सेल्फ हेल्प किताबों से:  अपने डर, चिंता व दुख से भागिए मत
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सेल्फ हेल्प किताबों से: अपने डर, चिंता व दुख से भागिए मत

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किताबों से जानिए, अपने सोचने और प्रतिक्रिया देने के तरीके को बदलना क्यों जरूरी है? खुशी का अर्थ समझें, दुख को स्वीकार करें
हम में से कई लोग यह मानते हैं कि खुश रहने का मतलब है जीवन में कभी चिंता, डर या दुख न आए। लेकिन ऐसा संभव नहीं है। हर व्यक्ति को समय-समय पर कठिन भावनाओं का सामना करना पड़ता है। समस्या तब शुरू होती है जब हम इन भावनाओं को पूरी तरह खत्म करने की कोशिश करते हैं। (द हैप्पीनेस ट्रैप -रस हैरिस) जब हालात न बदलें, तब दृष्टिकोण बदलना सीखें
जीवन हमेशा हमारी योजनाओं के अनुसार नहीं चलता। कभी लोग हमारा साथ नहीं देते, कभी परिस्थितियां बदल जाती हैं और कभी मेहनत का परिणाम देर से मिलता है। ऐसे समय में हम घटनाओं को नहीं बदल सकते, लेकिन अपने सोचने और प्रतिक्रिया देने के तरीके को जरूर बदल सकते हैं। (द डेली स्टोइक -राएन हॉलिडे) सफलता उनको मिलती है जो जल्दी रुकते नहीं हैं
जब हम कोई नया काम शुरू करते हैं, तो शुरुआत में सब आसान और उत्साहजनक लगता है। कुछ समय बाद ऐसा दौर आता है जब मेहनत बढ़ती है, परिणाम कम दिखते हैं। यही वह समय होता है जब मन हार मानने लगता है। जो लोग धैर्य रखते हैं वे अक्सर सफलता के करीब पहुंचते हैं। (द डिप -सेथ गॉडिन) छोटे सुधार ही समय के साथ बड़ी सफलता देंगे
अक्सर लोग एक दिन में अपने जीवन को बदल देना चाहते हैं। वे बड़े लक्ष्य बनाते हैं और फिर कुछ दिनों बाद थककर रुक जाते हैं। छोटे बदलाव करें। जैसे रोज केवल कुछ मिनट पढ़ना, थोड़ी देर टहलना या कोई छोटा नया काम शुरू करना। यही छोटे कदम बड़े बदलावों की नींव बनते हैं। (टाइनी हैबिट्स -बीजे फॉग)



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