पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  क्षमा की दाल और धैर्य की रोटी हाजमा नहीं बिगाड़ती है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: क्षमा की दाल और धैर्य की रोटी हाजमा नहीं बिगाड़ती है

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हमारे देश में भोजन के लिए दो प्रतिनिधि शब्द हैं- दाल-रोटी। इसमें समूचा भोजन समा जाता है। कहते हैं पाचन के लिए सबसे सुविधाजनक भोजन यही है। बाकी डिश तो फिर इनका विस्तार हैं। पाचन-शक्ति अच्छी होनी भी चाहिए। अब हम एक भोजन और करने लगे हैं आजकल, और वह है क्रोध। कम लोग जानते हैं कि क्रोध का असर मन ही नहीं, पाचन स्तर पर भी होता है। क्रोध से न्यूरो-हार्मोनल सिस्टम तो आहत होता ही है, पेट भी खराब हो सकता है। जब कभी क्रोध आए तो विचार करना इसके पीछे अनुशासन है या अहंकार। क्रोध को लेकर अपनी इमेज-मेकिंग न करें। कभी-कभी क्रोध करने वाले को लगता है मेरी ऊंचाई अधिक होगी, लोग मुझे पहचानेंगे, मैं अलग चरित्र बन जाऊंगा। ऐसा न किया जाए। क्रोध पूरे जीवन को आहत करता है और जीवन से बड़ा कुछ होता नहीं है। क्रोध गिराना हो तो डाइजेशन सिस्टम अच्छा रखें। भोजन के रूप में क्षमा दाल है और धैर्य रोटी है। यह दाल-रोटी खाते रहें तो क्रोध हाजमा नहीं बिगाड़ेगा।



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