10 घंटे पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय
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मुमताज हिंदी फिल्मों की एक बहुत ही मशहूर और पसंद की जाने वाली एक्ट्रेस रही हैं। 1960 और 1970 के दौर में लोग उन्हें उनकी खूबसूरती, दमदार एक्टिंग और प्यारी मुस्कान के लिए बहुत पसंद करते थे।
मुमताज का जन्म 31 जुलाई 1947 को हुआ था। अपने जन्मदिन के मौके पर दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान मुमताज ने बचपन की यादें शेयर करते हुए बताया कि बर्थडे और त्योहारों का जश्न उनके लिए हमेशा खास रहा है।
मुमताज ने बताया कि वे ईरानी परिवार से ताल्लुक रखती हैं और मुंबई में ही पली-बढ़ीं। उनके बचपन में जन्मदिन के मौके पर माता-पिता चॉकलेट लाते थे, फैंस को बुलाकर केक कटता था, और गिफ्ट्स बांटे जाते थे। यह सिलसिला आज तक जारी है। उनकी मां भी अपने समय में यही करती थीं जैसे केक काटना, पार्टी करना और बच्चों को गिफ्ट देना। वक्त जरूर बदला है, पर यह परंपरा आज भी वैसी ही बनी हुई है।
मुमताज ने बताया कि जब वे छोटी थीं, तो दिवाली और जन्मदिन पर उनकी मां उन्हें दो-तीन टोकरी भर पटाखे देती थीं। साथ ही ड्राइवर और आया को ताकीद करती थीं कि बच्ची का ध्यान रखना, कहीं हाथ न जल जाए।

मुमताज ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर भी हैं और इस पर बनी डॉक्युमेंट्री ‘1 ए मिनट’ में नजर आई थीं।
पहले मुमताज वालकेश्वर में लता मंगेशकर के पड़ोस में रहा करती थीं और फिर मरीन ड्राइव के गोविंद महल में शिफ्ट हुईं, जहां जयकिशन जी का घर था। वहां भी वे नौकरों के साथ मिलकर पटाखे फोड़ा करती थीं। मुमताज ने यह भी कहा कि बच्चों को कितना भी समझाओ, थोड़ा-बहुत जल ही जाते हैं, लेकिन यही सब बचपन का हिस्सा हुआ करता था।
मीना कुमारी का बंगला कैसे ले लिया था? अपने पुराने दिनों को याद करते हुए मुमताज ने बताया कि मीना कुमारी ने ‘गोमती के किनारे’ फिल्म को प्रोड्यूस किया था। फिल्म के लिए मुमताज की फीस साढ़े सात लाख रुपए थी।
लेकिन बाद में मीना कुमारी ने पांच लाख रुपए नहीं किए। जब मुमताज ने इस बारे में बात की, तो मीना कुमारी ने बहुत ही सादगी और मोहब्बत से कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं चल रही है और वे अब पैसे नहीं लौटा पाएंगी। उन्होंने मुमताज को प्रस्ताव दिया कि पैसे के बदले वे उनका बंगला ले लें।

1972 फिल्म ‘गोमती के किनारे’ में मीना कुमारी और मुमताज लीड रोल में थीं। यह मीना कुमारी की आखिरी रिलीज फिल्म थी।
मुमताज ने उस वक्त साफ कहा था कि अगर पैसे नहीं हैं, तो कोई बात नहीं, वापस मत दीजिए, लेकिन मीना कुमारी ने उन्हें मना कर दिया और कहा, “आपके पैसे लेकर मैं क्या करूंगी? आप इसे माफ कर दो और यह बंगला ले लो।”
मीना कुमारी ने बड़े अपनत्व और मोहब्बत के साथ कहा था, “बेटा, तुम बंगला ले लो।” मुमताज ने बताया कि वह बंगला उन्हें खुशी-खुशी दिया गया था। दिलचस्प बात यह भी रही कि उस वक्त उनका और राजेश खन्ना का बंगला आमने-सामने था। हालांकि, बाद में राजेश खन्ना ने वह बंगला बेच दिया और उसकी जगह एक बिल्डिंग बन गई।
शुरुआती फिल्मों में मुमताज ने छोटे रोल किए
मुमताज ने अपने करियर की शुरुआत सिर्फ 11 साल की उम्र में फिल्म ‘लाजवंती’ (1958) से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘सोने की चिड़िया’, ‘स्त्री’ और ‘सेहरा’ जैसी फिल्मों में छोटे रोल किए।।
मुमताज अपने समय में एक्ट्रेस के साथ बेहतरीन डांसर भी रही हैं। उनकी फिल्मों में उनके डांस परफॉर्मेंस को ऑडियंस हमेशा पसंद करती थी।
मुमताज ने ‘ब्रह्मचारी’ (1968), ‘राम और श्याम’ (1967), ‘आदमी और इंसान’ (1969) और ‘खिलौना’ (1970) जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया है।

