युधिष्ठिर की द्रौपदी को सीख:  जीवन में समस्याएं कभी पूरी तरह खत्म नहीं होतीं, हमें परिस्थितियों के बीच भी संतुलन बनाना सीखना चाहिए
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युधिष्ठिर की द्रौपदी को सीख: जीवन में समस्याएं कभी पूरी तरह खत्म नहीं होतीं, हमें परिस्थितियों के बीच भी संतुलन बनाना सीखना चाहिए

Hindi News Jeevan mantra Dharm Mahabharat Yudhishthira Droupadi Life Lesson, Mahabharata Story In Hindi, Yudhishthir And Dropadi Story In Hindi 11 घंटे पहले कॉपी लिंक महाभारत में पांडवों का वनवास काल चल रहा था, उस समय उनका जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। कभी भोजन की चिंता होती, कभी रहने की, तो कभी आने वाली […]

रसरंग में मायथोलॉजी:  बुद्ध की करुणा से जन्मी तारा किस तरह बनीं बौद्ध धर्म की देवी!
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रसरंग में मायथोलॉजी: बुद्ध की करुणा से जन्मी तारा किस तरह बनीं बौद्ध धर्म की देवी!

देवदत्त पट्टनायक1 घंटे पहले कॉपी लिंक लगभग 2,500 वर्ष पहले बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। इसके बाद बुद्ध के लगभग समकक्ष महिमा वाली एक देवी के उदय में करीब 1,000 वर्ष लग गए। उससे पहले बौद्ध साहित्य में धन की देवी ‘श्री’ ही एकमात्र प्रमुख देवी थीं, जिनका कला में भी चित्रण मिलता है। […]

रसरंग में मायथोलॉजी:  बुद्ध की करुणा से जन्मी तारा किस तरह बनीं बौद्ध धर्म की देवी!
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रसरंग में मायथोलॉजी: बुद्ध की करुणा से जन्मी तारा किस तरह बनीं बौद्ध धर्म की देवी!

देवदत्त पट्टनायक3 घंटे पहले कॉपी लिंक लगभग 2,500 वर्ष पहले बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। इसके बाद बुद्ध के लगभग समकक्ष महिमा वाली एक देवी के उदय में करीब 1,000 वर्ष लग गए। उससे पहले बौद्ध साहित्य में धन की देवी ‘श्री’ ही एकमात्र प्रमुख देवी थीं, जिनका कला में भी चित्रण मिलता है। […]

रसरंग में मायथोलॉजी:  प्राचीन भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है लैंगिक विविधता
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रसरंग में मायथोलॉजी: प्राचीन भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है लैंगिक विविधता

महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में भीष्म ने शिखण्डी से युद्ध करने से इनकार कर दिया था। उनके अनुसार, चूंकि शिखण्डी का जन्म स्त्री के रूप में हुआ था, इसलिए वह स्त्री ही था। दूसरी ओर कृष्ण का दृष्टिकोण अलग था। उनका मानना था कि यदि शिखण्डी स्वयं को पुरुष मानता है, तो वह पुरुष है। […]

रसरंग में मायथोलॉजी:  व्यापार मार्गों के जरिए दक्षिण में हुआ धर्म और संस्कृति का प्रसार
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रसरंग में मायथोलॉजी: व्यापार मार्गों के जरिए दक्षिण में हुआ धर्म और संस्कृति का प्रसार

पिछले सप्ताह हमने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक भिन्नताओं के साथ यह भी जाना था कि किस प्रकार जैन और बौद्ध साधु आर्य संस्कृति को दक्षिण भारत तक लेकर आए। आज हम उसी चर्चा को आगे बढ़ा रहे हैं। बौद्ध और जैन साधु समुद्रतटों और नदीतटों के मार्ग से होते दक्षिण भारत पहुंचे थे। […]

रसरंग में मायथोलॉजी:  शक्ति की उपासना: पाषाण युग से शास्त्रीय परंपरा तक
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रसरंग में मायथोलॉजी: शक्ति की उपासना: पाषाण युग से शास्त्रीय परंपरा तक

भारत में देवी पूजा की शुरुआत कब हुई, यह निर्धारित करना काफी कठिन है। संभव है कि इसकी शुरुआत पाषाण युग में हुई हो। यह वह समय था, जब मनुष्य धरती को देवी या किसी महिला के गर्भाशय से जोड़कर देखने लगा था। इसी दौर में पेड़ों और नदियों को भी देवी के रूप में […]

रसरंग में मायथोलॉजी:  आर्यावर्त का ‘भारतवर्ष’ के रूप में किस तरह हुआ विस्तार?
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रसरंग में मायथोलॉजी: आर्यावर्त का ‘भारतवर्ष’ के रूप में किस तरह हुआ विस्तार?

ऋग्वेद का अंतिम संकलन लगभग 1000 ईसा पूर्व में किया गया माना जाता है। इसमें कुरु कुल के सदस्यों के लिए ‘भरत’ शब्द का प्रयोग हुआ है। इस कुल के सदस्य सिंधु नदी की द्रोणी से लेकर गंगा के पश्चिमी तट तक फैले क्षेत्र पर नियंत्रण रखते थे। यह भूभाग आज पंजाब और हरियाणा कहलाता […]