वह इंश्योरेंस में करिअर बनाने की सोच रहा था, जहां उसने कभी दो महीने की इंटर्नशिप भी की थी। लेकिन इस गर्मी से पहले 22 साल के उस युवक ने अचानक इरादा बदल दिया और अब फुल-टाइम इलेक्ट्रिशियन बन रहा है। उसने इस गर्मी में मेट्रो सिटी में शिफ्ट होने का फैसला कर लिया और […]
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एन. रघुरामन का कॉलम: सोशलाइजिंग का जरिया ‘नाइट वाइब्स’ की जगह अब ‘कॉफी रेव्स’ बन गया है
Hindi News Opinion N Raghuraman Column: Coffee Reves Replaces Night Vibes For Socializing 9 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु 14 मार्च 2026 को उस वीडियो कॉल में मेरे परिवार की अगली पीढ़ी एक पार्टी में थी। यह ‘द बंड’ नाम की जगह पर आयोजित हुई, जो चीन के सेंट्रल शंघाई में हुआंगपू […]
एन. रघुरामन का कॉलम: एआई दादा-दादियों के लिए भी उतना ही जरूरी है, जितना बच्चों के लिए
“बहुत हुआ राहुल, टेक्नोलॉजी में लोगों की मदद करने के बहाने तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रहे हो, बोर्ड की परीक्षाएं नजदीक हैं।’ राहुल ने तो अपनी मां की इस सख्त चेतावनी पर ध्यान तक नहीं दिया था, लेकिन उस आवाज में मौजूद तिरस्कार का स्वर इतना तीखा था कि वो किसी और […]
एन. रघुरामन का कॉलम: परिपक्व संगठन हमेशा पूछते हैं कि ‘क्या हो सकता है’, न कि ‘क्या हुआ’
जो गुड़ी पड़वा उत्सव का दिन होना था, वह इंदौर शहर के लिए शोक का दिन बन गया। बुधवार को एक घर में लगी आग में मारे गए सात लोगों की चिताएं जब एक साथ जलीं तो इसकी पीड़ा पूरे शहर को सामूहिक तौर पर महसूस हुई। मृतकों में एक मासूम भी था। इस दर्दनाक […]
एन. रघुरामन का कॉलम: आजकल के स्कूली बच्चे इकोनॉमिक्स की जगह पर्सनल फाइनेंस चुन रहे हैं
Hindi News Opinion School Kids Choose Personal Finance Over Economics: N Raghuraman Column 2 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु स्कूल अपने विद्यार्थियों को असल दुनिया के लिए कैसे तैयार कर सकते हैं? यहां एक तरीका है। हालांकि, मैं यह नहीं कह रहा कि यही एकमात्र तरीका है। चलिए शुरू करें। क्लासरूम में […]
एन. रघुरामन का कॉलम: अब तक एआई काम के बोझ से राहत नहीं दे पा रहा
एआई की मदद से काम पूरा कर रहे लोगों से पूछिए कि वे इससे कितना समय बचा लेते हैं? वे आपको यह कह कर चौंका सकते हैं कि ‘एआई ने हमारा काम बेहतर नहीं, बदतर कर दिया है।’ महज कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि सबसे बड़े एआई समर्थकों को भी इससे सबसे बड़ी उम्मीद यही थी […]
एन. रघुरामन का कॉलम: अधिकतर परिवारों के लिए फोन बेबीसिटर बन गए हैं
अगर आप ग्रामीण भारत में किसी पैसेंजर ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो आपको कुछ ऐसा दृश्य दिख सकता है- चलती ट्रेन में भी किचन की जिम्मेदारी संभाल रही एक युवा मां अपने हैंडबैग में हाथ डालती है। उसका साल भर का बेटा राहुल (काल्पनिक नाम) बेचैन है। उसके नन्हे-से हाथ मां की कलाई […]
एन. रघुरामन का कॉलम: दिल छूने वाली कहानियां नहीं सुनाई जातीं तो दिल तोड़ने वाली घटनाएं होती हैं
Hindi News Opinion Dil Chune Wali Kahaniyan: N. Raghuraman Column | Heartwarming Stories 7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु स्कूली दिनों में मैं न सिर्फ दयालु शिक्षकों के मार्गदर्शन में बड़ा हुआ, बल्कि बड़े होने पर भी मैंने उनकी दयालुता की कहानियां सुनी हैं। ‘द लेटर्स इन द ड्रॉअर’ ऐसी ही कहानी […]
