Hindi News Opinion Shekhar Gupta Column | Is India Truly A Soft State? Analysis & Facts 7 घंटे पहले कॉपी लिंक शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’ क्या भारत एक ‘सॉफ्ट स्टेट’ रहा है? क्या उसने अपने दुश्मनों को बहुत फायदा उठाने दिया? क्या हम बार-बार यह नहीं सोचते कि काश हम पटेल, नेताजी, सावरकर के […]
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शेखर गुप्ता का कॉलम: राजनीति में नयापन सरकारों के लिए जरूरी है
Hindi News Opinion Shekhar Gupta Column | Political Innovation Essential For Governments 5 घंटे पहले कॉपी लिंक शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’ अगर आप वादा करें कि आप गूगल में सर्च नहीं करेंगे तो मैं आपसे तीन सवाल करना चाहूंगा। पहला सवाल : मोदी सरकार में ज्ञानेश कुमार से पहले कितने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: घरेलू राजनीति में दूसरों को महत्व क्यों दें?
Hindi News Opinion Shekhar Gupta Column | India Bangladesh Pakistan Diplomacy & Strategy 4 घंटे पहले कॉपी लिंक शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’ भारत का बिल्कुल करीबी पड़ोसी बांग्लादेश दो साल पहले की तुलना में आज ज्यादा तनावपूर्ण दिखता है। इसका असर यह हुआ है कि पड़ोस में संकट या संबंधों में खटास हमारी घरेलू […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: चीन, रूस और भारत का दुनिया को देखने का अलग-अलग नजरिया रहा है…
Hindi News Opinion Shekhar Gupta Column | China Russia India Global Perspective Analysis 6 घंटे पहले कॉपी लिंक शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’ ब्रिक्स सम्मेलन में जो तीन ताकतवर नेता (शी, पुतिन, मोदी) इकट्ठे हुए, उनमें अतीत में तालमेल से ज्यादा अंतर्विरोध दिखता रहा है। दुनिया को देखने का उनमें से हर एक का अलग-अलग […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: हम ‘फूड बनाम फ्यूल’ के जाल में न फंसें
भाजपा का वफादार वोटबैंक आज पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट को लेकर गुस्से में है। पिछले महीनों में एयरपोर्ट पर, शादियों में, होटल की लॉबी में, मेहमानों और टैक्सी ड्राइवरों के रूप में मुझे कई लोग मिले, जो नाराज दिखे। उनका गुस्सा यह था कि वे हमें जबरदस्ती एथेनॉल मिला पेट्रोल (ईबीपी) कैसे दे सकते […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: इमरान की कहानी दुनिया के सामने आ गई है
Hindi News Opinion Shekhar Gupta Column | Imran Khan Controversy Exposed At Lords Cricket 4 घंटे पहले कॉपी लिंक शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’ इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल आथर्टन ने क्रिकेट के लिए चाहे जो कुछ भी किया हो, लेकिन उन्हें अब इमरान खान के भविष्य के सवाल को दुनिया के सामने लाने के […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: अपने महान युद्धवीरों को याद रखना जरूरी है
जनरल डगलस मैकआर्थर का प्रसिद्ध कथन है कि ‘पुराने सैनिक मरते नहीं, वे बस भुला दिए जाते हैं’। बीते सप्ताह इस विडम्बना को सामने ला दिया एक महान पूर्व सेनाध्यक्ष ने, जिन्हें हत्यारों ने अपनी गोलियों का निशाना बनाया था। दो महावीर चक्रों (एमवीसी) से सम्मानित केवल छह भारतीयों में वे शामिल थे। ये सम्मान […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: जेन-जी को संघ के समर्थन में एक सबक है
संघ के सौ साल पूरे होने के साथ ही संघ प्रमुख मोहन भागवत भी अपनी छवि में नाटकीय परिवर्तन लाए हैं। उन्होंने अपने समर्थकों और आलोचकों को भी उलझन में डाल दिया है। कुछ लोगों को लग रहा है कि वे जो उदारवादी रुख अपना रहे हैं, उसके कारण संघ के ठोस वैचारिक आधार से […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: राजनीति में अब नए विचारों की जरूरत है
यह आपके राजनीतिक रुझान पर है कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसे आप क्रांति मानें या एक आई-गई आंधी। पर इतना तो निश्चित रूप से हुआ कि पहली बार सरकार के खिलाफ सीधा जनाक्रोश उभरा और उसकी खुली निंदा हुई। 20 जुलाई के बाद सरकार ने अगर तत्परता से कदम उठाए तो इसकी असली […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: एक दुष्चक्र में फंस गए हैं देश के स्टूडेंट्स
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारी अपने घर लौट गए हैं, लेकिन युवाओं की परेशानियां अभी खत्म नहीं होंगी। आज के समय में भारतीय बच्चों का बचपन सबसे ज्यादा तनाव भरा और प्रतियोगिता वाला बन गया है। ‘नीट’ को ही लें। इस साल 22 लाख बच्चों ने परीक्षा दी। 5 फीसदी को एमबीबीएस की […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: कांग्रेस के उभार की सम्भावना कितनी है?
