सेल्फ हेल्प किताबों से:  परफेक्शन नहीं, निरंतरता जरूरी है
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सेल्फ हेल्प किताबों से: परफेक्शन नहीं, निरंतरता जरूरी है

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किताबों से जानिए, कैसे जीवन को एक भूमिका में बांधकर देखना इसकी संभावनाओं को सीमित करता है? हर बड़ा बदलाव अचानक नहीं होता
जब कोई अपने जीवन में बहुत बड़े लक्ष्य को देखकर घबरा जाता है, तो वह शुरुआत नहीं कर पाता। लेकिन अगर वही व्यक्ति हर दिन बहुत छोटा, सरल और संभव कदम उठाए, तो समय के साथ छोटे कदम मजबूत परिवर्तन में बदल जाते हैं। सुधार का सबसे अच्छा तरीका परफेक्शन नहीं, निरंतरता है।
(द पावर ऑफ स्मॉल चेंजेस -ऐस्लिंग लियोनार्ड-कर्टिन) जीवन को देखने का नजरिया बदलें
जीवन को एक भूमिका में बांधकर देखना इसकी संभावनाओं को सीमित करता है। इंसान की रुचि और क्षमताएं कई दिशाओं में फैली हैं। हर अनुभव उसके व्यक्तित्व में एक नई परत जोड़ता है। जब आप खुद को सिर्फ एक करियर या एक शीर्षक तक सीमित नहीं करते हैं, तो अधिक रचनात्मक जीवन जीते है। (द पोर्टफोलिओ लाइफ -जेफ गोइन्स) आपका लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए
आज के समय में मन आसानी से भटकता है। वास्तविक प्रगति तब होती है जब ऊर्जा को एक दिशा में केंद्रित किया जाए। अगर बहुत सारी चीजों में थोड़ा-थोड़ा ध्यान देंगे, तो परिणाम भी कमजोर होंगे। सीमित लेकिन महत्वपूर्ण कार्यों पर गहराई से काम करने से असाधारण परिणाम निकलते हैं। तो, स्पष्ट लक्ष्य बनाएं। (द आर्ट ऑफ फोकस -डैन कोए) मानसिक दबाव कम होगा, तो आप बेहतर सोच पाएंगे
जब मन में कमी का भाव लगातार बना रहता है, चाहे वह समय की कमी हो, पैसे की या अवसरों की…तो मानसिक दबाव बढ़ जाता है। केवल तात्कालिक समस्याओं पर ध्यान देने से दीर्घकालिक सोच कमजोर पड़ती है। इससे निर्णय जल्दबाजी में लिए जाते हैं और गलतियां भी बढ़ती हैं। मानसिक दबाव आपकी समझने व योजना बनाने की क्षमता को सीमित करता है। यह दबाव कम होगा, तो आप स्पष्ट रूप से सोच पाएंगे। (स्कारसिटी -सेंदिल मुल्लेनाथन)



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