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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: यदि अन्न साध लिया तो समझें कि आधा मेडिटेशन भी हो गया

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5 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

बहुत सारी जोड़ियां इस संसार में मशहूर हैं। ऐसे ही स्वभाव और आचरण की भी कुछ जोड़ियां हैं, जिनका तालमेल ठीक से बैठना चाहिए। जैसे ज्ञान के साथ विवेक, शील के साथ सदाचार, सत्य के साथ अहिंसा, सुख के साथ शांति, प्रेम के साथ आनंद, चरित्र के साथ नैतिकता। और यह तालमेल तभी सही बैठेगा, जब हम इसे आत्मा से समझें।

हम सभी को अपने शरीर पर इतना दबाव बनाना चाहिए, मन को इतना नियंत्रित करना चाहिए कि हम अपनी आत्मा की तरफ यात्रा करें। कुछ लोग कहते हैं हमारे लिए ध्यान करना कठिन है तो एक प्रयोग किया जा सकता है- अपने खानपान के प्रति जागरूक हो जाएं।

अन्न का गहरा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। अगर अन्न शुद्ध है तो हमारे ब्रेन-गट एक्सिस को मजबूत करेगा। यह बात तो अब आहार वैज्ञानिकों ने घोषित कर दी है कि खुशी देने वाले 95% हार्मोन आंतों में बनते हैं। आंतों को शुद्ध रखने के लिए अन्न-शुद्धि बड़ी आवश्यक है। और यदि अन्न साध लिया तो आधा मेडिटेशन तो हो गया।

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