रूपांजल चौहान
लोग बजट में मध्यम वर्ग को राहत, टैक्स में छूट, महिलाओं, किसानों और उद्यमियों के लिए खास योजनाएं चाहते हैं। साथ ही वे चाहते हैं कि बजट आम आदमी की जिंदगी पर सीधा असर डाले। यह जानकारी मिंट के सर्वे में सामने आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी।
इस सर्वे में टैक्स स्लैब बदलाव, बजट से उम्मीदें, लोकलुभावन कदम, महिलाओं, किसानों के लिए योजनाओं की आवश्यकता जैसे मुद्दों पर राय ली गई। जब लोगों से उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता के बारे में पूछा गया, तो मध्यम वर्ग के लिए टैक्स दरें वाला विकल्प सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहा और इसे 23% वोट मिले।
यह तब है, जब पिछले साल इनकम टैक्स स्लैब में राहत और जीएसटी दरों में कटौती की गई थी। लगभग 22% लोगों ने बजट में युवाओं के लिए रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने की बात कही। प्रतिभागियों को दिए गए सात विकल्पों में से केवल एक ही चुनने की अनुमति थी। स्वास्थ्य और शिक्षा (19%), इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास (13%) और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करना (11%) अपेक्षाकृत कम लोगों की प्राथमिकता रहे।
टैक्स कटौती को लोगों की मंजूरी
पिछले साल सरकार ने नई टैक्स व्यवस्था के तहत व्यक्तिगत आयकर में बड़ी राहत की घोषणा की थी। धारा 87ए के तहत छूट बढ़ाए जाने से टैक्स मुक्त आय सीमा 12 लाख रुपये तक पहुंच गई, जबकि वेतनभोगी करदाताओं के लिए यह सीमा स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद 12.75 लाख रुपये हो गई। लगभग 60% लोगों ने इन बदलावों पर संतोष जताया। इसमें 18% पूरी तरह संतुष्ट थे और 42% काफी हद तक संतुष्ट थे। इसके अलावा 57% ने कहा कि इन टैक्स कटौतियों का उनके रोजमर्रा के जीवन पर साफ असर पड़ा।
लोकलुभावन बजट की मांग कायम : आने वाले बजट में लोकलुभावन बजट की मांग अब भी कायम है। करीब 35% पूरी तरह लोकलुभावन बजट के पक्ष में हैं, जबकि 28% लोग कुछ हद तक लोकलुभावन बजट चाहते हैं।
प्राथमिकता वाले समूह
करीब 67% महिलाओं के लिए योजनाओं के पक्ष में हैं। किसानों के लिए यह समर्थन 75% से अधिक है। उद्यमियों और स्टार्टअप के लिए यह मांग 80% से भी ज्यादा है। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है, जब इन वर्गों के लिए पहले से कई सरकारी योजनाएं चल रही हैं।
छोटी अवधि की योजनाएं ज्यादा पसंद
लोग बजट में छोटे समय की योजना चाहते हैं। जब लोगों से पूछा गया कि बजट नीतियां बनाते समय सरकार को कितने समय की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए, तो 58% लोगों ने कहा कि सरकार को पांच साल से ज्यादा आगे नहीं सोचना चाहिए। 26% लोगों ने 10 साल की अवधि का सुझाव दिया। सिर्फ 16% का मानना है कि सरकार को 20 साल या उससे आगे तक की योजना बनानी चाहिए।
मायने रखता है बजट
10 में से छह लोगों ने कहा कि पिछले बजटों का उनकी जिंदगी पर सीधा असर पड़ा। जब उनसे पूछा गया कि क्या बजट को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, तो 45% ने कहा कि ऐसा नहीं है। 30% को लगा कि बजट को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है।
करीब 74% नई टैक्स व्यवस्था में कुछ छूट चाहते हैं। वहीं, लगभग 70% लोगों ने पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत आयकर अधिनियम की धारा 80सी में 1.5 लाख रुपये की छूट सीमा बढ़ाने की मांग की। लोग नहीं चाहते कि बजट सिर्फ बड़े उद्योगों को खुश करने पर केंद्रित हो। यह वेतनभोगी मध्यम वर्ग पर अपना ध्यान बनाए रखे।
इस तहर किया गया सर्वे
यह ऑनलाइन सर्वे चार दिसंबर 2025 से 26 जनवरी 2026 के बीच किया गया था। इसमें कुल 1,674 लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। करीब 72% देश के 15 बड़े टियर-1 और टियर-2 शहरों से थे, जिनमें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, सूरत, चंडीगढ़, कानपुर और इंदौर शामिल हैं। सभी में 85% से अधिक पुरुष थे।
लगभग 49% लोग वेतनभोगी वर्ग से थे, 12% व्यवसायी थे और 21% छात्र थे। 28% से अधिक लोगों ने बताया कि उनकी सालाना आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है, जबकि करीब 60% लोगों की वार्षिक आय 10 लाख रुपये या उससे कम थी। लगभग 54% की उम्र 25 से 50 वर्ष के बीच थी।
बजट 2026 के लिए लोगों की प्राथमिकताएं
प्राथमिकता वोट (%)
मध्यम वर्ग के लिए टैक्स दरें 23
युवाओं के लिए रोजगार सृजन 22
स्वास्थ्य और शिक्षा 19
बुनियादी ढांचे का विकास (इन्फ्रास्ट्रक्चर) 13
राजकोषीय घाटा और सरकारी कर्ज को नियंत्रित करना 11
पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं का समाधान 09
गरीब और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए योजनाएं 03
– सर्वे में 1,674 लोग शामिल। प्रतिभागियों को केवल एक विकल्प चुनने की अनुमति थी।
– स्रोत: मिंट प्री-बजट सर्वे








