रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:  सलमान ने सावन कुमार की थी ऐसी मदद
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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: सलमान ने सावन कुमार की थी ऐसी मदद

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रूमी जाफरी2 घंटे पहले

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‘जीने के हैं चार दिन’ गाने में सलमान खान। - Dainik Bhaskar

‘जीने के हैं चार दिन’ गाने में सलमान खान।

कल सलमान खान की सालगिरह थी। तो उनके साथ पिछले तीस सालों का सफर याद आने लगा। बहुत-सी बातें, बहुत से किस्से मन में उमड़ने लगे तो सोचा कि कुछ आपसे भी साझा करूं। एक बार मैं और सलमान घर पर बैठे थे। मैं उठकर जाने लगा तो सलमान ने कहा, ‘रूमी भाई, रुको।’ उन्होंने एक हीरो का नाम लिया (जिसका नाम लिखना मैं उचित नहीं समझता) और कहा कि वह आने वाला है। मैंने कहा, ‘ठीक है, फिर आप उसके साथ बैठो, मैं जाता हूं।’ वह बोला, ‘नहीं नहीं, आप बैठो। मुझे नहीं पता वह किस बात के लिए आ रहा है। आप भी सुनो कि किस काम से आ रहा है।’ खैर, मैं रुक गया।

थोड़ी देर में वह हीरो आया। आकर मिला, बैठा और सलमान से बोला, ‘ब्रदर, मुझे तुमसे एक एडवाइस चाहिए। मैं बहुत टेंशन में हूं।’ सलमान ने कहा, ‘बोलो, क्या टेंशन है?’ वह बोला, ‘मेरी पिछली दो चार फिल्में नहीं चलीं। मैं डर गया हूं, इसलिए पिछले आठ महीने से मैंने कोई फिल्म साइन नहीं की।’

सलमान ने पूछा, ‘मुझसे क्या चाहते हो?’ वह बोला, ‘बस इतना बता दो कि तुम फिल्में कैसे चुनते हों, ताकि मैं भी साइन करते वक्त उस बात का ध्यान रखूं।’ सलमान बोले, ‘देखो, एक फिल्म साइन करते वक्त कभी दिल बोलता है कि अरे कर लो यार, इतना पुराना दोस्त है, इतना अच्छा आदमी है, कर लो यार। आप फिल्म कर लेते हो और वह फ्लॉप हो जाती है। फिर एक फिल्म के लिए दिमाग बोलता है कि प्रोड्यूसर की पिछली दो तीन फिल्में ब्लॉकबस्टर हैं, डायरेक्टर बहुत बड़ा है, म्यूजिक कमाल का होगा, मेकिंग जबरदस्त होगी, कैमरामैन बड़ा है, हीरोइन बड़ी है, सब चीजें अच्छी हैं, यह फिल्म तो साइन करनी ही चाहिए। आप फिल्म साइन करते हो और वह भी फ्लॉप हो जाती है। इसलिए ज्यादा सोचना नहीं चाहिए, ज्यादा दिमाग नहीं लगाना चाहिए। जो दिल बोले, जो काम आए, वही करते रहना चाहिए।’

वह हीरो खामोशी से सलमान को देखता रहा। फिर सलमान उठकर बाथरूम चले गए। वह हीरो मेरे पास आया और बोला, ‘यह मुझे गाइडेंस दे रहे थे या मेरी खिंचाई कर रहे थे?’ मैंने कहा, ‘नहीं, वह बिल्कुल सही बात कर रहे थे, क्योंकि सलमान ऐसे ही फिल्म करते हैं।’ इसकी मैं आपको एक और मिसाल देता हूं। एक बार मैं, सलमान और उनके एक दोस्त गार्डन में बैठे थे। तभी सलमान की फर्स्ट फ्लोर वाली बालकनी से सावन कुमार जी नजर आए। उन्होंने सलमान को देखा और हाथ हिलाया। सलमान ने उन्हें अपने पास बुला लिया। मैंने सलमान से पूछा, ‘ये क्यों आए हैं?’ वह बोले, ‘ये एक नए लड़के को लेकर फिल्म बना रहे हैं। कह रहे हैं कि तुम इसमें पांच-छह दिन का काम कर लो तो फिल्म बिक जाएगी, वरना ऑफिस बिक जाएगा।’ साथ बैठे दोस्त ने मना करते हुए कहा, ‘भाई, किसी भी तरह इस फिल्म को टाल देना। यह आपके लिए सही नहीं रहेगी।’ यह कहकर वह दोस्त चला गया।

सावन जी आ गए। सलमान और मैं खड़े हो गए। सलमान उनके गले मिले और बोले, ‘सावन जी, मुझसे छोटा सा रोल करवा लोगे तो आपकी फिल्म तो बिक जाएगी। लेकिन आप एक काम और कर सकते हैं। एक गाना भी मुझसे करवा लीजिए तो आपका म्यूजिक और अच्छे दाम में बिक जाएगा।’ मैं और सावन जी सलमान को देखते रह गए। सलमान एहसान भी ऐसे करते कि किसी को एहसास तक नहीं होता कि उन्होंने किसी पर एहसान किया है।

इसी बात पर मुझे कैसर-उल-जाफरी का एक शेर याद आ रहा है : जो डूबना है तो इतने सुकून से डूबो कि आस-पास की लहरों को भी पता न लगे

मैंने सलमान खान के साथ बारह फिल्में की हैं। मेरी पहली फिल्म बतौर डायरेक्टर भी सलमान के साथ ही थी। मेरा उनसे और उनके परिवार से रिश्ता काम से ज्यादा पारिवारिक रहा है। मैं सलमान को बहुत करीब से जानता हूं। इतना बड़ा सुपरस्टार होने के बाद भी सलमान ने कभी अपनी पर्सनल लाइफ में, घर में या बाहर यह एहसास नहीं होने दिया कि वो इतने बड़े सुपरस्टार हैं। सच कहूं तो सलमान का पूरा फिल्मी सफर आपके सामने है। उन्होंने कभी फायदा-नुकसान, छोटा-बड़ा देखकर फिल्म नहीं की। हमेशा दिल की सुनी। शायद इसी वजह से आज वो पूरी फिल्मी दुनिया के दिलों पर राज कर रहे हैं। कल सलमान साठ साल के हो गए, लेकिन आज भी वे इतने फिट हैं, इतना जवान दिखते हैं कि अच्छे-अच्छे यंग हीरो उनके सामने फीके लगते हैं। इसी बात पर आप मेरी और सलमान की फिल्म ‘मुझसे शादी करोगी’ का यह गाना सुनिए, अपना खयाल रखिए और खुश रहिए : जीने के हैं चार दिन, बाकी हैं बेकार दिन…



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