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मेरे हिस्से के किस्से में आज तक पाठकों को हिंदुस्तानी फिल्म इंडस्ट्री के कई एक्टर्स, डायरेक्टर्स, राइटर्स, म्यूजिक डायरेक्टर्स वगैरह के बारे में ही पढ़ने को मिला होगा। मगर आज मैं जिनके विषय में लिखने जा रहा हूं, वे एक नहीं बल्कि तीन लोग हैं। और चौथा एक इंटरनेशनल स्टार है। इन तीन लोगों की अपनी एक कंपनी है, जिसका नाम है विजक्राफ्ट। इन तीन लोगों के नाम हैं आन्द्रे टिमनिस, विराफ सरकारी और साबास जोसेफ। तीनों अलग-अलग प्रोफेशन में थे। आन्द्रे डी.जे. थे, विराफ होटल मैनेजमेंट में थे और साबास जर्नलिस्ट थे। आन्द्रे और विराफ ने एक नाइट क्लब शुरू किया था। साबास उनका इंटरव्यू लेने आए थे। बस, वहीं से तीनों की दोस्ती हो गई। फिर 1988 में तीनों ने मिलकर विजक्राफ्ट शुरू की।
तीनों में एक जज्बा था कि कुछ अच्छा, कुछ नया, कुछ बड़ा किया जाए, जो हिंदुस्तान में आज तक किसी ने न किया हो। आप सोच रहे होंगे कैसे? और यह भी सोच रहे होंगे कि अचानक मुझे इनके बारे में लिखने का ख्याल क्यों आया? दरअसल, आजकल एक अंग्रेजी फिल्म लगी है, जिसका नाम है ‘माइकल’। यह माइकल जैक्सन के जीवन पर आधारित है। तब मुझे याद आया कि हिंदुस्तान में पहला सबसे बड़ा कॉन्सर्ट, वह भी दुनिया के सबसे बड़े स्टार का शो, जिन्होंने करवाया था, उसका श्रेय इन्हीं तीनों को जाता है। वह 1996 में हुआ था। इस तरह उस ऐतिहासिक शो को भी करीब 30 साल हो रहे हैं। इस पूरे इवेंट की कहानी बड़ी दिलचस्प और रोचक है, जो मुझे आन्द्रे ने सुनाई थी। वही मैं आप लोगों को बता रहा हूं। हुआ यूं कि लॉस एंजिलिस में मार्शल नाम के एक इवेंट मैनेजर थे, जो बड़े-बड़े शो करवाते थे। किसी शो को लेकर आन्द्रे, विराफ और साबास की उनसे बातचीत चल रही थी। एक दिन मार्शल ने उनसे पूछा, ‘तुम लोग इंडिया में माइकल जैक्सन का शो क्यों नहीं करवाते?’ बकौल आन्द्रे, हमने पूछा, ‘क्या वो आएंगे?’ मार्शल ने कहा, ‘हां, वो इंडिया आना चाहते हैं। उन्होंने कहीं कुंभ मेले की तस्वीरें देख ली हैं। वे उसे देखना चाहते हैं, मदर टेरेसा से मिलना चाहते हैं और इंडिया की बहुत सारी चीजें देखना चाहते हैं।’
आन्द्रे ने मुझसे कहा, मगर फिर भी हमने इस बात में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ली, क्योंकि यह हमारी ताकत और हैसियत से बाहर की बात थी। एक दिन हमें फैक्स आया कि माइकल जैक्सन इंडिया में आपके साथ शो करना चाहते हैं, आप आकर मिलिए। हमें लगा कोई मजाक कर रहा है, इसलिए हमने जवाब नहीं दिया। कुछ दिनों बाद दोबारा फैक्स आया। तब लगा कि शायद बात सच हो। हमने संपर्क किया तो पता चला कि यह सही था। दरअसल, मार्शल माइकल जैक्सन का काम भी देखते थे। उन्होंने माइकल से बात करके हमारे बारे में बताया था। मीटिंग की तारीख तय हो गई। आन्द्रे और विराफ फ्लाइट पकड़कर लॉस एंजिलिस पहुंच गए। मार्शल ने उन्हें लॉस एंजिलिस के मशहूर होटल एल.ए. हिल्टन में ठहराया। बकौल आन्द्रे, हम लोग बेहद एक्साइटेड थे, क्योंकि हमेशा सुनते आए थे कि सारे बड़े स्टार इसी होटल में ठहरते हैं और आज हम भी वहीं रुके हैं। अगले दिन माइकल जैक्सन की तरफ से एक लिमोजीन आई। पहली बार हम लिमोजीन में बैठे। लेकिन सबसे बड़ा एक्साइटमेंट यह था कि हम माइकल जैक्सन से मिलने जा रहे थे। फिर हम माइकल के घर पहुंचे और हमें एक कमरे में बैठा दिया गया। जब माइकल कमरे में आए, तो यकीन मानिए ऐसा लगा जैसे सांसें रुक गई हों। हम बस उन्हें देखते ही रह गए। मुंह से एक लफ्ज तक नहीं निकला। वो शेर है ना : तुम मुखातिब भी हो, करीब भी हो,
तुम्हें देखें या तुमसे बात करें। हम इंडिया से माइकल जैक्सन के लिए बहुत सारे गिफ्ट ले गए थे – गणपति की मूर्ति, नटराज की मूर्ति, कुछ हिंदुस्तानी कपड़े, किताबें। जो भी हम ले गए थे, वह सब उन्हें दिया। मैंने माइकल से कहा, ‘सर, हम तीन यंग लड़के एक कंपनी खड़ी करना चाहते हैं। सबको पता है कि हम इंडिया से आपसे मिलने आए हैं और आपका शो कराने आए हैं। अगर आप नहीं आए तो हमारा कॅरियर बनने से पहले ही खत्म हो जाएगा।’ तब माइकल ने कहा, ‘नहीं, मैं पक्का आऊंगा।’ फिर हमने उनसे एक रिक्वेस्ट की, ‘सर, क्या आप एक वीडियो बाइट दे देंगे, जिसमें आप हिंदी में बोल दें, ‘मैं भारत आ रहा हूं।’ उन्होंने वह बाइट भी दे दी। हम वहां से शो कन्फर्म करके लौटे, लेकिन अब सवाल था कि इतने बड़े इवेंट की बात तो हमने कर ली, मगर इसमें पैसे कौन लगाएगा? भारत लौटने के बाद हम सीधे भरत भाई शाह के पास पहुंचे। उस वक्त वे फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े फाइनेंसर माने जाते थे। उन्होंने एक ही मीटिंग में हामी भर दी।
इस शो को लेकर और भी बहुत सारे किस्से हैं। इन किस्सों को हम अगले कॉलम में जारी रखेंगे। अभी के लिए माइकल जैक्सन को याद करके उनके किसी भी पसंदीदा गाने को सुनिए। अपना ख्याल रखिए, खुश रहिए।
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