एन. रघुरामन का कॉलम: मेंटल स्पेस की जरूरत हो तो लोगों को ‘शशिंग’ से चुप कराने में हर्ज नहीं
2 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु एक “गरीब स्कूल’ (जिसकी फीस 1960 के दशक में 2 रुपए थी) में पढ़ने के बावजूद मुझे बचपन से ही सख्ती से सिखाया गया था कि अगर मैं किसी साझा या सार्वजनिक जगह पर शोर कर रहा हूं, तो मुझे या तो अपनी आवाज को कम […]
एन. रघुरामन का कॉलम: बुजुर्गों को स्कैम से बचाने का समय आ गया है
बुजुर्गों के खिलाफ शारीरिक अपराध अब कम हो रहे हैं, लेकिन आर्थिक अपराध नहीं। एक ओर जहां सीबीआई ने पिछले साल हुए बड़ी रकम की हेराफेरी संबंधी ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दो मामलों की जांच इसी गुरुवार को हाथों में ली है, वहीं ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खतरा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बल्कि […]
एन. रघुरामन का कॉलम: करिअर का चुनाव किसी भी बेमकसद युद्ध की तरह न हो
Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column Career Choice Shouldn’t Be Like A Pointless Battle 7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु वह हॉलीवुड में कोई बॉक्स ऑफिस एनालिस्ट नहीं, बस हाई स्कूल का एक सीनियर छात्र है। लेकिन उसे अच्छे से पता है कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता है। वह फिल्म […]
एन. रघुरामन का कॉलम: हममें से कितने उन ‘अदृश्य लोगों’ को देखने के लिए ट्रेन्ड हैं?
बुधवार सुबह की बात है, उस लोकल ट्रेन में खिड़की वाली सीट पर 20-25 साल का युवक बैठा था। वहीं, एक अधेड़ उम्र की महिला आंखें मूंदे तीसरे नंबर की सीट पर बैठी थी। ट्रेन का एसी घड़घड़ा रहा था। मैं सामने की सीट पर था। ट्रेन में भीड़ नहीं थी। मैं इधर-उधर देख रहा […]
एन. रघुरामन कॉलम: ‘क्विक सर्विस’ एक नशा है, जो रिटेलर्स मुफ्त में देकर आदत लगा रहे हैं
Hindi News Opinion Quick Service Addiction: Retailers Hooking Customers For Free | Raghuraman Column 54 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु ‘क्या आप देख सकते हैं कि दरवाजे पर कौन है?’ वॉशरूम से पत्नी का यह फरमान सुन कर मैं अपने कंप्यूटर से उठा और फ्रंट डोर की ओर चल पड़ा। डिलीवरी बॉय […]
एन. रघुरामन का कॉलम: अपने बच्चों को संकट से निपटना सिखाएं…
आज के दौर में ‘अर्श से फर्श’ तक पहुंचने वाले कई कारोबारी साम्राज्य उन लोगों ने खड़े किए हैं, जिन्होंने जमीन पर उतरकर कड़ी मेहनत की है। लेकिन, उनकी अगली पीढ़ी एक ऐसे दौर में पली-बढ़ी है जहां सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं रही। उन्होंने कभी किसी बड़े आर्थिक संकट का कड़वा स्वाद नहीं चखा। […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ऑल-इन-वन प्रजाति यानी स्त्रियों से मैंने दो शानदार सबक सीखे हैं!
Hindi News Opinion N Raghuraman Column: 2 Lessons Learned From All in One Species Women 8 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु 1. बाहर तापमान एक अंक में हो या मूसलधार बारिश हो रही हो- उनका एक नियम अटल था : सुबह 5 बजे से बहुत पहले जब अलार्म घड़ी बज उठे तो […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ऑल-इन-वन प्रजाति यानी स्त्रियों से मैंने दो शानदार सबक सीखे हैं!
