रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:  जब गोविंदा ने मां के लिए लिखी थी कविता
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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: जब गोविंदा ने मां के लिए लिखी थी कविता

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रूमी जाफरी4 घंटे पहले

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गोविंदा अपनी मां निर्मला देवी के साथ। - Dainik Bhaskar

गोविंदा अपनी मां निर्मला देवी के साथ।

आज मेरे अजीज दोस्त, मेरी ज्यादातर हिट फिल्मों के हीरो और मेरे फेवरेट एक्टर यानी हीरो नंबर 1 गोविंदा जी की सालगिरह है। तो मैंने सोचा कि गोविंदा, जिन्हें आप सब एक हीरो और स्टार की हैसियत से जानते हैं, उनके बारे में एक ऐसी बात बताऊं, जो बहुत कम लोगों को मालूम है और वह है अपनी मां निर्मला देवी के लिए उनका गहरा प्रेम। वैसे तो हर औलाद अपनी मां से प्रेम करती है, उनकी इज्जत करती है, मगर जो सम्मान और जो विश्वास गोविंदा को अपनी मां पर था, वैसा मैंने अपनी जिंदगी में किसी और के लिए नहीं देखा। वह मां को सिर्फ प्यार ही नहीं करते थे, बल्कि पूजते थे। बात जून 1996 की है। हम फिल्म ‘हीरो नंबर 1’ की शूटिंग के लिए यूरोप गए थे। स्विट्जरलैंड में शूटिंग चल रही थी। हम बस से ही ट्रैवल करते थे। 7 जून की बात है। गोविंदा मेरे पास आए और बोले, ‘भाई, आज मम्मी का जन्मदिन है और जब से मैं पैदा हुआ हूं, पहली बार ऐसा हुआ है कि उनके जन्मदिन पर उनके साथ नहीं हूं।’ मैंने कहा, ‘चीची भैया, आप मम्मी से इतना प्रेम करते हैं, उनके जन्मदिन पर कभी उनसे दूर नहीं रहे, तो आपको यह डेट नहीं देनी चाहिए थी। उनके पास पहुंच जाते या जाकर वापस आ जाते।’ इस पर उन्होंने कहा, ‘रूमी भाई, मम्मी ने ही मुझसे कहा था कि तू जा, इस जन्मदिन पर शूटिंग कर। मम्मी ने कहा, तभी मैंने ये शूटिंग रखी है।’

मैंने कहा कि बताओ अब क्या करना है। तो उन्होंने कहा, ‘मैंने सोचा है कि मम्मी के लिए एक अच्छी सी कविता लिखें और उन्हें भेजें, वह खुश हो जाएंगी।’ मैंने कहा, ‘ठीक है।’ फिर बोले, ‘आप लिख दो।’ मैंने कहा, ‘मैं लिखूंगा तो वह दिल से कम, दिमाग से ज्यादा होगी। आप लिखोगे तो आपके जज्बात मम्मी के लिए ज्यादा होंगे।’ तो बोले, ‘हम दोनों मिलकर लिखते हैं।’ कुछ पंक्तियां उन्होंने बोलीं, कुछ मैंने लिखीं, और मिलकर हमने उन्हें कविता का रूप दिया। एक जज्बाती कविता तैयार हुई। फिर उन्होंने कहा, ‘किसे सुनाकर रिएक्शन लें?’ मैंने कहा, ‘कादर भाई से बेहतर कौन हैं।’

