एन. रघुरामन का कॉलम:  डेली एक्सरसाइज के लिए जिम से ज्यादा पार्क का बेंच काफी है
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एन. रघुरामन का कॉलम: डेली एक्सरसाइज के लिए जिम से ज्यादा पार्क का बेंच काफी है

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3 घंटे पहले

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एन. रघुरामन
मैनेजमेंट गुरु - Dainik Bhaskar

एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु

अगर कोई पारिवारिक व्यक्ति सिर्फ अपना वजन मेंटेन रखना चाहता है, घर के रोजमर्रा के काम और दफ्तर में बेहतर प्रदर्शन करते हुए दिनभर फुर्तीला, स्वस्थ और एक्टिव रहना चाहता है, तो उसे रोजाना के वर्कआउट के लिए जिम की जरूरत नहीं, क्योंकि समीप का पार्क ही उसे जरूरत के सारे उपकरण दे सकता है। ऐसा मैं नहीं, बल्कि फिटनेस एक्सपर्ट्स कह रहे हैं। सोच रहे होंगे कि उन्हें दुनिया भर के पार्कों में मौजूद उपकरणों के बारे में कैसे पता? तो इसका जवाब है कि किसी के लिए जो एक उपकरण जरूरी है- वह है पार्क बेंच, जो घर के समीप के हर पार्क में होती है।

एक्सपर्ट कहते हैं कि उसी बेंच के साथ बेहतरीन वर्कआउट किया जा सकता है। देशभर के कई पार्कों में फ्री-टु-यूज आउटडोर जिम और एयर वॉकर, क्रॉस ट्रेनर, चेस्ट और लेग प्रेस जैसे कई उपकरण होते हैं, जो आपका हिप साइज घटाने में मदद करते हैं। लेकिन ज्यादातर पार्कों में सिर्फ बैठने की बेंच होती हैं और विशेषज्ञों का कहना है कि वही वर्कआउट मशीन के रूप में इस्तेमाल की जा सकती हैं।

अगर आप इंस्टाग्राम जैसी सोशल साइट्स देखें तो वहां हजारों रील्स मिलेंगी, जिनमें लोग वर्कआउट के लिए पार्क बेंच इस्तेमाल कर रहे हैं। मध्य आयु वर्ग के लोगों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि हफ्ते में दो बार आउटडोर सेशन करने से आठ हफ्तों बाद शारीरिक बनावट और ओवरऑल फिजिकल हेल्थ में महत्वपूर्ण सुधार हुआ। वहीं 11 अध्ययनों की समीक्षा में पाया गया कि आउटडोर पार्क सेशंस से कार्डियो फिटनेस और स्ट्रेंथ बढ़ती है।

मानसिक स्वास्थ्य और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी बेहतर होता है। वॉर्म-अप एक्सरसाइज के लिए पार्क में पांच मिनट की जॉगिंग या ब्रिस्क-वॉक सर्वाधिक फायदेमंद है, जो कोई जिम नहीं दे सकता। हममें से ज्यादातर लोगों के लिए पार्क बेंच की ऊंचाई स्टेप-अप्स करने के लिए बिल्कुल सही होती है।

बस एक रिक्वेस्ट है कि एक्सरसाइज जूते उतारकर करें, क्योंकि आपके जाने के बाद लोग उसी बेंच पर बैठते हैं। बेंच से कुछ फीट पीछे खड़े होकर और हाथों को उसकी सबसे ऊपरी सतह पर रखकर आप पुश-अप्स कर सकते हैं। बैलेंस, स्टेबिलिटी और कोऑर्डिनेशन सुधारने के लिए सीटेड स्क्वैट्स किए जा सकते हैं, जिससे ग्लूट्स और हैमस्ट्रिंग्स को मजबूती मिलती है। बेंच के फायदे जानने वाले लोग बेंच साइड प्लैंक्स भी करते हैं, जिससे कमर और ऑब्लिक मसल्स की एक्सरसाइज होती है। इसके अलावा पार्क आपको कई ऐसे फायदे देता है, जो जिम नहीं दे सकता।

1. यहां आप विविध क्षेत्रों के अलग-अलग पृष्ठभूमि और ऊर्जा वाले लोगों से मिल सकते हैं, जो इसे अपने आप में सामाजिक और जादुई रूप से प्रेरणादायक बनाता है। एक बार भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच कवर करने मैं पाकिस्तान गया तो वहां मैं लाहौर के शालीमार गार्डन में ब्रिस्क-वॉक के ​लिए गया था। वहां मेरी मुलाकात ऐसे व्यक्ति से हुई, जो हाल ही जेल से छूटा था और अपनी जिंदगी पटरी पर लाना चाहता था। यकीन मानिए, अगर मैं होटल की जिम में एक्सरसाइज करता तो मुझे ऐसा अनुभव कभी नहीं मिलता। वो अनुभव मैं कभी नहीं भूल सकता।

2. अगर आप बिना हेडफोन के एक्सरसाइज या वॉक करते हैं, तो पक्षियों की चहचहाहट और पत्तों की सरसराहट आपका तनाव कम कर देगी।

3. आउटडोर गार्डन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपका मन वहां किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं करता। आप रोजाना उन्हें देखते हैं तो वो आपको जानते तो हैं, फिर भी उनसे कोई व्यक्तिगत जान-पहचान नहीं होती।

4. जब आप पार्क में वॉक, रनिंग या हल्की एक्सरसाइज करते हैं तो हरे पेड़ और नीला आसमान मानस पटल पर ऐसा अनोखा दृश्य बनाते हैं, जो जिम का माहौल कभी नहीं कर सकता।

फंडा यह है कि सभी पार्कों के वर्कआउट स्पेस का माहौल सभी के लिए समानता भरा और स्वागत करने वाला होता है। ये प्राकृतिक वातावरण और स्वस्थ रहने की बुनियादी इच्छा को आपस में जोड़ता है, बिना यह साबित किए कि किसके सिक्स पैक्स अधिक बेहतर दिखते हैं।

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