Hindi News Opinion Shekhar Gupta Column | Congress Revival Prospect & BJP Political Strategy 4 घंटे पहले कॉपी लिंक शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’ हाल ही में मैंने अपने एक कॉलम में लिखा था कि लोकसभा में अल्पमत में होने के बावजूद भाजपा देश को एकदलीय व्यवस्था की ओर ले जा रही है। लेकिन इसका […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: पंजाब की सियासत में पेचीदगियां कम नहीं
बिलकुल सामान्य समय में भी पंजाब में कोई यह मानने को तैयार नहीं होगा कि ओटीटी फिल्म ‘सतलुज’ को रिलीज होने के बाद जिस तरह अचानक वापस ले लिया गया, उसके पीछे राजनीति नहीं होगी। फिल्म को 48 घंटे के अंदर वापस क्यों ले लिया गया? हर किसी को पता होना चाहिए कि एक बार […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: कांग्रेस ने राष्ट्रवाद के मुद्दे से दूरी क्यों बनाई?
राष्ट्रीय राजनीति में फिलहाल जो मंथन चल रहे हैं, उसके दो पहलू हैं। एक यह कि लोकसभा में अल्पमत में होने के बावजूद भाजपा ने भारत को लगभग एक पार्टी के शासन वाला देश बनाने का चमत्कार कर डाला है। और दूसरा यह कि यह काम क्षेत्रीय दलों को तोड़कर किया जा रहा है और […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: दंगों के कारणों पर बात करना जरूरी है
माल्टा में जन्मे अमेरिकी कार्टूनिस्ट जो सैको ने अपने अनूठे ‘कॉमिक्स जर्नलिज्म’ के बूते दुनिया भर में तो लोकप्रियता हासिल की ही है, अपने भारी-भरकम बायोडाटा में उन्होंने अपनी सबसे ताजा किताब ‘द वंस एंड फ्यूचर रायट’ के रूप में एक और उपलब्धि जोड़ ली है। लेकिन प्रकाशक ने इस किताब को वितरण से रोक […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: वह क्या है, जो ‘ब्रांड इंडिया’ को नुकसान पहुंचा रहा है?
वह क्या चीज है, जो ब्रांड इंडिया को नुकसान पहुंचा रही है? तीन दशक पहले आर्थिक सुधारों के बाद भारत विकसित देशों की नजरों में एक पसंदीदा देश बन गया था, लेकिन अब हालात क्यों बदल गए हैं? निवेशक पैसा निकालकर जा रहे हैं और भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या अभी तक वर्ष […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: पाक की नियति बन चुकी है भुलावे में रहना
भारत के साथ पाकिस्तान के युद्ध का इतिहास कैसा रहा है? सामरिक रूप से ठीक, लेकिन रणनीतिक रूप से नुकसानदायक। यही वजह है कि वह पूरी ताकत से शुरुआत करने के बावजूद हर युद्ध हारता है। लेकिन 1971 और कारगिल युद्ध को छोड़कर उसने ज्यादातर युद्धों में जीत का दावा किया है। गत वर्ष की […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: क्या अब राजनीति में मुसलमान हाशिये पर हैं?
करीब सात साल पहले मैंने एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक था : ‘क्या मुसलमान भाजपा के लिए कोई अहमियत रखते हैं?’ हाल के राज्यों के चुनाव नतीजे- खासकर बंगाल और असम के- जहां मुस्लिम वोटरों की आबादी 30% से ज्यादा है- दिखाते हैं कि यह मुद्दा अब और बड़ा हो गया है। राजनीतिक तौर […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: पश्चिम बंगाल के चुनाव में वामपंथी कहां हैं?
