वहां हमारा परिवार और जो भी मिलने वाले आते थे, बैठते थे, आराम करते थे। 2 जून को राज कपूर साहब का निधन हो गया और अपनी चलती कैबिनेट की मीटिंग को स्थगित करके राजीव गांधी फिर अस्पताल आए और बोले कि मैं चाहता हूं कि राज साहब का अंतिम संस्कार दिल्ली में पूरे राजकीय सम्मान के साथ होना चाहिए। हमने मना कर दिया और कहा कि हम मुंबई में ही करेंगे। इस पर राजीव जी बोले कि ठीक है, पर राज कपूर जी का पार्थिव शरीर एक दिन के लिए जनता के दर्शन के लिए दिल्ली में भी रखा जाना चाहिए। इस पर भी हमने आपस में सलाह-मशविरा किया और कहा कि हमें बम्बई पहुंचना चाहिए, जहां फिल्म इंडस्ट्री के हमारे दोस्त और रिश्तेदार इंतजार कर रहे हैं। इस पर राजीव गांधी ने कहा कि ठीक है। आपके लिए एक स्पेशल चार्टर्ड प्लेन एयरपोर्ट पर रहेगा और उन्होंने अपने पीए को इंस्ट्रक्शन दिए कि इनसे नंबर ले लीजिए। उन्होंने कहा कि जब भी जाना हो, इनको (पीए) बता दीजिएगा। ये थी राज कपूर जी की इज्जत। साथ ही इससे राजीव गांधी जी का बड़प्पन और राजकपूर जी के लिए उनके मन में सम्मान भी झलकता है। इसी बात पर मुझे मीर अनीस का एक शेर याद आ रहा है :

रुत्बा जिसे दुनिया में खुदा देता है वो दिल में फरौतनी को जा देता है

रणधीर कपूर जी ने आगे बताया, सबने यह फैसला किया कि हमें उजाला होने से पहले ही निकल जाना चाहिए, क्योंकि सुबह अगर 7-8 बज गए तो फिर एयरपोर्ट और हॉस्पिटल में बहुत सारी पब्लिक आ जाएगी। तो फिर तय हुआ कि हम सुबह 5 बजे निकल जाते हैं। फिर हमने प्रधानमंत्री के पीए को फोन कर कहा कि हम सुबह 5 बजे बॉडी लेकर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। उस समय प्लेन तैयार रहना चाहिए। हम लोग जैसे ही हॉस्पिटल से एम्बुलेंस और कारों से एयरपोर्ट की उस जगह पहुंचे, जहां से प्राइवेट प्लेन उड़ते हैं, तो हमने देखा कि राजीव गांधी पहले से ही अपनी कैबिनेट के सदस्यों के साथ खड़े हैं। उन्हें उस समय वहां देखकर हम सब चौंक गए।

राजीव गांधी ने हमसे कहा कि राज कपूर साहब को मैं कंधा देकर विदा न करूं, ऐसा हो नहीं सकता। उसके बाद उन्होंने कंधा दिया और राज साहब की पार्थिव देह चार्टर्ड प्लेन में चढ़ाई गई। राजीव गांधी के साथ तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री एचकेएल भगत भी वहीं खड़े थे। राजीव गांधी ने उनसे पूछा कि भगत साहब, आप बॉडी के साथ नहीं जा रहे? तो भगत साहब बोले कि ये मेरे प्रोग्राम में नहीं है। इस पर राजीव जी बोले कि आप जानते हैं कि राज कपूर की डेथ हुई है। यह देश की क्षति है। आप आईबी मिनिस्टर हैं और आप प्रोग्राम की बात कर रहे हैं। आप अभी जाइए। और वे बेचारे बिना लगेज, बिना अपने स्टॉफ के फौरन प्लेन में बैठ गए और कपूर साहब की पार्थिव देह के साथ मुंबई आए। पार्थिव देह को पहले बंगले में ले जाया गया, फिर आर के स्टूडियो में रखा गया और चेम्बूर में उनका अंतिम संस्कार हुआ।

राज कपूर साहब से जुड़ा दूसरा किस्सा मुझे खुद अच्छे से इसलिए याद है, क्योंकि मैं स्वयं उसका साक्षी रहा। 14 दिसंबर को राज साहब का जन्मदिन होता है। उस दिन 2001 में भारत सरकार ने राज कपूर के ऊपर डाक टिकट जारी किया। मुंबई में जुहू सेंटौर होटल में उसका फंक्शन हुआ। प्रमोद महाजन द्वारा उसे जारी किया गया। प्रमोद महाजन ने अपने भाषण में कहा, सुना है कि हिंदुस्तान में बहुत सारी रॉयल फैमिली हैं, लेकिन मैं सिर्फ दो फैमिलीज को रॉयल फैमिली मानता हूं- राजनीति में नेहरू गांधी फैमिली और फिल्म इंडस्ट्री में पृथ्वीराज कपूर-राज कपूर फैमिली।

आज राज साहब की याद में उनकी फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ का ये गाना सुनिए, अपना खयाल रखिए और खुश रहिए।

जीना यहां मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां…



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