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- Column By Pt. Vijayashankar Mehta – Take Criticism In The Right Spirit And Make Necessary Improvements In Yourself.
10 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
आजकल बुद्धिमानी का एक मापदंड यह भी है कि कब, किससे, कितना फायदा उठा लिया जाए। बाजार की ऊंच-नीच का फायदा उठाया जाता है। कुछ समझदार रिश्तों में भी फायदा उठाते हैं। तो एक प्रयोग करिए। फायदा उठाने की वृत्ति बुरी नहीं है। निज हित की कामना होनी चाहिए। तो यदि हमारी कहीं निंदा हो तो हम अपनी निंदा से भी फायदा उठाएं। फिर खुद में सुधार करें और आगे बढ़ जाएं।
निंदा पर कभी ज्यादा रुकें मत। उसमें सच ढूंढें और निंदा से जो सीख मिले, उसे रणनीति बनाएं। निंदा को सहन करने का एक फायदा होता है, हमारी सोच व्यापक हो जाती है। अपने से विपरीत स्वभाव वालों से मेलजोल और मित्रता करें, क्योंकि निंदा की सबसे ज्यादा भेंट वहीं से मिलेगी। फिर अधिकांश लोगों को निंदा में बड़ा रस आता है।
वो रस ले रहे होंगे, हम उस रस में से अपने भविष्य को संवारने के तरीके निकाल लें। मनुष्य का स्वभाव है, वह निंदा करेगा। तो हम अपनी निंदा न हो, इस पर ऊर्जा बिल्कुल न लगाएं। यदि हमने निंदा को सही रूप में ले लिया तो टूटा तारा भी चमकता चांद बन जाएगा। निंदा को फीडबैक के रूप में लें।