बंगाल में दीवारों पर लिखी इबारतों को आप कोलकाता और उससे बाहर घूमे बिना कैसे पढ़ पाएंगे? तो आइए, मेरे साथ उत्तर में 600 किमी दूर सिलीगुड़ी के 60 किमी संकरे कॉरीडोर में चलिए या बंगाल की मुख्य भूमि से उत्तर तथा पूरब के हिमालयी जिलों को जोड़ने वाली 90 किमी चौड़ी पट्टी तक। चलिए, […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: इस मौके का उपयोग मजबूत बनने में करें
Hindi News Opinion Shekhar Gupta Column: Use Opportunity To Strengthen India | Global Tensions 4 घंटे पहले कॉपी लिंक शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’ दुनिया कई युद्धों में उलझी हुई है, गठबंधनों के स्वरूप बदल और बिखर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में जोर-जबर्दस्ती बढ़ रही है। इन वजहों का तकाजा है कि हम अपने […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: चीन एनर्जी-संकट से क्यों नहीं जूझ रहा?
एलपीजी और प्राकृतिक गैसों की कमी भारत में घरों से लेकर मझोले तथा लघु उद्योगों और खाद उत्पादन तक को जिस तरह से परेशान कर रही है, इसका जायजा लेते हुए मुझे उत्सुकता हुई कि चीन इतना शांत क्यों है। नतीजा यह निकला कि उसने बुद्धिमानी बरती। चीन के पास भी हमारी तरह तेल और […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: पाकिस्तान को नहीं पता आगे क्या करना है
लोग इस बात पर शोर मचा रहे हैं कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल है और हम नहीं हैं। ऐसा क्यों? क्या हम महत्वहीन हो गए हैं? क्या हमने अपनी नैतिक ताकत खो दी है? विपक्ष सरकार पर हमला करेगा, क्योंकि उसका काम ही यही है। सरकार भी इस सवाल का […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: युद्ध के दौर में हम अपने विकल्प चुन रहे हैं
कोई भी युद्ध कहीं भी हो, बुरा है। खासकर वह युद्ध तो और बुरा है, जो हमारे इलाके के इतना पास हो और हमारी एनर्जी की सप्लाई को दबा रहा हो। खाड़ी के देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय कामगार काम कर रहे हैं, उन देशों से बड़े स्तर पर हमारा आपसी निवेश हुआ है […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: ट्रम्प के उकसावे में न आना हमारी समझदारी
Hindi News Opinion Shekhar Gupta Column: Indias Wisdom In Not Taking Trumps Provocation 11 घंटे पहले कॉपी लिंक शेखर गुप्ता, एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’ ट्रम्प अपने सहयोगियों और मित्रों को अपमानित करते हैं। इसे समझने का एक सरल तरीका भी है, जिसे अगर हम भारत में ट्रकों के पीछे लिखी सूक्तियों से समझें तो इस सूक्ति […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: अफगानिस्तान से भिड़कर घिर गया है पाकिस्तान
Hindi News Opinion Shekhar Gupta’s Column Pakistan Is Cornered After Clashing With Afghanistan 3 घंटे पहले कॉपी लिंक शेखर गुप्ता एडिटर-इन-चीफ, ‘द प्रिन्ट’ जब तीन महाशक्तियां अपनी ताकत के शिखर पर थीं, तब उन्होंने अफगानिस्तान को दबाने की कोशिश की मगर नाकाम रहीं। ब्रिटेन ने 19वीं सदी के मध्य में, सोवियत संघ ने 1979 के […]
शेखर गुप्ता का कॉलम: हमारे लिए अपने हित सबसे महत्वपूर्ण रहे हैं
‘सम्प्रभुता’ इस साल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला शब्द बन सकता है। ट्रम्प ने इसे चलन में ला दिया है। वैश्वीकरण पर तीन दशकों से जो आम सहमति बनी हुई थी, उसे उन्होंने तोड़ दिया है। उस सहमति ने मित्र-देशों और सहयोगियों के साथ गठबंधन में अपनी सम्प्रभुता साझा करने के फायदे दिखाए थे। […]





