Hindi News Opinion N Raghuraman Column: 2 Lessons Learned From All in One Species Women 2 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु 1. बाहर तापमान एक अंक में हो या मूसलधार बारिश हो रही हो- उनका एक नियम अटल था : सुबह 5 बजे से बहुत पहले जब अलार्म घड़ी बज उठे तो […]
एन. रघुरामन का कॉलम: स्मॉल टॉक, बड़े परिणाम देती है
अजनबियों से बातचीत कभी हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा होती थी, लेकिन टेक्नोलॉजी ने इसे खत्म कर दिया है। अच्छा लगे या नहीं, लेकिन सच यही है। किसी भी सार्वजनिक जगह पर जाइए, हम एक-दूसरे का अभिवादन करने के बजाय आपस में भिड़ते रहते हैं और फिर झगड़े के डर से तुरंत ‘सॉरी’ कह […]
एन. रघुरामन का कॉलम: जब लोहा गर्म है तो मार दो हथौड़ा
एक पुरानी मोरल स्टोरी याद करें, जिसमें कई प्रशिक्षित मैकेनिकों के विफल होने के बाद एक बड़ी-सी मशीन ठीक करने के लिए साधारण-से आदमी को बुलाया जाता है। लगभग एक घंटे तक मशीन की जांच-परख करने के बाद वह एक जगह पर एक बार हथौड़ा मारता है और मशीन चल पड़ती है। वह मशीन चालू […]
एन. रघुरामन का कॉलम: हर जीत के पीछे रहे उन अज्ञात कॉन्ट्रिब्यूटर्स की भी सराहना करें
क्या आप बता सकते हैं कि इस रविवार ईडन गार्डन मैदान पर जब इंडिया और वेस्ट इंडीज के बीच क्वार्टर फाइनल खेला गया, तब किसने किसको यह कहा कि ‘शांत रहो और काम पूरा होने तक क्रीज पर टिके रहो’? जब तक जोशीले क्रिकेट प्रशंसक जवाब सोचें, मैं आपको और अनजान कॉन्ट्रिब्यूटर्स की ओर ले […]
एन. रघुरामन का कॉलम: अनुशासन फैशन से बाहर हो सकता है, चलन से नहीं
Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column Discipline May Go Out Of Fashion, But Not Trend 1 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु ‘मैं सिर्फ सैटरडे, संडे और वीकडेज में नहीं पीता, बाकी दिन मैं कुछ भी पी लेता हूं।’ जब से मैंने शराब वाली पार्टियों में जाना शुरू किया तो दशकों से मेरा […]
एन. रघुरामन का कॉलम: आपस में सुनने की आदत एक ब्रेकडाउन को ब्रेकथ्रू बनाती है
Hindi News Opinion N Raghuraman Column: Listening Skill Turns Breakdown Into Breakthrough 7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु कई दशक पहले की बात है, मेरे कजिन की शादी थी। हमारी पीढ़ी में यह पहली शादी थी। हम सब कजिन इतने उत्साहित थे कि मद्रास (अब चेन्नई) में इकट्ठा हुए और तैयारियों में […]
एन. रघुरामन का कॉलम: पार्टी की चर्चाओं में गर्मजोशी लानी है तो अपने पास हैरतअंगेज जानकारी रखिए
आपने कई ईवनिंग पार्टियों में देखा होगा कि कुछ लोग सबका ध्यान खींचते हैं। ऐसा नहीं कि वे सेलेब्रिटी या बहुत अमीर लोग हों, जो अपना फैशन दिखा रहे हों, बल्कि वे वहां इकट्ठे लोगों को कुछ अनसुनी कहानियां सुना रहे होते हैं और इसीलिए पार्टी की जान बन जाते हैं। दूसरों के बारे में […]
एन. रघुरामन का कॉलम: कनेक्शन और सेलिब्रेशन अपने पुराने तौर-तरीकों पर लौट रहे हैं
बचपन में हममें से ज्यादातर लोग पैरेंट्स के साथ ‘सत्संग’ में जाते थे। उनके बगल में बैठते थे। भले ही शायद हम न जानते हों कि भजनों के बोल क्या हैं और कैसे इन्हें गाया जाता है। कुछ लोगों ने शायद वो ऊर्जा तरंगें महसूस की होंगी और कुछ ने उन्हें अनदेखा किया होगा। हममें […]
एन. रघुरामन का कॉलम: क्या याददाश्त की समस्याएं हमारी युवा वर्कफोर्स को प्रभावित कर रही हैं?
20 साल से एक ही परिवार के साथ काम कर रहे 39 वर्षीय ड्राइवर को तीन काम सौंपे गए। दोस्त के घर से पार्सल लेना, फिर किराने की तीन चीजें खरीदना और लौटते वक्त लॉन्ड्री से कपड़े ले आना। वह बिना कपड़े लिए लौट आया। पूछने पर सहज जवाब था कि ‘भूल गया, माफ कीजिए।’ […]
एन. रघुरामन का कॉलम: क्या याददाश्त की समस्याएं हमारी युवा वर्कफोर्स को प्रभावित कर रही हैं?
20 साल से एक ही परिवार के साथ काम कर रहे 39 वर्षीय ड्राइवर को तीन काम सौंपे गए। दोस्त के घर से पार्सल लेना, फिर किराने की तीन चीजें खरीदना और लौटते वक्त लॉन्ड्री से कपड़े ले आना। वह बिना कपड़े लिए लौट आया। पूछने पर सहज जवाब था कि ‘भूल गया, माफ कीजिए।’ […]



