गोविंदा ने कादर जी को कविता सुनानी शुरू की। सुनाते-सुनाते उनकी आवाज भर्राने लगी, गला रुंध गया, आंखों में पानी आ गया। कविता खत्म होते-होते गोविंदा मम्मी को याद करके इतनी जोर जोर से रोने लगे कि हमें बस रुकवानी पड़ी। वहीं पास के एक रेस्टॉरेंट में हम उन्हें ले गए, मुंह धुलवाया, कॉफी पिलवाई। उस दौर में मोबाइल नहीं होते थे तो पब्लिक टेलीफोन से उन्होंने मम्मी से बात की, जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं, आशीर्वाद लिया और फिर हम पेरिस पहुंचे। पेरिस में शूटिंग शेड्यूल खत्म हो गया था। तय हुआ कि कुछ दिन वहीं छुट्टी मनाएंगे। पहला दिन था। सब आराम कर रहे थे। मैं दोस्तों के साथ घूमने गया। जब कमरे में लौटा तो डेविड साहब का फोन आया, ‘जल्दी से लॉबी में आओ।’ मैं लॉबी पहुंचा। लिफ्ट से निकलते ही देखा कि सोफे पर गोविंदा जी बैठे रो रहे हैं, सुनीता जी उनके साथ बैठी हैं। मुझे कुछ समझ नहीं आया। वहां उनके मैनेजर शशि सिन्हा और वाशु भागनानी जी भी थे। उन्होंने बताया कि मुंबई से फोन आया है, गोविंदा जी की मम्मी की तबीयत बहुत खराब है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द कोई फ्लाइट मिले। मैं गोविंदा जी के पास गया। बहुत रो रहे थे। मैंने उनका हाथ पकड़ा और कहा, ‘चीची भैया, मत रोइए।’ वो बोले, ‘रूमी भाई, मम्मी नहीं रहीं।’ मैंने कहा, ‘शुभ-शुभ बोलिए। तबीयत खराब है, इलाज चल रहा है। ऊपरवाले ने चाहा तो जल्दी ही ठीक हो जाएंगी।’ उन्होंने कहा, ‘नहीं, सब मुझसे झूठ बोल रहे हैं। मम्मी मुझसे कभी झूठ नहीं बोलती थीं। उनकी बात कभी गलत नहीं निकली।’

मैंने कहा, ‘मैं कुछ समझा नहीं।’ तो बोले, ‘पिछले साल जून में मम्मी ने कहा था, ‘चीची, एक साल और हूं मैं तेरे साथ। उसके बाद नहीं हूं।’ और देखो, जून चल रहा है। मम्मी की बात कभी गलत नहीं निकली। मम्मी नहीं रहीं।’ इतने में डेविड साहब के असिस्टेंट आए और बोले, ‘रिसेप्शन पर आपके लिए मुंबई से फोन है।’

मैं रिसेप्शन पर गया। फोन उठाया। उधर से आवाज आई, ‘मैं एन आर पच्छीसिया… बबलू भाई।’ उन्होंने कहा, ‘गोविंदा आसपास तो नहीं है?’ मैंने कहा, ‘हैं, लेकिन दूर बैठे हैं।’ तो बोले, ‘उन्हें अभी बताना नहीं। मम्मी गुजर चुकी हैं।’ मैं एकदम शॉक्ड रह गया, बिल्कुल स्पीचलेस। मैंने मुड़कर गोविंदा को देखा। वो लगातार रो रहे थे। मैं सोचने लगा, यह मां बेटे का कितना अद्भुत रिश्ता है। ऐसा चमत्कारी रिश्ता मैंने कभी नहीं देखा। इसी बात पर मुझे मुनव्वर राना का एक शेर याद आया:

वह कबूतर क्या उड़ा, छप्पर अकेला हो गया,

मां की आंखें मूंदते ही, घर अकेला हो गया।

आज गोविंदा जी को उनकी सालगिरह की बहुत बहुत मुबारकबाद। ईश्वर करें, वह खुश रहें, कामयाब रहें। इन्हीं दुआओं के साथ, उनकी फिल्म ‘हीरो नंबर 1’ का यह गाना सुनिए, अपना खयाल रखिए और खुश रहिए:

यूपी वाला ठुमका लगाऊं,

कि हीरो जैसे नाच के दिखाऊं।

}rumyjafrywrites@gmail.com



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