इंस्पायरिंग:  खुद को ईमानदारी और सच्चाई से व्यक्त करें, तो किसी का भी दिल जीत सकते हैं – रणवीर सिंह
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इंस्पायरिंग: खुद को ईमानदारी और सच्चाई से व्यक्त करें, तो किसी का भी दिल जीत सकते हैं – रणवीर सिंह

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एक्टर अपनी फिल्म ‘धुरंधर’के सीक्वल की रिलीज को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। रणवीर से फिल्मी सफर की प्रेरक बातें… जिंदगी कई बार इतनी तेज हो जाती है कि सब कुछ भागता हुआ-सा लगता है। ऐसे समय में मुझे सबसे ज्यादा जरूरत होती है शांति की, सुकून की और थोड़ी खामोशी की। लेकिन अगर अपनी जिंदगी की असली ताकत की बात करूं, तो वह है जिज्ञासा। जानने की भूख। मुझे हमेशा से नई चीजें सीखने और समझने की चाह रही है। मैंने यूनिवर्सिटी में कम्युनिकेशन और कल्चर की पढ़ाई की, क्योंकि दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों को समझने में बहुत दिलचस्पी है। मैं मानता हूं कि संस्कृति हमें जोड़ती है। जब आप किसी संस्कृति को दिल से समझते हैं, तो दुनिया के किसी भी कोने के इंसान से जुड़ सकते हैं। बहुत लोग मुझसे पूछते हैं कि अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोगों से जुड़ने का राज क्या है। मैं हमेशा एक ही जवाब देता हूं … ऑथेंटिसिटी यानी सच्चाई। जब कोई इंसान खुद को ईमानदारी और सच्चाई से व्यक्त करता है, तो वह दुनिया के किसी भी इंसान का दिल जीत सकता है। सच्चाई की भाषा हर जगह समझी जाती है।
मेरी जिंदगी की शुरुआत इतनी आसान नहीं थी। जब दसवीं कक्षा में था, तब पहली बार सोचा कि एक्टर बनना है। लेकिन कुछ ही समय बाद यह सपना छोड़ दिया। उस समय मुझे लगता था कि यह सपना मेरे जैसे किसी लड़के के लिए बहुत दूर की चीज है। क्योंकि उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में बाहर से आकर सफल होने वाले बहुत कम थे। चार साल तक मैंने उस सपने को छोड़ दिया। उस दौरान मैं लेखन कर रहा था। लेकिन एक समय ऐसा आया जब खुद से एक सवाल पूछा। मैंने खुद से कहा, हो सकता है यह सपना बहुत दूर का हो। लेकिन क्या मैं बिना कोशिश किए इसे छोड़ सकता हूं? मैं यह मान सकता था कि शायद मैं सफल न हो पाऊं… लेकिन यह स्वीकार नहीं कर सकता था कि मैंने कोशिश ही नहीं की। उस दिन फैसला किया कि पूरी ताकत से कोशिश करूंगा। यही वह पल था जब मैंने अपनी किस्मत खुद बनाना शुरू की। अगर आपका दिल किसी काम में लगता है, तो आप उसमें जरूर आगे बढ़ते हैं, वरना सफलता मुश्किल हो जाती है। मुंबई में पला-बढ़ा, तो सिर पर छत और खाना था। उसके बाद का रास्ता खुद बनाना पड़ा। शुरुआत में समझ नहीं आता था कि क्या करना है। लेकिन धीरे-धीरे चीजें बनने लगीं। सफलता अचानक नहीं आती। कई सालों तक मुझे अपने काम से मिलने वाली छोटी-छोटी तारीफों ने आत्मविश्वास दिया। जब आत्मविश्वास आया, तब खुद को खुलकर व्यक्त कर पाया। फिर जब मैंने खुद को सच्चाई से व्यक्त किया, तब लोगों ने उससे जुड़ना शुरू किया। आपके दिल में कोई सपना है, तो उसे छोड़ें नहीं
सपने कभी छोटे या बड़े नहीं होते। सिर्फ हमारी हिम्मत छोटी या बड़ी हो सकती है। इसलिए अगर आपके दिल में कोई सपना है, तो उसके पीछे दौड़िए, उसे छोड़िए मत। उसके लिए मेहनत कीजिए। खुद पर भरोसा रखिए। सबसे जरूरी बात यह कि हमेशा अपने असली रूप में रहिए। दुनिया को आपकी नकल नहीं, आपकी असली पहचान चाहिए।



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