1990 में मुमताज ने फिल्म ‘आंधियां’ से कमबैक की कोशिश की, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली। इसके बाद उन्होंने दोबारा फिल्मों में वापसी नहीं की।
करियर के पीक में मुमताज ने फिल्में क्यों छोड़ी?
लगभग 100 फिल्में करने वाली मुमताज ने अपने करियर के पीक पर अचानक फिल्में छोड़ने का फैसला किया था। उस वक्त वो सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में शामिल थीं, लेकिन उन्होंने शादी के बाद एक्टिंग छोड़ दी और परिवार को प्राथमिकता दी।
मुमताज ने बिजनेसमैन मयूर माधवानी से 1974 में शादी की थी। मुमताज ने माना था कि उनके ससुराल वालों को पसंद नहीं था कि वो शादी के बाद भी फिल्मों में काम करें।
मुमताज ने विकी लालवानी से बातचीत में कहा था,
मेरी शादी के वक्त माधवानी परिवार ने कहा कि अब काम नहीं कर सकती। उस वक्त मैं सबसे ज्यादा पैसे लेने वाली एक्ट्रेस थी। कौन लेता था 7.5 लाख रुपए एक फिल्म के? लेकिन जब उन्होंने मना किया, तो मैंने काम छोड़ दिया।


मुमताज और मयूर माधवानी की शादी से उनकी दो बेटियां नताशा और तान्या हैं।
मुमताज का मां बनने तक का सफर आसान नहीं रहा
मयूर माधवानी की ट्रेडिशनल गुजराती फैमिली में मुमताज को खुद को ढालना पड़ा। मुमताज ने कहा था,
मैंने दाल-ढोकली, उंधिया और खांडवी बनाना सीखा। आज मैं ठीक-ठाक कुक हूं।

हालांकि, बच्चों की बात आई तो राह आसान नहीं रही थी। मुमताज ने बताया था,
मेरे कई बार मिसकैरेज हुए। नताशा के समय मैं छह महीने तक बिस्तर पर पड़ी रही, सिर्फ छत को घूरती थी। इसलिए मेरे बच्चे मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं।

मुमताज की शादी में सब कुछ ठीक नहीं रहा। उनके पति का किसी और महिला से संबंध था।

मुमताज को फिल्म ‘खिलौना’ के लिए 1970 में फिल्मफेयर का बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड भी मिल चुका है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुमताज ने इस बात को स्वीकार करते हुए कहा था कि मैं एक छोटी सी गलती की वजह से अपनी शादी नहीं तोड़ सकती थी। मेरा पति फ्लर्ट नहीं है। वो हैंडसम है, गलती हुई। मैंने उसे छोड़ने की बजाय साथ देना बेहतर समझा।
पिंकविला से बातचीत में मुमताज ने कहा था कि अक्सर मर्दों के अफेयर छुपकर होते हैं। मेरे पति का सिर्फ एक था।
मुमताज ने आगे कहा था कि उन्होंने मुझसे माना कि उन्हें अमेरिका में एक लड़की पसंद आई थी, लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि वो मुझे कभी नहीं छोड़ेगा। मैं उसकी ईमानदारी की इज्जत करती हूं।
पति की बेवफाई से मुमताज इतनी आहत हुईं कि उन्होंने भी भारत आकर एक छोटा-सा अफेयर किया था।
मुमताज ने कहा था,
उसके बाद मैं अकेली महसूस करने लगी। मैं थोड़ी रौब वाली थी, दुखी थी। तो मैं इंडिया चली आई। जब चारों तरफ कांटे हों और कोई एक गुलाब लेकर आए, तो इंसान बहक जाता है, लेकिन वो कुछ खास नहीं था, बस एक छोटा-सा फेज था जो जल्द खत्म हो गया।









