एन. रघुरामन का कॉलम:  सेहत की समस्याओं के समाधान के लिए पहले उसकी प्रक्रिया समझें
टिपण्णी

एन. रघुरामन का कॉलम: सेहत की समस्याओं के समाधान के लिए पहले उसकी प्रक्रिया समझें

Spread the love




दृश्य 1 : कई दफ्तरों में देखा जा सकता है कि बिजनेस के शीर्ष व्यक्ति का सेक्रेटरी बॉस के केबिन के बाहर बैठा होता है और बड़े-से हॉल में सीधे उसको रिपोर्ट करने वाले अधिकतर कर्मचारी उसी के आसपास बैठते हैं। आमतौर पर 40-45 साल या वरिष्ठ आयु वर्ग का वो सेक्रेटरी फोन कॉल आते ही खड़ा हो जाता है। उसके पास बैठे लोग सिर्फ इतना ही कह पाते हैं- ‘यस सर’, ‘ओके सर’ या ‘डन इमीडियेटली सर’। फिर वह साइड शेल्फ से कुछ फाइलें उठाता है, वापस सीट पर आकर काम करने लगता है। कभी-कभी वह किसी के पास जाकर सहयोग मांगता है या निर्देश देता है और फिर डेस्क पर लौट आता है। हॉल के बीच में दो 20-30 साल के युवा मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव हंसते हुए गॉसिप करते हैं- ‘देख, चमचा खड़ा हो गया। आई एम श्योर बॉस का फोन था।’ दूसरा एग्जीक्यूटिव सिर हिलाकर थम्स अप करता है। दृश्य 2 : एक 37 साल की मां कहती हैं- ‘बेटा राजू, मम्मी के लिए ये जैम का जार खोल दो प्लीज। लगता है यह फ्रिज में ज्यादा देर रह गया तो मैं खोल नहीं पा रही।’ 11 साल का बेटा दौड़ता आता है और झट से जार खोल देता है। मां कहती हैं- ‘मेरा बेटा शेर है।’ बच्चा ये तारीफ सुन कर लौट जाता है। दृश्य नंबर 3 : जो लोग इस उम्र में नहीं हैं तो जब सुपरमार्केट जाएं तो बिना लिस्ट देखे याद करने की कोशिश करें कि क्या खरीदना है। यदि इस मेमोरी गेम में फेल होते हैं तो आप गंभीर स्ट्रेस में हैं। मेटाबोलिक हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इन तीनों मामलों में एक बात समान है- ‘प्री-फ्रैल्टी’। इसका मतलब है कोशिकाओं के स्तर पर उम्र बढ़नी शुरू हो चुकी है। हर कोशिका में माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान हो रहा है, जो हमें सांस लेने, सोचने और चलने की ऊर्जा देता है। डाइट और एक्सरसाइज ये नुकसान कम कर सकते हैं। ऊपर बताए गए सेक्रेटरी ने जब डॉक्टर के पास जाकर कहा कि ‘बॉस के जितना तेज चलते हुए उनसे बात करने में मुझे तकलीफ होती है’ तो डॉक्टर ने उन्हें वर्किंग स्टाइल में बदलाव की सलाह दी। चूंकि उनका ज्यादातर काम डेस्क का था तो हर कॉल पर खड़ा होना उनकी एक्सरसाइज का हिस्सा बन गया, ताकि शरीर लचीला बना रहे। जबकि दूसरे दृश्य वाली गृहणी ने सेहत में इस बदलाव को नहीं समझा और गिरते स्वास्थ्य के लिए फ्रिज को दोष देती रहीं। जीवन में उम्र बढ़ने के दो पीक होते हैं। एक 40 से 45 के बीच और दूसरा 60 साल पर। महिलाओं में यह प्रक्रिया 37 साल पर भी शुरू हो सकती है। स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रिया की ग्रोथ के लिए डॉक्टर नियमित और संतुलित एक्सरसाइज की सलाह देते हैं। इसमें नियमित अंतराल पर हल्की जॉगिंग, स्विमिंग या वॉक शामिल है। न्यूरोसाइंटिस्ट और हेल्थ जर्नलिस्ट डेविड कॉक्स की नई किताब ‘द एज कोड’ आने के बाद आजकल ‘प्री-फ्रैल्टी’ खासकर मॉर्निंग वॉकर्स के बीच बड़ी चर्चा में है। किताब में कॉक्स ने एक सुलभ रोडमैप बताया कि कैसे खान-पान और लाइफस्टाइल उम्र बढ़ने की जैविक प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं और सेहतमंद रहने तथा लंबा जीने के लिए कैसे इस ज्ञान का उपयोग करें। वे आपको विटामिन डी या के, इंटरमीडिएट फास्टिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज की सलाह दे सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि ‘कोई व्यक्ति जिम जाता हो, लेकिन बाकी दिन भर निष्क्रिय रहता है तो उसकी उम्र खराब तरीके से बढ़ सकती है।’ इसलिए बेहतर तरीके से उम्र बढ़ाने के लिए अच्छी मोबिलिटी महत्वपूर्ण है। फंडा यह है कि ‘एजिंग पीक’ सबके जीवन में आएगा, जो इस पर निर्भर है कि किसी ने कैसे शरीर का इस्तेमाल किया है। अगर कोई शरीर के संकेतों को समझे और समय रहते डॉक्टर की मदद से उन्हें पहचान ले तो विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई प्रक्रियाओं से इस नुकसान की भरपाई आसान होती है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *