रसरंग में मायथोलॉजी:  व्यापार मार्गों के जरिए दक्षिण में हुआ धर्म और संस्कृति का प्रसार
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रसरंग में मायथोलॉजी: व्यापार मार्गों के जरिए दक्षिण में हुआ धर्म और संस्कृति का प्रसार

पिछले सप्ताह हमने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक भिन्नताओं के साथ यह भी जाना था कि किस प्रकार जैन और बौद्ध साधु आर्य संस्कृति को दक्षिण भारत तक लेकर आए। आज हम उसी चर्चा को आगे बढ़ा रहे हैं। बौद्ध और जैन साधु समुद्रतटों और नदीतटों के मार्ग से होते दक्षिण भारत पहुंचे थे। […]

रसरंग में मायथोलॉजी:  शक्ति की उपासना: पाषाण युग से शास्त्रीय परंपरा तक
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रसरंग में मायथोलॉजी: शक्ति की उपासना: पाषाण युग से शास्त्रीय परंपरा तक

भारत में देवी पूजा की शुरुआत कब हुई, यह निर्धारित करना काफी कठिन है। संभव है कि इसकी शुरुआत पाषाण युग में हुई हो। यह वह समय था, जब मनुष्य धरती को देवी या किसी महिला के गर्भाशय से जोड़कर देखने लगा था। इसी दौर में पेड़ों और नदियों को भी देवी के रूप में […]

रसरंग में मायथोलॉजी:  आर्यावर्त का ‘भारतवर्ष’ के रूप में किस तरह हुआ विस्तार?
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रसरंग में मायथोलॉजी: आर्यावर्त का ‘भारतवर्ष’ के रूप में किस तरह हुआ विस्तार?

ऋग्वेद का अंतिम संकलन लगभग 1000 ईसा पूर्व में किया गया माना जाता है। इसमें कुरु कुल के सदस्यों के लिए ‘भरत’ शब्द का प्रयोग हुआ है। इस कुल के सदस्य सिंधु नदी की द्रोणी से लेकर गंगा के पश्चिमी तट तक फैले क्षेत्र पर नियंत्रण रखते थे। यह भूभाग आज पंजाब और हरियाणा कहलाता […]