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10 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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सवाल- मैं 33 साल की हूं। मेरा 5 साल का बेटा दोस्तों के साथ खेलते समय अपने खिलौने शेयर नहीं करता। अगर कोई बच्चा उसका खिलौना लेने की कोशिश करे तो वह तुरंत गुस्सा हो जाता है और कहता है, “ये मेरा है।”
हम उसे समझाते हैं कि दोस्तों के साथ खिलौने शेयर करने चाहिए, लेकिन वह मानता नहीं है। परिवार के लोग इसे उसकी जिद और स्वार्थी व्यवहार मानते हैं। क्या 5 साल की उम्र में बच्चों का चीजें शेयर न करना सामान्य है? हम उसे बिना डांटे शेयर करना कैसे सिखाएं?
एक्सपर्ट- रिद्धि दोषी पटेल, चाइल्ड एंड पेरेंटिंग साइकोलॉजिस्ट, मुंबई
जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। सबसे पहले समझना जरूरी है कि यह अपने आप में स्वार्थी व्यवहार नहीं है। दरअसल, इस उम्र में बच्चा अपनी पसंद, अपनी चीजों और अपनी सीमाओं को लेकर काफी स्पष्ट होता है। वह यह समझने लगता है कि ‘यह मेरा है,’ लेकिन वह अभी कई चीजें सीख रहा होता है, जैसेकि-
- परिस्थिति के अनुसार अपनी इच्छा को रोकना।
- दूसरे की जरूरत समझना।
- बारी का इंतजार करना।
ऐसे में जब बच्चा किसी दूसरे बच्चे को अपना खिलौना देने से मना करे तो पेरेंट्स को तुरंत येे बातें नहीं कहनी चाहिए, जैसेकि-
- “तुम स्वार्थी हो।”
- “तुम बहुत जिद्दी हो।”
- “अच्छे बच्चे शेयर करते हैं।”
इससे बच्चे को यह मैसेज मिलता है कि अपनी चीजों या भावनाओं को व्यक्त करना गलत है।
असल वजह समझना जरूरी
कई बार बच्चे को खिलौना शेयर करने से ज्यादा परेशानी इस बात से होती है कि दूसरा बच्चा उसकी चीज बिना पूछे ले रहा है। दोनों परिस्थितियों में अंतर है। ऐसे में बच्चे से पूछें-
“तुम अभी यह खिलौना किसी को नहीं देना चाहते?” या “तुम्हें डर है कि दूसरा बच्चा इसे खराब कर देगा?”
उसका जवाब ध्यान से सुनें। अगर वह खिलौना उस समय खुद इस्तेमाल कर रहा है तो उसे तुरंत छीनकर दूसरे बच्चे को न दें। आप कह सकते हैं-
“अभी तुम खेल रहे हो। जब तुम्हारा खेल पूरा हो जाए तो हम दूसरे बच्चे की बारी रखेंगे।”
इससे बच्चे को लगता है कि उसकी भावनाएं सुनी व समझी जा रही हैं।

