सोशल मीडिया तय कर रहा सुंदरता के मानक:  अब तकनीक से बुढ़ापा थामने की चाहत हुई हावी, खतरे में चेहरा
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सोशल मीडिया तय कर रहा सुंदरता के मानक: अब तकनीक से बुढ़ापा थामने की चाहत हुई हावी, खतरे में चेहरा

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न्यूयॉर्क2 घंटे पहले

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एंथ्रोपोलॉजिस्ट डॉ. मैकइवन का कहना है कि अब उम्र के असर को पूरी तरह पलटने की कोशिश की जा रही है।- प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar

एंथ्रोपोलॉजिस्ट डॉ. मैकइवन का कहना है कि अब उम्र के असर को पूरी तरह पलटने की कोशिश की जा रही है।- प्रतीकात्मक फोटो

कभी माना जाता था कि इंसान का चेहरा उसकी सबसे खास और स्थायी पहचान है। समाजशास्त्री जॉर्ज सिमेल का कहना था कि हमारी आंखें, नाक और मुंह मिलकर एक ऐसा चेहरा बनाते हैं जो हमें ‘एक व्यक्ति’ के तौर पर पहचान दिलाता है। लेकिन, आज के दौर में चेहरा भी कपड़ों के फैशन की तरह हो गया है, जिसे जब चाहे बदला जा सकता है।

इंटरनेट पर अब चेहरा एक ‘लेबल’ बन गया है। जैसे ‘आईफोन फेस’ यह उन आधुनिक चेहरों को कहते हैं जो सर्जरी या कॉस्मेटिक बदलावों के कारण ऐतिहासिक किरदारों में फिट नहीं बैठते। ‘मार-ए-लागो फेस’ उन महिलाओं के लिए कहा जाता है, जो सर्जरी और बोटोक्स के कारण पूरी तरह ‘प्लास्टिक लुक’ वाली दिखने लगती हैं। वहीं, ‘इंस्टाग्राम फेस’ सुंदरता के ऐसे पैमाने तय किए कि अब सबके चेहरे फिल्टर से एक जैसे दिखने लगे हैं। हद तो यह है कि अब एआई भी इसी बनावटी रूप को ‘आदर्श चेहरा’ मानने लगा है।

एल्गोरिदम का असर: खत्म हो रही चेहरों की विविधता

मानवविज्ञानी डॉ. मैकइवन के मुताबिक, आज की तकनीक एल्गोरिदम पर टिकी है जो विविधता को खत्म कर उसे सबसे कॉमन पैटर्न में ढाल देती है। जिस तरह यूट्यूब आपकी पसंद को सीमित कर देता है, वैसे ही सोशल मीडिया विजुअल पहचान को एक जैसा बना रहा है। जो चेहरे प्लेटफॉर्म पर ज्यादा लोकप्रिय होते हैं, एल्गोरिदम उन्हें ‘आदर्श’ मानकर आगे बढ़ाता है।

खास सर्जरी से अब उम्र को ‘रिवर्स’ करना संभव

एंथ्रोपोलॉजिस्ट डॉ. लॉरेल मैकइवन का कहना है कि शरीर को बदलना नया नहीं है, पर आज की तकनीक ने इसकी क्षमता और सटीकता को बहुत बढ़ा दिया है। मॉडर्न मेडिकल टेक और लेजर जैसी तकनीकों से अब चेहरे का आकार और पिगमेंट पूरी तरह बदला जा सकता है। अब उम्र के असर को पूरी तरह पलटने की कोशिश की जा रही है।

‘फिल्टर’ से उबे , वास्तविक चेहरा देखने की चाहत बढ़ी

सोशल मीडिया पर जरूर फिल्टर वाले चेहरे का ट्रेंड है। लेकिन अब लोग बनावटी सुंदरता और सर्जरी वाले चेहरों से ऊबने लगे हैं। फिर से प्राकृतिक और ‘असली’ दिखने की चाहत बढ़ रही है। ब्रिटिश अभिनेत्री एमी लू वुड जैसे सितारों को मिल रहा समर्थन यह साबित करता है कि दुनिया अब फिर से असली चेहरे ही वास्तविक पहचान बनें।



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