6 घंटे पहले
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- किताबों से जानिए, नुकसान को किस तरह स्वीकार करें? जीवन में कब तक स्पष्टता नहीं आती है?
जीवन परिवर्तन और बिछोह से भरा हुआ है जीवन निरंतर परिवर्तन और बिछोह से भरा हुआ है। हमें बार-बार कुछ न कुछ छोड़ना पड़ता है। जैसे बचपन, सपने, अपने प्रियजन। पश्चिमी संस्कृति हमें पकड़ना सिखाती है, छोड़ना नहीं। लेकिन जीवन में सुख और विकास के लिए यह सीखना बहुत जरूरी है कि नुकसान को किस तरह स्वीकार करें। हर रिश्ते, हर दौर का अंत होता ही है। कई बार तो हमें खुद ही आगे बढ़ने के लिए विदाई लेनी पड़ती है। (ट्रांजिशन्स)
हम जैसा सोचते हैं, वैसे विचार आकर्षित करते हैं आकर्षण का नियम कहता है कि समान चीजें एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं। जैसा आप सोचते हैं, वैसी और सोचें आपकी ओर खिंचती हैं। आप नकारात्मक विचार पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो वैसे विचार आपकी ओर खिंचते हैं। कुछ ही मिनटों में आपके मन में ऐसे विचार आते हैं जो आपको परेशान करते हैं। लॉ ऑफ अट्रैक्शन आपके विचारों को ग्रहण करता है और उन्हें वास्तविक रूप में लौटाता है। (लाइक थॉट्स)
अपेक्षाओं को छोड़कर ही हम विनम्र बनते हैं अपेक्षाओं को छोड़ना विनम्रता की दिशा में उठाया गया पहला कदम है। विनम्रता एक अत्यंत सुंदर लेकिन कठिन गुण है, जिसे समझना और अपनाना आसान नहीं। विनम्रता ऐसी चीज नहीं जिसे बलपूर्वक हासिल किया जाए। यह समय के साथ भीतर उतरती है। अपेक्षाओं को छोड़ने का अर्थ यह नहीं कि आप अपनी इच्छाओं को छोड़ दें। आप एक अच्छी मंशा बना सकते हैं और फिर उसे छोड़ सकते हैं। (एलिमिनेट एक्सपेक्टेशंस…)
कभी शांत बैठकर यह जानें कि आपको जीवन से क्या चाहिए? जब तक आप ईमानदारी से यह स्वीकार नहीं करते कि आप वास्तव में क्या चाहते हैं, तब तक एक भ्रम बना रहेगा। जब तक आप जीवन, किसी परिस्थिति या अपने रिश्तों में साफ-साफ यह नहीं मांगते कि आपको क्या चाहिए, तब तक स्पष्टता नहीं आएगी। यह भ्रम तब तक नहीं जाएगा जब तक आप दिल से नहीं मानते कि आप जो चाहते हैं, उसके हकदार हैं। इस भ्रम से बाहर आने के लिए आप कुछ देर शांत बैठें और अपने भीतर झांकें ताकि आप सच में जान सकें कि आप जीवन से क्या चाहते हैं। (कमेंट्री ऑन कंफ्यूजन)