शेयर करने और अपनी चीज बचाने में फर्क
पेरेंट्स अक्सर मान लेते हैं कि बच्चे को अपनी हर चीज दूसरों के साथ शेयर करनी चाहिए। लेकिन हेल्दी सोशल बिहेवियर का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को हर बार अपनी चीज छोड़ देनी चाहिए।
उसे यह भी सीखना है कि किसी की चीज लेने से पहले अनुमति मांगनी चाहिए। इसलिए अगर दूसरा बच्चा उसके हाथ से खिलौना छीन रहा है तो पेरेंट्स केवल अपने बच्चे को ‘’शेयर करो’’ न कहें। दूसरे बच्चे को भी समझाएं- ‘’पहले पूछो, फिर खिलौना लो।’’
इससे बच्चा सीखता है कि दूसरों की सीमाओं का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है, जितना अपनी चीज शेयर करना।
बच्चे को शेयरिंग सिखाने का सही तरीका
शेयर करने की आदत आदेश देने से नहीं, अभ्यास से विकसित होती है। इसके लिए घर में छोटे-छोटे मौके बनाएं। उदाहरण के लिए-
- बच्चे को स्नैक देते समय पूछें- “क्या तुम इसमें से थोड़ा पापा को देना चाहोगे?” अगर वह मना करे तो उसे शर्मिंदा न करें।
- बोर्ड गेम, गेंद या दूसरे खेलों में “मेरी बारी-तुम्हारी बारी” का अभ्यास कराया जा सकता है।
- इससे बच्चा समझता है कि शेयर करने का अर्थ अपनी चीज हमेशा के लिए छोड़ देना नहीं है।
- कई बार इसका अर्थ केवल कुछ समय के लिए अपनी बारी देना होता है।
- “यह खिलौना अभी दोस्त को दो” कहने की बजाय बच्चे को दो विकल्प दें।
- उदाहरण के लिए- “तुम यह कार अभी देना चाहते हो या पांच मिनट बाद?” इससे बच्चे को नियंत्रण का अनुभव होता है।
- अगर कुछ खिलौने उसके लिए स्पेशल हैं तो खेलने से पहले उन्हें अलग रख देना भी अच्छा तरीका है।
- उसे बताएं- “ये तुम्हारे खास खिलौने हैं। इन्हें अभी हम अलमारी में रख देते हैं। बाकी खिलौनों से दोस्त खेल सकते हैं।” इससे हर मुलाकात में संघर्ष कम होगा।
बच्चे को शेयरिंग सिखाने के लिए कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं-

बच्चे को गुस्सा आए तो क्या करें?
- जब बच्चा गुस्से में हो तो उस समय लंबा भाषण देना काम नहीं करता।
- पहले उसकी भावना को समझें और कहें- “तुम नाराज हो, क्योंकि तुम्हारा खिलौना किसी ने ले लिया।”
- फिर बताएं- “गुस्से में खिलौना छीनना या किसी को मारना गलत है।”
- बच्चे को शांत होने का थोड़ा समय दें। बाद में उसे बताएं कि अगली बार वह ऐसी स्थिति में क्या करे।
- उसे बताएं कि ऐसे समय में ये बातें बोल सकते हैं, जैसेकि- “पहले मेरी बारी है”, “तुम पांच मिनट बाद लेना” या “मुझसे पूछकर लो।”
अगर कोई सामान या खिलौना छीनने पर बच्चा गुस्सा हो तो कुछ बातों का ख्याल रखें-

तुलना से आती नफरत
तुलना बच्चे में नफरत और प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकती है, जैसेकि-
- “देखो, बाकी बच्चे कितने अच्छे हैं।”
- “तुम्हारी बहन तो शेयर करती है।”
- “तुम्हारा दोस्त कितना समझदार है।”
इसके बजाय बच्चे के अच्छे व्यवहार की तारीफ करें। अगर बच्चे ने पांच मिनट बाद खिलौना दूसरे बच्चे को दिया तो कहें-
“तुमने अपनी बारी पूरी होने के बाद खिलौना दिया। तुमने इंतजार करना सीखा।”
यानी बच्चे को अच्छा या बुरा कहने की बजाय उसके खास व्यवहार को पहचानें।

घर के माहौल का भी पड़ता असर
अगर घर में बच्चे की हर डिमांड तुरंत पूरी होती है या उसे कभी इंतजार करना नहीं पड़ता तो उसे अपनी इच्छा रोकना कठिन लग सकता है। दूसरी तरफ, अगर घर में उसकी चीजें बार-बार बिना पूछे इस्तेमाल की जाती हैं तो वह उन्हें लेकर ज्यादा पजेसिव हो सकता है। बच्चे इस उम्र में उपदेश से ज्यादा देखकर सीखते हैं। इसलिए पहले पेरेंट्स खुद रोल मॉडल बनें। इसके लिए कुछ बाताें का ध्यान रखें-

अंतिम बात
अभी आपका बेटा 5 साल का है। आपका लक्ष्य बच्चे को हर चीज शेयर करवाना नहीं, बल्कि उसे साझा करना, बारी का इंतजार करना, अपनी सीमा बताना, दूसरे की सीमा समझना और गुस्से को संभालना सिखाना है। पांच साल की उम्र में ये स्किल्स अभी विकसित हो रही होती हैं। इसलिए धैर्य, नियमित अभ्यास और माता-पिता का सही उदाहरण डांट से ज्यादा प्रभावी रहेगा।
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ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा
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